मध्य प्रदेश

अपने अस्तित्व की दुर्दशा बयां कर रही ‘रानी कोठी, संरक्षण के अभाव में खंडहर में हो रही तब्दील, जानें इसका इतिहास

नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के बरमान तट पर मां नर्मदा के किनारे स्थित ऐतिहासिक ‘रानी कोठी’ आज अपने अस्तित्व की दुर्दशा बयां कर रही है। यह कोठी सालों से जर्जर हालत में है और संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रही है। यह वही रानी कोठी है जो कभी महारानी सिंधिया के रुकने का स्थान हुआ करती थी।

जानें इतिहास

नरसिंहपुर से निकलने वाली मां नर्मदा के बरमान तट के पास सालों से जर्जर हालत में रानी कोठी की स्थिति बनी हुई है। यह ‘रानी कोठी’ कभी ग्वालियर की महारानी सिंधिया का ठहराव स्थल हुआ करती थी। जब राजमाता सिंधिया नरसिंहपुर जिले की सरहद में प्रवेश करती थीं या यहां से गुजरती थीं। तो वे इस लाल कोठी में जरूर ठहरती थीं। इस दौरान वे मां नर्मदा यानी मां रेवा की पूजा-अर्चना करती थीं और क्षेत्र की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती थीं। लेकिन आज इस रानी कोठी की दुर्दशा को देखकर लोगों को यह लगता है कि अगर सिंधिया घराने को इस रानी कोठी के बारे में पता चलेगा तो शायद वह भी इसकी स्थिति पर दुख व्यक्त करेंगे।

स्थानीय लोगों का मानना है कि, जर्जर हालत में पड़ी महारानी राज माता के लिए बनाई गई रानी कोठी की दशा सुधर जाए। तो मां रेवा की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं और मां रेवा के तट पर आने वाले साधु संतों के रुकने के लिए एक सुचारू और अच्छी व्यवस्था बन सकती है। हालांकि इस रानी कोठी की दुर्दशा पर तेंदूखेड़ा से भाजपा विधायक विश्वनाथ सिंह पटेल ने खेद व्यक्त किया है। कहा है कि एक पत्र ‘मैं अपनी पार्टी के लिए और सरकार के लिए लिख चुका हूं। जिससे इस रानी कोठी का जीर्णोद्धार हो सके और राजमाता सिंधिया जिन्हें बीजेपी की नींव कहा जाता है उनको भी इस कोठी के साथ जीवंत रखा जा सके।

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