छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

*दूषित पानी की शिकायतों पर हरकत में आया विभाग, उदका के हैंडपंपों में डाली गई क्लोरीन की दवा*

*दूषित पानी की शिकायतों पर हरकत में आया विभाग, उदका के हैंडपंपों में डाली गई क्लोरीन की दवा*

*समाचार प्रकाशन के बाद विभाग ने दिखाई तत्परता, पेयजल शुद्धता को लेकर उठाया कदम*

पंडरिया। जनपद पंचायत पंडरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत उदका में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों के बाद अब विभाग ने पहल करते हुए गांव के हैंडपंपों में क्लोरीन की दवा डलवाई है। ग्रामीणों की समस्या को समाचार पत्रों के माध्यम से प्रमुखता से सामने लाए जाने के बाद संबंधित विभाग हरकत में आया और पेयजल स्रोतों की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई शुरू की गई।

ग्रामीणों के अनुसार विगत दिनों गांव के कुछ हैंडपंपों से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई थी। पानी दूषित होने की शिकायतें ग्रामवासियों द्वारा लगातार संबंधित स्तर पर रखी जा रही थीं। पेयजल सीधे ग्रामीणों के दैनिक जीवन से जुड़ा विषय होने के कारण इस समस्या को लेकर ग्रामीणों में विशेष चिंता देखी जा रही थी।

समाचार पत्रों में ग्रामीणों की समस्या प्रकाशित होने के बाद संबंधित विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद ग्राम पंचायत उदका में पेयजल स्रोतों की ओर ध्यान देते हुए हैंडपंपों में क्लोरीन की दवाइयां डाली गईं। विभाग की इस पहल से ग्रामीणों को राहत मिली है और पेयजल की स्वच्छता को लेकर सकारात्मक कदम उठाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर जांच और आवश्यक उपचार की व्यवस्था बनी रहना जरूरी है। क्लोरीन डालने की कार्रवाई से फिलहाल ग्रामीणों में संतोष है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी विभाग द्वारा गांव के पेयजल स्रोतों की नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि किसी प्रकार की समस्या सामने आने पर समय रहते उसका समाधान किया जा सके।

गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप ही बड़ी संख्या में परिवारों के लिए पेयजल का प्रमुख साधन हैं। ऐसे में इन जलस्रोतों की स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। उदका में सामने आई शिकायत के बाद विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

*समाचार प्रकाशन के बाद कार्रवाई से ग्रामीणों को राहत*

उदका के ग्रामीणों की पेयजल संबंधी समस्या को समाचार के माध्यम से सामने आने के बाद विभाग की सक्रियता देखने को मिली। हैंडपंपों में क्लोरीन की दवा डालने की कार्रवाई से यह संदेश गया है कि ग्रामीणों से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं की शिकायतों पर संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। ग्रामीणों ने पेयजल व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए नियमित निगरानी की अपेक्षा जताई है।

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