छत्तीसगढ़ / राजनांदगांव

संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय एवं आरक्षण की रक्षा के लिए राजनांदगांव में जुटे लगभग 5,000 लोग आरक्षण बचाओ रैली 2.0 में 21 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

 प्रेस विज्ञप्ति

राजनांदगांव, 25 अक्टूबर 2026।

भारतीय संविधान में प्रदत्त सामाजिक न्याय, समान अवसर, आरक्षण एवं सामाजिक प्रतिनिधित्व के अधिकारों की रक्षा के लिए आज राजनांदगांव में ‘आरक्षण बचाओ रैली 2.0’ का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ के जेन-ज़ी (Gen-Z) युवा वर्ग के आह्वान पर आयोजित इस रैली में राजनांदगांव, मानपुर-मोहला, खैरागढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग 5,000 लोगों ने भाग लिया। रैली में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक प्रतिनिधित्व तथा आजीविका से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

रैली में शामिल लोगों ने कहा कि संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को समानता, न्याय एवं सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार दिया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए किए गए संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद प्रदेश में आरक्षण, बैकलॉग पदों पर भर्ती, पदोन्नति में आरक्षण, छात्रवृत्ति, शासकीय सेवाओं में प्रतिनिधित्व तथा विश्वविद्यालयों में आरक्षण रोस्टर जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर कार्रवाई की आवश्यकता बनी हुई है।

रैली के दौरान प्रतिनिधिमंडल विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बंगले पर पहुंचा और संवैधानिक मुद्दों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। इसके पश्चात प्रतिनिधिमंडल इमाम चौक पहुंचा, जहां भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इन मुद्दों पर आवश्यक संवैधानिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई।

21 सूत्रीय मांगों में आरक्षण, रोजगार एवं सामाजिक प्रतिनिधित्व प्रमुख

ज्ञापन के माध्यम से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए पदोन्नति में आरक्षण नियम-5 को पुनः अधिसूचित कर लागू करने, सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित अंतरिम आदेशों के अनुरूप कार्रवाई करने तथा बिना आरक्षण रोस्टर के की जा रही पदोन्नतियों पर रोक लगाने की मांग की गई।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने, आरक्षण रोस्टर का नियमित संधारण करने तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लंबित बैकलॉग पदों को विशेष भर्ती अभियान के माध्यम से भरने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही राज्य में OBC वर्ग को 27 प्रतिशत तथा SC वर्ग को 13 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित लंबित विषयों पर आवश्यक निर्णय लेकर आगे की कार्रवाई करने का आग्रह किया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने प्लेसमेंट, आउटसोर्सिंग, संविदा एवं अन्य वैकल्पिक भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से आरक्षण व्यवस्था प्रभावित होने पर चिंता जताई। कर्मशाला सहायकों की भर्ती में आरक्षण नियमों का पालन सुनिश्चित करने, स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में पदों की गणना की व्यवस्था की समीक्षा करने तथा संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण से पहले सामाजिक प्रतिनिधित्व का आकलन करने की मांग की गई।

इसके अलावा अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) एवं जनजातीय उपयोजना (TSP) की राशि का पारदर्शी उपयोग, युवाओं के स्वरोजगार एवं कौशल विकास के लिए पर्याप्त बजट, संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत प्राप्त राशि का जनजातीय विकास के लिए उपयोग तथा PESA एवं वन अधिकार अधिनियम (FRA) का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग की गई।

ज्ञापन में पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, शासन-प्रशासन, आयोगों, बोर्डों एवं नीति-निर्माण संस्थाओं में SC, ST एवं OBC वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने तथा पदोन्नति से संबंधित सेवा नियमों एवं रियायतों का पालन करने पर भी जोर दिया गया।

विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में वृद्धि एवं समय पर भुगतान, विश्वविद्यालयों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में सामाजिक न्याय सुरक्षा तंत्र की स्थापना, आरक्षण एवं बैकलॉग संबंधी वार्षिक प्रतिवेदन विधानसभा में प्रस्तुत करने तथा जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया सरल करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।

ज्ञापन में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165(6) से संबंधित 17 अगस्त 2016 के परिपत्र की समीक्षा कर अनुसूचित जनजाति की जमीन गैर-जनजातीय व्यक्तियों को लीज या किराये पर देने से संबंधित आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया गया। साथ ही उच्च न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए व्यापक संवैधानिक एवं नीतिगत विमर्श शुरू करने की मांग की गई।

विश्वविद्यालयों में आरक्षण रोस्टर एवं निजी उद्योगों में स्थानीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठा

रैली में महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सांकरा, दुर्ग में हाल ही में जारी प्राध्यापक पदों की भर्ती विज्ञप्ति में आरक्षण रोस्टर के निर्धारण के लिए विभाग को इकाई मानने के विषय पर भी सवाल उठाए गए। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इस भर्ती प्रक्रिया की संबंधित केंद्रीय कानून एवं लागू नियमों के अनुरूप समीक्षा की जाए और आरक्षण की गणना निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार विश्वविद्यालय को इकाई मानकर की जाए, ताकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

इसके साथ ही राज्य की अनुमति से संचालित निजी औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत कर्मचारियों की भर्ती में स्थानीय छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए उचित अवसर एवं प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई।

एक माह के भीतर कार्रवाई की जानकारी देने की मांग

रैली के आयोजकों एवं प्रतिनिधिमंडल ने राज्य शासन से मांग की कि ज्ञापन में उठाए गए सभी 21 मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाएं तथा एक माह के भीतर की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

प्रतिनिधियों ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संगठन के विरुद्ध नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से किया जा रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है। इसलिए शासन को इन मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।

आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीकों से आंदोलन को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी जारी रखा जाएगा।

जारीकर्ता:
जेन-ज़ी (Gen-Z) युवा वर्ग, छत्तीसगढ़
कार्यक्रम: आरक्षण बचाओ रैली 2.0
स्थान: राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
दिनांक: 25 अक्टूबर 2026

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