यह मामला जिला कबीरधाम जनपद पंचायत पंडरिया के ग्राम पंचायत सेमरकोना की शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकान क्रमांक 572004030 को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान में राशन लेने के लिए हितग्राहियों का फिंगरप्रिंट तो लिया जा रहा है, लेकिन चावल का वितरण नहीं किया जा रहा है। तीन-चार माह से राशन नहीं मिलने की शिकायत के बाद अब करीब 40 हितग्राहियों की सूची सामने आने से मामला गंभीर नजर आ रहा है।
ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों को सौंपे गए आवेदन में कहा गया है कि अनेक हितग्राही लंबे समय से अपने हक के राशन का इंतजार कर रहे हैं। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, दुकान में अंगूठा अथवा फिंगरप्रिंट की प्रक्रिया पूरा किए जाने के बाद भी उन्हें खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
कागजों में वितरण, जमीन पर हितग्राही खाली हाथ?
ग्रामीणों की शिकायत का सबसे गंभीर पहलू फिंगरप्रिंट लिए जाने के बाद भी राशन नहीं मिलने का आरोप है। यदि हितग्राहियों का फिंगरप्रिंट दर्ज होने के बावजूद उन्हें खाद्यान्न नहीं मिला है, तो राशन वितरण की पूरी प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता है। यही वजह है कि ग्रामीणों ने प्रशासन से दुकान के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
40 नामों की सूची ने बढ़ाई मामले की गंभीरता
शिकायत के साथ ग्रामीणों ने करीब 40 हितग्राहियों के नामों की सूची भी प्रस्तुत की है। सूची में हितग्राहियों के हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान दर्ज हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक-दो परिवारों की समस्या नहीं है, बल्कि कई हितग्राहियों को लगातार राशन नहीं मिलने की शिकायत है
बकाया राशन दिलाने और जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि जिन हितग्राहियों के नाम पर राशन वितरण की प्रक्रिया दर्ज हुई, उन्हें वास्तविक रूप से खाद्यान्न मिला या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और हितग्राहियों को उनका लंबित राशन दिलाया जाए।
ग्रामीणों की यह शिकायत अब खाद्य विभाग और प्रशासन के लिए जांच का विषय बन गई है। तीन-चार माह से राशन नहीं मिलने और फिंगरप्रिंट लिए जाने के आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन करीब 40 हितग्राहियों की सूची सामने आने से मामले की गंभीरता जरूर बढ़ गई है।