खराब जीवन शैली कम उम्र में बना रही आस्टियोपोरोसिस रोग का शिकार
ग्वालियर।आस्टियोपोरोसिस शरीर में हड्डियों को कमजोर बना रहा है। इस रोग के शिकार एक हजार बिस्तर अस्पताल के हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। चिकित्सक का कहना है कि ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में आस्टियोपोरोसिस पीड़ितों की संख्या 10 से 15 प्रतिशत है। उम्र बढ़ने के साथ इस रोग के होने की आशंका हर व्यक्ति में होती है। लेकिन खराब जीवन शैली, युवाओं में बढ़ता धूम्रपान, मोटापा सहित दूसरे कारणों से युवाओं में यह समस्याएं देखने को मिल रही है।
30 साल के बाद हर व्यक्ति की हड्डियों की मजबूती में कमी आनी शुरू हो जाती है, लेकिन नियमित व्यायाम करने वाले, उचित आहार लेने वाले सहित अन्य में गिरावट की गति काफी कम होती है। ऐसे में इन लोगों में समस्या काफी देर में दिखाई देती है।
50 से ज्यादा उम्र के लोग इस रोग के शिकार सबसे ज्यादा होते हैं। महिलाओं में 45 साल के बाद और पुरूषों में 60 साल के बाद आस्टियोपोरोसिस होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। लेकिन बदलती जीवन शैली के कारण रोग होने की उम्र घट रही है।
हर रोज 20-25 मरीज पहुंचते हैं इलाज के लिए
आर्थोपेडिक विभाग की ओपीडी में अगर 200 मरीज इलाज करवाने आते हैं, तो इनमें 20 से 25 लोगों में आस्टियोपोरोसिस रहता है। इस रोग के होने का कोई लक्षण नहीं दिखते। इसका पता ही फ्रैक्चर या जांच के बाद चलता है। चिकित्सक कहते है कि यदि समय रहते ही हडिड़यों को कमजोर होने से रोका जाए तो लंबे समय तक इस समस्या को रोका जा सकता है।
यह रोग इस हिस्से पर करता है हमला
आस्टियोपोरोसिस से कूल्हे, जांघ और रीढ़ की हड्डी तेजी से कमजोर होती है। इन जगहों की हड्डियों में खून ज्यादा रहता है। यह सबसे मजबूत हड्डी मानी जाती है। यदि यह टूटती है तो मरीज में मृत्युदर होने की आशंका भी बढ़ जाती है।