हर बात का विरोध भी ठीक नहीं लगता है...
लोकतंत्र में सरकार के साथ ही विपक्ष की भी अहम भूमिका होती है।दोनों जब लोकतंत्र हित में सकारात्मक होते हैं तो देश में लोकतंत्र मजबूत होता है, देश हित में सुधार के काम आसानी से होते हैं। विपक्ष अगर यही मान ले कि उसका काम तो सरकार के हर काम का विरोध ही करना है तो इससे तो कई अच्छे काम भी नहीं हो पाएंगे जो देश व राज्य के लिए जरूरी होते हैं।इसलिए विपक्ष को किसी बात का विरोध करते वक्त कम से कम यह तो सोचना चाहिए कि सरकार कुछ कर रही है तो उससे देश व राज्य का क्या फायदा होने वाला है। अगर सरकार किसी व्यवस्था में सुधार कर रही है तो विपक्ष का काम सिर्फ उसका विरोध करना नहीं होता है, वह भी उस सुधार मे सहभागी हो सकता है, उस सुधार में सुझाव देकर सहयोग कर सकता है।उसे ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि यह सुधार इस सरकार के कार्यकाल में हो जाएगा तो उसका श्रेय उसे ही मिलेगा। अगर विपक्ष भी उसमें सकारात्मक सहयोग करता है तो उसका श्रेय सरकार न दे लेकिन जनता तो देगी कि विपक्ष ने भी इस सुधार कार्य में सहयोग किया था।
देश की चुनाव व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। कई सरकारों के वक्त इस सुधार की जरूरत महसूस की गई है लेकिन उस वक्त की कोई सरकार इस सुधार के लिए कोई पहल ही नहीं कर सकीं।१९८३ में चुनाव आयोग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा के चुनाव कराने का सुझाव दिया था।इसके बाद १९९९ में विधि आयोग की रिपोर्ट में भी एक देश-एक चुनाव का उल्लेख किया गया था।२०१८ में विधि आयोग ने दूसरी बार एक देश एक चुनाव का समर्थन किया।मई २०१४ में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने कई बार एक देश-एक चुनाव की बात कई बार की है।
अब उसने बुधवार को एक देश एक चुनाव के लिए गठित पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। एक देश-एक चुनाव दो चरणों में कराया जाएगा पहले चरण में लोकसभा व विधानसभा के चुनाव होंगे, दूसरे चरण में स्थानीय निकाय व पंचायतों के चुनाव होंगे। सरकार की तरफ से कहा गया है कि इन सिफारिशों को इसी पांच साल में लागू किया जाएगा।कब किया जाएगा, सरकार की तरफ से नहीं बताया गया है।
एनडीए के सहयोगी दलों ने तो इसका स्वागत किया है और इसे देश व राज्य के हित में बताया है।यानी एनडीए के दल इसके पक्ष में है लेकिन इंडी गठबंधन के दल इसके विरोध में है।कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने तो इसे अव्यावहारिक कहा है, यह भी कहा है कि इसे देश की जनता स्वीकार नही करेगी।क्योंकि यह संविधान व लोकतंत्र के खिलाफ है।टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि राज्यों के चुनाव भाजपा एक साथ नहीं करा सकती है तो पूरे राष्ट्र का चुनाव कैसे कराएगी। अखिलेश यादव ने तो इसे चुनाव काम निजी क्षेत्र को सौंपने की आशंका जताते हुए कहा कि भाजपा पहले अपनी पार्टी के चुनाव तो एक साथ कराके दिखाए।भाकपा के डी राजा ने कहा कि ऐसा होगा तो राज्यों के अधिकारो में कटौती होगी।हमारा संवैधानिक ढांचा एक देश एक चुनाव के खिलाफ है।
ऐसा नहीं है कि देश में पहले कभी एक साथ सभी चुनाव नहीं हुआ करते थे।भारत के पहले चार आमचुनाव यानी १९५२,१९५७,१९६२,१९६७ के लोकसभा व राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए गए थे। बाद में कुछ नए राज्य बनने व कुछ राज्यों के पुनर्गठन के बाद यह प्रक्रिया बंद हो गई। बताया जाता है कि १९६८-६९ में कुछ राज्यों की विधानसभा भंग कर दी गईं,इसके बाद लोकसभा चुनाव केसाथ विधानसभा चुनाव होना देश में बंद हो गया।लोकसभा चुनाव व राज्य के चुनाव एक साथ न होने से हर साल दो साल में किसी न किसी राज्य में विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, निकाय चुनाव होते रहते है। इससे राज्य का विकास प्रभावित होता है। बार बार चुनाव होने से पैसा ज्यादा खर्च होता है।राजनीतिक दलों को भी ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। केंद्र व राज्य में अलग अलग राजनीतिक दलों की सरकार होने से राज्य व केंद्र के बीच कटुता बढ़ती है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राजनीतिक दल सवाल उठाते रहते है, जो राजनीतिक दल चुनाव हार जाता है वह कहता है कि चुनाव स्वतंत्र नहीं हुए। एक साथ चुनाव होने पर यह सब नहीं होगा।
सरकार की तरह विपक्ष को सकारात्मक होना चाहिए। मोदी सरकार देश में सुधारों को लेकर सकारात्मक है, इसलिए वह कई क्षेत्रों में सुधार कर सकी है, कांग्रेस सहित अन्य दलों का सरकारें यह सब सुधार नहीं कर पाई क्योंकि उनकी सोच ऐसी नहीं थी कि यह सुधार किया जा सकता है। कांग्रेस चाहती तो मोदी सरकार ने जो सुधार किए हैं, जो का्म किए है,वह सब कर सकती लेकिन नहीं किया तो इसलिए वह मानती थी यह संभव नहीं है। मोदी सरकार कांग्रेस जिसे असंभव मानकर कर नहीं पाई वह सब काम करके दिखाया है तो इसलिए कि वह मानती है कि यह काम किया जा सकता है। मोदी सरकार ने एक देश एक चुनाव की सिफाऱिशों को मंजूरी दे दी है तो वह मानकर चल रही है कि यह काम वह कर सकती है. सभी के सहयोग से कर सकती है।
इस देश में ज्यादातर राजनीतिक दल मानते थे कि जम्मू कश्मीर से धारा-३७० को हटाया ही नहीं जा सकता,आतंकवाद व अलगाववाद को समाप्त नहीं किया जा सकता।भाजपा ने हटाकर दिखाया और आतंकवाद व अलगाववाद को खत्म कर दिखाया। देश में राममंदिर बनेगा कोई राजनीतिक मानता नहीं था लेकिन भाजपा ने कोशिश की और अयोध्या में राममंंदिर बनवा कर दिखाया। जीएसटी लागू किया, नोटबंदी की।चंद्रयान को चंद्रमा पर उतार कर दिखाया,इस देश में कोई सपना भी नहीं देखता था कि गैर कांग्रेस दल को बहुमत मिल सकता है, मोदी ने बहुमत की सरकार बनाकर दिखाया, सब कहते थे एक बार बहुमत की सरकार धोखे से बन गई तो मोदी ने दूसरी बार फिर बहुमत वाली सरकार बना कर दिखाया। लोग कहते थे तीसरी बार तो सरकार बनना संभव नहीं है,मोदी ने चुनाव के महीनों पहले कह दिया कि वह तीसरी बार सरकार बनाएंगे और पीएम भी वही बनेंगे, ऐसा करके पीएम मोदी ने दिखाया है. पीएम मोदी जब सोच लेते हैं तो कोई काम करना है तो वह इसे करके दिखाते भी हैं।