क्षमा मांगनी पड़े ऐसा कार्य और व्यवहार ही न करें : मुनि संवेगरत्न सागर
रायपुर । हर वर्ष संवत्सरी महापर्व पर प्रतिक्रमण कर हम अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगते हैं। ऐसा न हो कि आज प्रतिक्रमण कर क्षमा मांग ली और अगले ही दिन फिर वही कार्य और व्यवहार शुरू हो जाए। हमें अपने कार्य और व्यवहार में विवेक रखना चाहिए। ऐसा कोई कार्य या व्यवहार ही न करें, जिसके लिए बाद में क्षमा मांगनी पड़े। ये सीख धर्मसभा में मुनि संवेगरत्न सागर ने दी।
विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास के अंतर्गत पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अंतिम दिवस 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर दिनभर विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। धर्मसभा में बारसा सूत्र का वांचन होगा। इसके बाद मुनिभगवंतों की पावन निश्रा में चैत्य परिपाटी निकाली जाएगी। दोपहर में संवत्सरी प्रतिक्रमण के दौरान श्रावक-श्राविकाएं सालभर में हुई भूलों और जाने-अनजाने में किए गए पापों के लिए आत्मावलोकन करते हुए क्षमायाचना करेंगे।
लाभार्थी परिवार बोहराएगा मूल सूत्र, होगी पांच ज्ञान की पूजा
संवत्सरी महापर्व के अवसर पर लाभार्थी परिवार की ओर से मुनि संवेगरत्न सागर को मूल सूत्र (बारसा सूत्र) बोहराया जाएगा। धर्मसभा में लाभार्थी परिवारों द्वारा पांच ज्ञान की पूजा की जाएगी। इसके बाद मुनिश्री के मुखारविंद से श्रावक- श्राविकाएं बारसा सूत्र का वांचन सुनेंगे। बारसा सूत्र से संयम, सदाचार और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
उपाश्रय से जिनालय तक निकलेगी चैत्य परिपाटी
बारसा सूत्र के वांचन के बाद मुनिभगवंतों की पावन निश्रा में ज्ञानवल्लभ उपाश्रय से पार्श्वनाथ जिनालय तक चैत्य परिपाटी निकलेगी। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल होंगे। जिनालय पहुंचकर सभी मुनिभगवंतों के साथ परमात्मा के दर्शन-वंदन करेंगे।
दोपहर 3.36 बजे शुरू होगा संवत्सरी प्रतिक्रमण
संवत्सरी महापर्व पर दोपहर 3.36 बजे से संवत्सरी प्रतिक्रमण शुरू होगा। इस दौरान श्रावक-श्राविकाएं वर्षभर के कार्यों का आत्मावलोकन करेंगे। सालभर मन, वचन और काया से हुई भूलों तथा जाने-अनजाने में किए गए पापों के लिए प्रायश्चित करते हुए क्षमा मांगेंगे।