छत्तीसगढ़ / बिलासपुर

नहरों के अंतिम छोर तक पहुंचा पानी, किसानों की खेती को मिली मजबूती

 बिलासपुर । खेतों तक पहुंचती सिंचाई की धार तखतपुर क्षेत्र के किसानों के लिए खेती का मजबूत सहारा बन रही है। आमाचुवा जलाशय और लोवर मनियारी व्यपवर्तन योजना से 2,197 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिल रहा है। नहरों के सुदृढ़ीकरण से अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था बेहतर हुई है। आमाचुवा जलाशय से खरीफ के साथ किसानों की मांग के अनुरूप रबी फसल के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

ग्राम बांधा में निर्मित आमाचुवा जलाशय बांधा, जोगीपुर एवं टिंगीपुर के खेतों की सिंचाई का प्रमुख साधन है। वर्ष 2021-22 में मुख्य एवं शाखा नहरों में पक्की परत बिछाने का कार्य पूरा किया गया। इसके बाद इन गांवों की लगभग 578 हेक्टेयर कृषि भूमि तक पर्याप्त पानी पहुंच रहा है। किसानों को रबी फसल की सिंचाई के लिए भी मांग के अनुसार जलाशय से पानी दिया जा रहा है। इसके अलावा मत्स्य पालन और निस्तार के लिए भी जलाशय का पानी उपयोगी है। आमाचुवा जलाशय की जल भराव क्षमता 17.44 लाख घन मीटर है। इसकी निर्धारित सिंचाई क्षमता 578 हेक्टेयर है। जलाशय से जुड़ी 3.2 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर और 3.8 किलोमीटर लंबी शाखा नहर खेतों तक पानी पहुंचाती हैं। बांध की लंबाई 214 मीटर और ऊंचाई 11.88 मीटर है।

 

इसी तरह ग्राम खमरिया स्थित लोवर मनियारी व्यपवर्तन योजना से 10 गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा मिल रही है। योजना के अंतर्गत ऊंचाई बढ़ाने और नहरों में पक्की परत बिछाने का कार्य जुलाई 2026 में पूरा हुआ। वर्तमान में योजना से 1,619 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है, जबकि इसकी निर्धारित सिंचाई क्षमता 2,024 हेक्टेयर है। लोवर मनियारी योजना की मुख्य नहर की लंबाई 19.5 किलोमीटर है। इससे जुड़ी तखतपुर लघु नहर 3.3 किलोमीटर और पंडरिया लघु नहर 2.1 किलोमीटर लंबी है। नहरों में सुधार से पानी खेतों तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूती मिली है। सिंचाई सुविधाओं का यह विस्तार किसानों की फसलों के लिए पानी की जरूरत पूरी करने में मदद कर रहा है। जलाशय और नहरों के बेहतर उपयोग से क्षेत्र में कृषि कार्य अधिक सुविधाजनक हो रहे हैं।

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