छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

ट्रॉफी ने जगाई जिज्ञासा, ‘पुरस्कार’ पाठ बना यादगार

 व्याख्याता तुलसराम चंद्राकर की अनूठी पहल से कक्षा में दिखा उत्साह, टीमवर्क और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल


पंडरिया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कामठी में रसायन शास्त्र के व्याख्याता तुलसराम चंद्राकर द्वारा कक्षा 10वीं के हिंदी पाठ ‘पुरस्कार’ को पढ़ाने के लिए अपनाया गया नवाचार इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने एक साधारण ट्रॉफी को सीखने की प्रेरणा का माध्यम बनाकर विद्यार्थियों में जिज्ञासा, उत्साह, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने का अनूठा प्रयास किया।

पाठ की शुरुआत के दिन व्याख्याता तुलसराम चंद्राकर हाथ में ट्रॉफी लेकर कक्षा में पहुंचे। ट्रॉफी देखते ही विद्यार्थियों में उत्सुकता बढ़ गई और उन्होंने शिक्षक से पूछा, “सर, यह क्या है?” शिक्षक ने सीधे उत्तर देने के बजाय यही सवाल विद्यार्थियों के सामने रख दिया। विद्यार्थियों ने जवाब दिया कि यह ट्रॉफी है, जो उत्कृष्ट प्रदर्शन करने अथवा प्रतियोगिता में जीत हासिल करने वालों को पुरस्कार के रूप में प्रदान की जाती है।

शिक्षक ने विद्यार्थियों के इसी उत्तर को पाठ से जोड़ते हुए कहा कि आज वे हिंदी का ‘पुरस्कार’ पाठ पढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि पाठ के समापन के बाद ‘कौन बनेगा ज्ञानपति’ के तहत एक समूह प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समूह को इसी ट्रॉफी से सम्मानित किया जाएगा। इसके बाद ट्रॉफी को कई दिनों तक कक्षा में ही रखा गया, जिससे विद्यार्थियों में इसे हासिल करने की उत्सुकता बनी रही।

ट्रॉफी को देखकर विद्यार्थियों में पाठ के प्रति विशेष रुचि दिखाई दी। वे न केवल पाठ को ध्यानपूर्वक पढ़ने और समझने लगे, बल्कि अपनी-अपनी टीम को विजेता बनाने के लिए आपसी चर्चा, सहयोग और तैयारी भी करने लगे।

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