आदिवासी विकास सहायक आयुक्त विभाग का बुरा हाल ....
गरियाबंद |
09-Feb-2024
संविदा इंजीनियर के भरोसे जिला
ठेकेदारो की चांदी ही चांदी
गरियाबंद-: आदिवासी सहायक आयुक्त विभाग में इन दिनों करोड़ो रूपये का निर्माण जिर्णोद्धार कार्य चल रहे है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इन निर्माण कार्यो को देखने वाला एक मात्र संविदा इंजीनियर के भरोसे चल रहाहै जिसके चलते निर्माण कार्यो की गुणवत्ताहीन कार्यो को गुणवत्ता प्रमाण पत्र देकर भ्रष्ट्राचार की सीमा पार कर दी है, इंजीनियर संविदा नियुक्ति में है और कांग्रेस सरकार की तरह भाजपा में भी भरोसे की सरकार चल रही है ।
यह बताना लाजिमी होगा कि गरियाबंद आदिवासी जिला है यहां कलेक्टर, एस.पी. से लेकर आला अफसरों का मुख्यालय है लेकिन आदिवासी सहायक आयुक्त में पदस्थ इंजीनियर आला अफसरों को ठेंगा दिखाते हुए रायपुर राजधानी से आना-जाना करते है । गरियाबंद शहर के कुछ ठेकेदार संविदा इंजीनियर के चहेते है वही ठेकेदार करोड़ो रूपये के कार्य करते है जिसके चलते भ्रष्ट्राचार चरम पर है बता दे कि आदिवासी विकास सहायक आयुक्त विकास सहायक आयुक्त भी संविदा इंजीनियर को रायपुर में निवास करने के लिए खुली छुट दे रखी है, जिनके चलते संविदा इंजीनियर के पौ-बारह हो गये है, सहायक आयुक्त संविदा इंजीनियर को निर्देश भी नही दे सकते है कि गरियाबंद जिला मुख्यालय में रहकर निर्माण कार्यो को देखे...?
सुत्र बताते है कि उक्त संविदा इंजीनियर गरियाबंद जिला के अलावा एक अन्य जिले का प्रभार में है । एक संविदा इंजीनियर दो-दो जिलों के प्रभार देने से ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस शासन काल की राजनीतिक पहुंच भाजपा शासनकाल में भी चल रही है । बेहद भरोसेमंद सुत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गरियाबंद आदिवासी विकास सहायक आयुक्त विभाग में कार्यरत् संविदा इंजीनियर द्वारा दो-दो जिला के प्रभार में होने से ठेकेदार द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यो की गुणवत्ता को किनारे रखकर अपने चहेते ठेकेदारों को खुलकर फायदा पहुंचाया जा रहा है जबकि वर्तमान में करोड़ो रूपये के कार्य विभाग में चल रहा है इंजीनियर और ठेकेदारों की चांदी है ।
कांग्रेस शासन में उक्त इंजीनियर रिटायर मेट के बाद पुनः संविदा नौकरी प्राप्त करने में सफलता हासिल कर ली और अपने मन पंसद गरियाबंद जिला में पदस्थ भी हो गए । गौर करने वाली बात है कि भाजपा शासन में संविदा इंजीनियर की तूती बोलती है । कहने को गरियाबंद आदिवासी जिला है लेकिन देखा जाए तो आदिवासी के विकास और उत्थान के लिए केन्द्र व राज्य सरकार से प्राप्त राशि का यहां बंटरबाट हो रहा है आदिवासियों को विकास के नाम पर ठगा जा रहा है जिसे देखने की फुर्सत जिम्मेदार अफसरों को नही है ।
भाजपा सत्तारूढ़ होने के बाद उम्मीद थी कि गरियाबंद आदिवासी जिले में आदिवासी विकास सहायक आयुक्त विभाग में प्रभारी आदिवासी को उनके मूलपद में भेज दिया जाएगा और संविदा इंजीनियर को यहां से हटाकर किसी अन्य दूसरे इंजीनियर की पदस्थापना की जाएगी लेकिन सरकार जरूर बदल गई, विभाग का रवैय्या वैसा ही है, जैसे कांग्रेस शासन में था, विभागीय मंत्री को भी गरियाबंद आदिवासी विकास सहायक आयुक्त विभाग में क्या चल रहा है देखने की फुर्सत नही है ।