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झारखंड के छात्रों ने आंदोलन की मिसाल पेश की

कोई भी आंदोलन हो,वह कम से कम आंदोलन जैसा तो होना चाहिए, आंदोलन जैसा लगना तो चाहिए।लोगों ने जैसे आंदोलन देखे है,कम से कम वैसा तो होना चाहिए।तब देश के लोग उस आंदोलन काे आंदोलन मानते हैं और उसका समर्थन करते हैं।पेपरलीक के मामले में दिल्ली के जंतर मंतर में जो छात्रों का आंदोलन किया गया था।वह गंदे पोस्टर,गंदी भाषा,सोशल मीडिया में गंदे मीम,नेताओं को गाली,पीएम को गाली,पुलिस से मारपीट,कानून व्यवस्था बिगाड़ने के लिए जितना चर्चित रहा, अपनी मांगों को लेकर उतना चर्चित नहीं रहा।जितने वामपंथी विचारधारा वाला लोग थे,उनको जरूर यह आंदोलन छात्रों की क्रांति जैसा लगा लेेकिन परंपरागत आंदोलन को पसंद करने वालों को जंतर मंतर का आंदोलन अनियंत्रित,अराजक तत्वों का आंदोलन लगा।जब तक यह आंदोलन चला दिल्ली के लोगों को परेशानी हुई।
यह आंदोलन पेपरलीक को रोकने के लिए जरूर था लेकिन यह मोदी सरकार के विरोध में ज्यादा था इसलिए इस आंदोलन का समर्थन विपक्ष के राजनीतिक दलों व उनके नेताओं ने किया और देश को बताने की कोशिश की कि देखों देश के जेनजी मोदी सरकार के विरोध में हैं। देश के जेनजी में मोदी सरकार के खिलाफ खूब नाराजगी है।हर आंदोलन का कोई बड़ा लक्ष्य होता है इस आंदोलन का लक्ष्य सीजेपी के लिए शिक्षामंत्री का इस्तीफा तो विपक्ष के लिए मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाना था ताकि आने वाले चुनाव में इस आंदोलन का फायदा उठाया जा सके।विपक्ष उम्मीद कर रहा था कि मोदी सरकार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं लेगी और यह आंदोलन लंबे समय तक चलेगा लेकिन पीएम मोदी ने ठीक समय पर सीजेपी जो चाहता था, उसे मानकर आंदोलन समाप्त करवा दिया और पेपरलीक रोकने कानून बनाकर यह बता दिया कि विपक्ष युवाओं का जितना भला नहीं चाहता है मोदी सरकार उतना भला  चाहती है इसलिए मोदी सरकार ने परीक्षा के दौरान पेपर लीक रोकने कड़ा कानून बनाया है।

 
 


सब लोग मानकर चल रहे थे कि जंतर मंतर का युवाओं का आंदोलन आंदोलन के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा लेकिन झारखंड के छात्रों ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन करके देश के युवाओं को बता दिया है कि छात्रों का आंदोलन कैसा होना चाहिए।कहीं कोई किसी काे गाली नहीं दे रहा है,धरना,प्रदर्शन सब हो रहा है रैली निकाली जा रही है लेकिन एक दिन भी किसी छात्र ने कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश नहीं की।कहीं कोई गंदा पोस्टर नहीं है, सोशल मीडिया में वीडियों हैं लेकिन गंदे मीम नहीं है। सीएम को कोई गाली नहीं दे रहा है। आंदोलन को १०दिन से ज्यादा हो गए हैं, छात्रों को स्टेडियम में टेंट लगाने नहीं दिया गया है कि वह बारिश,खुले में ज्यादा दिन आंदोलन न कर सके और अपने आप समाप्त हो जाए।छात्रों के सामने खाने की,बारिश के बचने की समस्या है लेकिन वह हर तरह की समस्या का सामना करते हुए आंदोलन कर रहे हैं और अब देश का मीडिया भी उनकी मांगो को उठा रहा है।

 


झारखंड के छात्र आंदोलन से एक तो यह साफ हो गया कि जो छात्र होते हैं वह शांति से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते हैं और दूसरे देश के विपक्षी नेताओं की भी पोल खुल गई है कि वह छात्रों के साथ खड़े होने वाले हैं,छात्रों के लिए आवाज बुलंद करने वाले हैं। राहुल गांधी ने छात्रों की मांग के लिए पीएम आवास के सामने धरना दिया लेकिन झारखंड के छात्रों की मांग के लिए उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है।प्रियंका गांधी के लिए जंतर मंतर में धरना देने वाले छात्रों के लिए कहा था वह देश के बच्चे हैं उनकी मांगों को पूरा किया जाना चाहिए। उसी प्रियंका गांधी के लिए झारखंड के छात्र देश के बच्चे नहीं है,उनके लिए उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है।केजरीवाल,डिंपल यादव, शरद पवार सहित बड़ी संख्या में नेता जंतर मंतर गए थे लेकिन झारखंड में इंडिया ब्लाक के दल की सरकार होने के कारण कोई झारखंड नहीं गया है और आंदोलन का समर्थन अपने राज्य से भी नहीं कर रहा है।

 


जंतर मंतर के छात्रों की तुलना में झारखंड के छात्रों की मांग राज्य की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार व इसमें गड़बड़ी करने वालों को सजा दिलाने की है।उनकी मांग शिक्षामंत्री के इस्तीफे की नहीं है,उनका कहना है कि वह किसी परीक्षा को रद्द कराने की मांग नहीं कर रहे है,उनकी मांग है कि झारखंड में पिछले पांच बरसों मे दस से अधिक विवादित सरकारी भर्ती की दूसरे राज्य के हाईकोर्ट से जजों से जांच कराने की, दोषी लोगों पर कार्रवाई और परीक्षा व भर्ती व्यवस्था का पारदर्शी बनाने की है। झारखंड के आंदोलनकारी अपने आंदोलन को युवाओं के भविष्य और व्यवस्था के भरोसे की लड़ाई बता रहे हैं।झारखंड के सीएम सीआईडी जांच पर भरोसा करने को कह रहे है और युवा उस पर भरोसा नहीं कर रहे हैं क्योंकि राज्य में जो भी जांच हुई है वह लीपापोती करने वाली साबित हुई है।सरकार को क्लीनचिट देने वाली साबित हुई है।वामपंथी विचारधारा के लोग जंतरमंतर के आंदोलन को अब तक का सबसे बडा़ व सफल आंदोलन बताने की कोशिश कर रहे थे,एक ऐतिहासिक आंदोलन बताने की कोशिश कर रहे थे लेकिन झारखंड के छात्र आंदोलन ने मिसाल पेश की है कि छात्रों का आंदोलन कैसा होना चाहिए और देश के शांतिप्रिय लोगों को यह आंदोलन पसंद आ रहा है।गांधी के देश मे तो ऐसा ही आंदोलन होना चाहिए।

 

 

 

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