बिलासपुर। पानी की कमी वाले क्षेत्र या ऐसे किसान जो उद्यानिकी फसल जैसे सब्जी, फल या फूलों की खेती करना चाहते है उनके लिए टपक सिंचाई प्रणाली (ड्रिप सिस्टम) बेहद जरुरी है। जिले के किसानो के बीच भी इसका महत्त्व बढ़ा है। अपने खेतों में इसे लगवा चुके किसान आकाश राय कहते है कि इसमें रखरखाव भी कम करना पड़ता है फसलों की उपज में वृद्धि भी होती है।
सीयू के वानिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार सिंह बताते हैं कि ड्रिप सिस्टम आज के समय में वानिकी फसलों के लिए आवशयक उपकरण में से एक है। क्यूंकि पानी की सही मात्रा और समय पर आपूर्ति होने से फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है। इससे न केवल पानी, बल्कि खाद और अन्य पोषक तत्वों को भी सीधे पौधों तक पहुँचाया जा सकता है।
एक एकड़ खेत में कितना आता है खर्च?
ग्रामीण वानिकी विस्तार अधिकारी तामलेश्वर झांगड़े बताते हैं कि किसानों को ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगवाने के लिए ढाई एकड़ में लगभग एक लाख 30 हजार रुपये तक का खर्च आता है। यानी प्रति एकड़ देखा जाए तो 50 से 55 हजार रुपये तक का खर्च बैठता है। इस हिसाब से यह आम किसानों के लिए एक महंगी तकनीक हो जाती है, लेकिन जरूरतमंद किसानों तक इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ही सब्सिडी देती हैं।
कितनी सब्सिडी देती है सरकार?
अगर आपके पास पांच एकड़ तक भूमि है, तो आपको अधिक सब्सिडी मिलेगी, वहीं बड़े किसानों के लिए सब्सिडी कम होती जाती है। झांगड़े बताते हैं कि इसमें सरकार द्वारा सब्सिडी की सुविधा दी गई है। राज्य सरकार की योजना के तहत एससी और एसटी वर्ग के किसानों के लिए 55 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। वहीं, सामान्य और पिछड़ा वर्ग के किसानों के लिए 45 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है।
योजना का लाभ कैसे उठा सकते हैं?
अगर आप भी अपने खेतों में ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगवाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको अपने क्षेत्र के ग्रामीण वानिकी विस्तार अधिकारी को आवेदन देना होगा। उनके माध्यम से आपका आवेदन सहायक वानिकी विस्तार अधिकारी तक पहुँचेगा।
आपके आवेदन को सहायक वानिकी विस्तार अधिकारी अप्रूवल के लिए भेजेंगे। जैसे ही आपको लगाने के लिए अप्रूवल मिलता है, आप किसी भी मान्यता प्राप्त वेंडर को अपने खेतों में इसे लगाने का ठेका दे सकते हैं। शुरुआत में सारा खर्च आपको ही उठाना पड़ता है। सिस्टम पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद आपकी सब्सिडी राशि आपके खाते में जमा कर दी जाती है।