सवाल जवाब: नवरात्र में देवी अंबा की पूजा करनी चाहिए या नौ भिन्न-भिन्न देवियों की, जानें
रुद्रयामल तंत्र कहता है कि इदं तू कुन्जिका-स्तोत्रम मंत्र-जागर्ति-हेतवे| अभक्ते नैव दातव्यम गोपितम रक्ष पार्वती|| यस्तु कुन्जीकया देवी हिनाम सप्तशतीं पठेत| न तस्य जायते सिद्धिर-रण्यै रोदानं यथा|| अर्थात सिद्ध कुंजिका का पठन स्वयं में सप्तशती की विराट क्षमता समेटे हुए है।
ज्ञान का पिटारा
स्वयं की जागृति के लिए नवरात्र पर ध्यान और मौन श्रेष्ठ माध्यम है। इसके द्वारा आप अपनी आंतरिक ऊर्जा को जाया न करके, उसे सहेज कर, उसका संचरण यानि विस्तार करते हैं। यदि तकनीकी कर्मकांड में रुचि है तो मार्कण्डेय पुराण में वर्णित दुर्गा पाठ का सस्वर उच्चारण अपनी अंतर्मन की शक्ति को धार देने के लिए उत्तम माना जाता है, पर यह पाठ समय साध्य है। यदि समयाभाव हो, तो रुद्रयामल तंत्र में उल्लेखित ‘सिद्ध कुंजिका स्तोत्र’ का भी पठन किया जा सकता है। शृणु देवी प्रवक्ष्यामी कुंजिका-स्तोत्र-मुत्तमम् से आरंभ होने वाले 8 श्लोकों का यह पाठ ख़ुद में सप्तशती सदृश दिव्य ऊर्जा के फैलाव में सहायक माना गया है।कुंडली के लग्न यानी प्रथम भाव में यदि केतु विराजमान हों, तो व्यक्ति करियर, व्यापार, कारोबार में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करता है। यह केतु पिछले जन्मों और अनसुलझे रहस्यों के साथ आध्यात्मिक उन्नति का भी कारक है। इनकी अंतर्दृष्टि कमाल की होती है। इनका व्यक्तित्व चुंबकीय होता है। ये लोगों को अपनी ओर सहजता से आकर्षित कर लेते हैं। इनकी बातें हमेशा स्पष्ट नहीं होती, कई बार उनका अर्थ बहुत गहरा होता है, जो अक्सर रहस्य से परिपूर्ण लगती हैं। पारिवारिक जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सिर दर्द की समस्या इन्हें कष्ट देती है। यात्रा के शौकीन होते हैं। इन्हें अपनी संगति के प्रति सचेत रहना चाहिए। लाभ के लिए यह सतर्क रहते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें स्वार्थी और लालची लेते हैं। शुभ केतु मानसिक क्षमताओं से भी समृद्ध बनाता है। यह अंतर्ज्ञान का भी प्रतिपादन करता है। नकारात्मक केतु स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है और सहनशक्ति को कम करता है। अशुभ केतु अक्सर आत्मविश्वास और साहस की कमी का कारक बन जाता है। तब जीवन की आपाधापी का सामना ये आसानी से नहीं कर पाते। आयु प्रभावित होती है, वैवाहिक जीवन में समस्याएं सर उठाती हैं।