मध्य प्रदेश में फिर लौटेगी सोनचिरैया
ग्वालियर। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई वन विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में अत्यंत लुप्तप्राय 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' यानी सोन चिरैया को मध्य प्रदेश के जंगलों में फिर से लाने के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी गई है। इसके तहत राजस्थान सरकार पोखरण और सैम स्थित ब्रीडिंग सेंटर्स से सोन चिरैया देने के लिए तैयार हो गई है, जिन्हें ग्वालियर के घाटीगांव और मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा जाएगा।
ग्वालियर का घाटीगांव अभयारण्य कभी सोन चिरैया का मुख्य ठिकाना हुआ करता था, जिसे 1981 में इसी उद्देश्य से अधिसूचित किया गया था। हालांकि, अवैध खनन, शिकार और इंसानी दखल के कारण पिछले एक दशक से यहां इस पक्षी का कोई सुराग नहीं मिला है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट में 'क्रिटिकली एनडेंजर्ड' श्रेणी में शामिल इस पक्षी को दोबारा बसाने से पहले वन विभाग इन इलाकों में घास के मैदानों को री-स्टोर कर रहा है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है।