केवल बाहरी वेशभूषा से कोई संत-महापुरूष नही बन सकता। जिसका कर्म संतो वाला है - वही संत है, ज्ञान प्रचारक ग्राम है दलकोड़ो व ग्राम कोटरासरार में विशाल सत्संग का आयोजन-
(ग्राम वासियों का विशेष सहयोग प्राप्त)
राजनांदगांव सतगुरू माता सुदीक्षा जी महाराज के आर्शिवाद से २१ व २२ सितम्बर को सतगुरू माता जी के अमृतमय वचनों का प्रचार करने हेतु जोनल इंचार्ज ज्ञान प्रचारक सहारनपुर (उत्तरप्रदेश) से चल कर आदरणीय श्री कुल भुषण चौधरी जी ग्राम हैदलकोड़ो व ग्राम कोटरासरार मे दूसरे दिन अपने अनमोल वचनों में बताया की भक्त खुद भी निरंकार-दातार से जुड़ा होता है और संसार के हर प्राणी को भी इस मालिक निरंकार-दातार के साथ जोडऩे का यत्न करता है ताकि जो भी प्राणी इस मनुष्य जन्म में आया है, वह इस मालिक को जान सके, इसे माने और सब कुछ इस मालिक का मानकर इस्तेमाल करे ताकि उसके मन से सभी छोटी-बड़ी भावनायें, ऊँच-नीच की भावनायें समाप्त हो जायें तथा वह भी दूसरों का भला माँगने लग जाये। भक्त के अपने पथ में, अपने रास्ते में अगर उजाला हो गया है, वह खुद ठोकरों से बच गया है, तब भी वह चैन से नहीं बैठता है, बल्कि जहाँ पर किसी दूसरे को ठोकरें खाता देखता है, वहाँ पर भी वह उजाला पहुँचाने का यत्न करता है। किसी का कर्म ही उसको संत-महापुरूष बनाता है। केवल बाहरी वेशभूषा से कोई संत-महापुरूष नही बन सकता। जिसका कर्म संतो वाला है, वही संत है। वास्तव में कर्म ही संत की, ज्ञान की कसौटी हैं। लोग गुरू को तो मानते है, लेकिन गुरू कि बात नहीं मानते। यह ठीक नही है। हमने गुरू को मानना है और गुरू की बात को भी मानना है। केवल गुरू मे आस्था रखने से कुछ नही होता, जब तक हम गुरू के आदेशो को जीवन में नही ढालते, क्योंकि गुरू के आदेश ही जीवन को सफल बनाते है। हम जब भी सत्संग मे आये, सीखने की भावना से ही आये, विनम्र बन कर आये क्योंकि जब तक इंसान अभिमानी बना रहेगा, तब तक वह उचाईयों को नही छु सकता। जैसे-जैसे सुमिरण करते है, इस विशाल निराकार प्रभु से हमें ताकत प्राप्त होती है। इसी प्रकार जैसे-जैसे हम सत्संग में आते हैं, हमें सन्तजनों के प्रेरणादायक वचन सुनने से दृढ़ता प्राप्त होती है। इन वचनों को अगर हम अपने जीवन में ढाल लें, तो हमें सभी सुख मिल सकते हैं।
उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी मदनलाल नवलानी ने दी एवं ग्राम हैदलकोड़ो व ग्राम कोटरासरार में सत्संग मे आये हुए भाई-बहनों का संत निरंकारी मंडल राजनांदगांव के संयोजक रूपलाल जी राजवानी ने आभार व्यक्त किया।
मो. ९८२७११२३६२