छत्तीसगढ़ / बस्तर

’हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026’ : प्रकृति, संस्कृति और नागरिक विज्ञान का अनूठा संगम

जगदलपुर 13 अगस्त 2026

प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर और परिंदों की दुनिया को सहेजने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा एक बड़ा जन-अभियान शुरू किया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन केवल पक्षियों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की समृद्ध संस्कृति, अमूल्य प्रकृति और जन-भागीदारी को आपस में जोड़ने वाला एक राष्ट्रीय स्तर का नागरिक विज्ञान अभियान है। वर्ष 2025 में आयोजित किए गए पायलट प्रोजेक्ट के बेहद उत्साहजनक परिणामों के बाद अब वर्ष 2026 में इसे पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है।

    इस अनूठे बर्ड फेस्टिवल की शुरुआत छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व हरेली के पावन अवसर पर 14 से 16 अगस्त के मध्य की जा रही है। अगस्त का महीना चुनने के पीछे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक कारण हैं। मानसून के इस समय में छत्तीसगढ़ चारों ओर हरी-भरी प्रकृति से आच्छादित रहता है, जो पक्षियों के लिए एक अनुकूल वातावरण निर्मित करता है। यह समय अधिकांश स्थानीय पक्षियों का प्रजनन काल भी होता है, जब पक्षी अपनी विविध गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। इसके अतिरिक्त इस दौरान एशियन ओपनबिल स्टॉर्क, बगुले और हेरॉन जैसे पक्षी समूहों में बड़े वृक्षों पर घोंसले बनाते हैं, जिससे उनके अध्ययन और गणना में वैज्ञानिक सुगमता रहती है।

    इस अभियान का मुख्य ध्येय छत्तीसगढ़ के स्थानीय पक्षियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर विशेष पहचान दिलाना है। इसके माध्यम से राज्य के शहरी, ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के लोगों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ा जाएगा, जिससे लोक जैव विविधता पंजी के लिए प्रामाणिक वैज्ञानिक डेटा प्राप्त हो सके। अभियान के तहत आर्द्र भूमि, कृषि क्षेत्रों तथा ग्रामीण व शहरी आवासों में मौजूद पक्षियों का वैज्ञानिक प्रलेखन किया जाएगा। यह व्यापक डेटा आगे चलकर राज्य की जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाने और पक्षी आवासों के दीर्घकालिक संरक्षण की नीतियां तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।

    इस अभियान में राज्य के सभी 33 जिलों के 146 विकासखंडों के साथ-साथ प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों एवं अभयारण्यों को शामिल किया गया है। अभियान के अंतर्गत लगभग 1,500 से 2,000 स्वयंसेवक, शोधकर्ता, पक्षी विशेषज्ञ, वन विभाग के अधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी और स्थानीय समुदाय के लोग एक साथ मिलकर पक्षियों की गणना और अवलोकन करेंगे। पक्षी गणना के दौरान जुटाई गई समस्त जानकारियों को वैज्ञानिक पद्धतियों के अनुरूप ई-बर्ड मोबाइल ऐप पर दर्ज किया जाएगा। इसके बाद बर्ड काउंट इंडिया और अन्य सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से इन आंकड़ों का विश्लेषण कर एक प्रामाणिक पक्षी डेटाबेस तथा ज्ञान-पुस्तक प्रकाशित की जाएगी।

    छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के नेतृत्व में आयोजित हो रहे इस व्यापक कार्यक्रम में बर्ड्स एंड वाइल्डलाइफ ऑफ छत्तीसगढ़, फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी, युवान, छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा, छत्तीसगढ़ वाइल्ड लाइफ सोसायटी, बर्ड काउंट इंडिया, ई-बर्ड इंडिया और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं सह-आयोजक के रूप में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। गौरतलब है कि राज्य का 44 प्रतिशत भाग वनक्षेत्र और 4.1 प्रतिशत जलीय क्षेत्र होने के कारण यहाँ जैव विविधता की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में ई-बर्ड पोर्टल पर राज्य के 1,747 पक्षी प्रेमियों द्वारा 448 पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है, और हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026 के जरिए इस आंकड़े को एक नया और वैज्ञानिक विस्तार मिलने जा रहा है। 

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