छत्तीसगढ़ / जशपुर

पशुधन सुरक्षा और स्वास्थ्य संवर्धन की मिसाल बनीं पशु सखी बिमला बाई

 जशपुरनगर । कलेक्टर रोहित व्यास एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में पशुधन विकास विभाग, जिला जशपुर द्वारा पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस कार्य में पशु सखियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनके सक्रिय सहयोग से कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, पशु चिकित्सा एवं जागरूकता शिविरों का आयोजन कर विभागीय सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है।

इसी क्रम में विकासखंड जशपुर के ग्राम छोटाबनाई में आयोजित बहुउद्देशीय पशु चिकित्सा शिविर में पशु सखी बिमला बाई का विशेष योगदान रहा। शिविर में बकरियों को पीपीआर बीमारी से बचाव के लिए कुल 438 बकरियों का टीकाकरण किया गया। इसके अलावा 7 पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, 95 पशुओं को कृमिनाशक दवा पान, 45 पशुओं के लिए निःशुल्क औषधि वितरण तथा 4 पशुओं का उपचार किया गया। शिविर से क्षेत्र के पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सेवाओं का लाभ मिला।

 
 
 
 
 
 
 
 

’पशुपालकों को जागरूक करने में निभा रहीं महत्वपूर्ण भूमिका’

पशु सखी बिमला बाई ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर पशुपालकों को पशुओं की देखभाल, समय पर टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही हैं। पशुओं की पहचान कर कृत्रिम गर्भाधान के लिए सूचना देना, उन्नत नस्ल के बछड़े-बछियों की जानकारी दर्ज करना, बधियाकरण एवं बांझपन संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा गायों और बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान के लिए पशुपालकों को प्रोत्साहित करना भी पशु सखियों के प्रमुख कार्यों में शामिल है।

इसके साथ ही वे पशुओं को कृमिनाशक दवाएं देने, घावों की प्राथमिक देखभाल करने तथा गंभीर रूप से बीमार पशुओं को पशु चिकित्सक या एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए रेफर करने में सहयोग करती हैं। पशु चिकित्सा शिविरों में उनकी सक्रिय भागीदारी से पशुपालकों तक विभागीय सेवाएं पहुंचाने और ग्रामीण स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने में मदद मिल रही है।

 

ग्राम छोटाबनाई में आयोजित शिविर से लाभान्वित पशुपालकों ने पशुधन विकास विभाग के प्रयासों की सराहना की। साथ ही, पशु सखी बिमला बाई की सक्रियता, सेवा भावना और जागरूकता संबंधी कार्यों की प्रशंसा की। उनका योगदान ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन के स्वास्थ्य संरक्षण, पशुपालन को बढ़ावा देने और किसानों की आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण बन रहा है।

 

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