’कहानी सेवा की’ : इंद्रावती के कठिन जीवन वैधव्य में मजबूत सहारा बना प्रधानमंत्री आवास
’कोरिया 30 सितंबर, 2026
सामाजिक जीवन में पति पत्नी एक दूसरे के पूरक होते हैं। जब दोनों साथ हों तो किसी भी तरह की कठिनाई को आसानी से निराकरण किया जा सकता है। लेकिन कठिनाई का दौर तब आरंभ होता है जब दोनों में से किसी एक का साथ हमेशा के लिए छूट जाए। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत सांवारांवा में रहने वाले बालीराम की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी इंद्रावती ऐसे ही कठिनाई के भंवर में उलझ गई थीं। उनके सामने आजीविका के साथ ही आवास की एक बड़ी समस्या सामने आई जिसे प्रधानमंत्री आवास येाजना ने आसानी से हल कर दिया। आज उनके जीवन में अकेलेपन का सबसे बड़ा आसरा प्रधानमंत्री आवास बन गया है।
जीवन में संघर्ष
इद्रावती के जीवन में सबकुछ ठीक चल रहा था उनके पति और वह मेहनत करके अपने चार बच्चों के साथ सामान्य श्रमिक का जीवन जी रहे थे। लेकिन बालीराम के असमय काल के गाल में समाने के बाद इंद्रावती के सामने बड़ी चुनौती आ गई। उनके लिए बच्चों के पालन के साथ सुरक्षा एक बड़ी समस्या थी। कच्चे घर में बारिष के दौरान उन्हे अपने परिवार की बहुत चिंता होती कई रातें वह सो नहीं पाती थीं।
आवास से संबल
जीवन में कठिन दौर से गुजर रहे इस परिवार के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ने बड़ा सहारा दिया। कभी सपने में भी पक्का मकान बनाने की क्षमता ना होने वाले इस परिवार के लिए पक्का आवास एक संबल बनकर आया। पूरे परिवार ने विगत वर्ष आवास की स्वीकृति प्राप्त होते ही मेहनत से अपने सपनों का आवास पूरा किया और अब उनका परिवार हर मौसम में निश्चिंत होकर जी रहा है।
मौके पर मिली मदद
श्रमिक परिवार की मुखिया इंद्रावती ने बताया कि पति के जाने के बाद जो सामाजिक असुरक्षा का डर था वह प्रधानमंत्री आवास बन जाने के बाद से पूरी तरह समाप्त हो गया है। अब उनके पास मेहनत करने के लिए पूरा दिन है और रात में चैन से आराम करने के लिए अपना पक्का घर। इंद्रावती ने बताया कि आवास निर्माण के दौरान विकसित भारत जीरामजी योजना के 90 दिवस की अकुषल मजदूरी के मिले पैसों से उनको बड़ा सहारा मिला। अब उनकी प्रमुख समस्या का निदान हो गया हैं।