यूएन महासभा में क्यूबा के विदेश मंत्री ने किया हंगामा
न्यूयॉर्क । संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से जारी तनाव मंगलवार को तीखी जुबानी भिड़ंत में बदल गया। अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज और क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पारिला के बीच जबरदस्त बहस हुई, जब महासभा में क्यूबा पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों पर चर्चा चल रही थी। असेंबली अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने शांति बनाए रखने की अपील की, क्यूबाई प्रतिनिधियों से अपनी सीटों पर वापस जाने और मंगलवार को वाल्ट्ज को अपनी बात रखने देने को कहा, और कुछ देर के लिए बैठक स्थगित कर दी। जब वाल्ट्ज हवाना सरकार की आलोचना कर रहे थे, तो क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मेजें थपथपाईं और शोर मचाना शुरू कर दिया।
वे अपनी सीटों से उठे और मंच की ओर बढ़ गए। वॉल्ट्ज ने अपने संबोधन में क्यूबा की सरकार पर भ्रष्टाचार और आम नागरिकों की कीमत पर सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने क्यूबा के नेतृत्व की कथित संपत्ति और विलासितापूर्ण जीवनशैली का जिक्र करते हुए सदस्य देशों से अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा करने वाले प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने की अपील की।
इस दौरान रोड्रिगेज ने वाल्ट्ज की बात में बार-बार रुकावट डाली और 'पॉइंट ऑफ ऑर्डर' पर बोलने की मांग की। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को घूरने लगे। वाल्ट्ज मंच से बोल रहे थे, जबकि रोड्रिगेज और उनके साथी मंच के नीचे सामने की तरफ मौजूद थे। रहमान ने 'पॉइंट ऑफ ऑर्डर' उठाते हुए आग्रह किया, कृपया कामकाज को सुचारू रूप से चलाने में मेरी मदद करें, और आपको यह अधिकार मिल जाएगा। वाल्ट्ज ने रोड्रिग्ज पर चिल्लाते हुए कहा, पीछे हट जाओ! यह हवाना नहीं है।
इस बीच, रहमान ने कहा, कृपया बैठ जाइए। बैठ जाइए, और फिर बैठक को स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा, मैं यहां प्रक्रिया के नियमों को निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से लागू करने के लिए हूं। कुछ ही मिनटों में जब बैठक फिर से शुरू हुई, तो रोड्रिगेज ने 'पॉइंट ऑफ ऑर्डर' उठाया। असल में यह एक जवाब था, जिसमें उन्होंने कहा कि वाल्ट्ज सरासर झूठ बोल रहे हैं और क्यूबा की जनता तथा सरकार की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं।
इस दौरान क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल ने उनके संबोधन का विरोध किया और मेज थपथपाकर आपत्ति जताई। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई, जब विदेश मंत्री रोड्रिगेज वॉल्ट्ज के मंच के करीब पहुंचे और उन्हें झूठा करार दिया। इस पर अमेरिकी राजदूत ने उन्हें पीछे हटने को कहा। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर सदन में व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की।