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भारत की नेट ज़ीरो यात्रा को गति दे रहा वेदांता एल्युमीनियम

कार्बन तीव्रता में 8.96% की कमी, 1,500 मेगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा योजना और अपशिष्ट के पूर्ण पुनर्चक्रण उपयोग के साथ सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम।

एफवाई21 के आधार वर्ष से अब तक कार्बन तीव्रता में 8.96% की कमी, जो दक्षता और स्वच्छ ऊर्जा पहलों से संभव हुई है।
2030 तक डिकार्बोनाइजेशन को तेज़ करने के लिए पीपीए के माध्यम से 1,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की योजना।
100% फ्लाई ऐश उपयोग और 14.6 एमएमटी अपशिष्ट का पुनर्चक्रण, जो सर्कुलर इकॉनमी में वेदांता की अग्रणी भूमिका को और मजबूत करता है।

रायपुर, नवम्बर 2025: भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी, वेदांता एल्युमीनियम ने अपने सतत विकास रिपोर्ट एफवाई25 जारी कर, एक बार फिर अपनी स्थिरता में अग्रणी भूमिका को मजबूत किया है। इस रिपोर्ट में कंपनी की डिकार्बोनाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने और सर्कुलर इकॉनमी प्रथाओं में की गई उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाया गया है — जो भारत के नेट ज़ीरो 2070 विज़न के अनुरूप है और एक अधिक टिकाऊ औद्योगिक भविष्य के निर्माण में कंपनी की भूमिका को रेखांकित करती है।
 
अपने ईएसजी विज़न “ट्रांसफॉर्मिंग फॉर गुड” पर आगे बढ़ते हुए, वेदांता एल्युमीनियम अपनी पूरी संचालन प्रक्रिया में स्थिरता को गहराई से शामिल कर रहा है — चाहे वह स्मेल्टर और रिफाइनिंग प्रक्रियाओं का डिकार्बोनाइजेशन हो, समुदायों को सशक्त बनाना हो या पारिस्थितिक तंत्रों को पुनर्स्थापित करना। रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि कंपनी का सिद्धांत “रिस्पांसिबल टुडे, सस्टेनेबल ऑलवेज” किस प्रकार भारत की एल्युमीनियम वैल्यू चेन में एक बड़ा परिवर्तन ला रहा है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में विश्व-स्तरीय सुविधाओं के साथ, वेदांता एल्युमीनियम ने एफवाई25 में 2.42 मिलियन टन एल्युमीनियम का उत्पादन किया, जो भारत के कुल उत्पादन का आधे से अधिक है — और पर्यावरणीय अनुपालन में शून्य सहनशीलता बनाए रखी। कंपनी ने एएसआई चेन ऑफ कस्टडी (सीओसी) प्रमाणन भी हासिल किया, जिससे जिम्मेदारीपूर्वक उत्पादित एल्युमीनियम के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उसकी साख और मजबूत हुई।
 
वेदांता एल्युमीनियम के सीईओ राजीव कुमार, ने कहा, “वेदांता एल्युमीनियम में स्थिरता हमारे लिए केवल एक अनुपालन प्रक्रिया नहीं, बल्कि विकास के लिए हमारी रणनीतिक दिशा है। हमारी ईएसजी प्रगति दिखाती है कि एल्यूमिनियम जैसे कठिन-से-कम-होने वाले क्षेत्र में भी नवाचार, रिन्यूएबल एनर्जी और सर्कुलैरिटी अपनाकर वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। हमें गर्व है कि हम भारत की नेट ज़ीरो यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं, यह साबित करते हुए कि औद्योगिक प्रगति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकती हैं।”
हरित भविष्य के लिए भारी उद्योग की नई परिभाषा
 
वेदांता एल्युमीनियम की स्थिरता दृष्टि के केंद्र में डिकार्बोनाइजेशन के प्रति गहरी प्रतिबद्धता निहित है। कंपनी ने कार्बन तीव्रता में 8.96% की कमी हासिल की है, जिससे यह 17.01 टीसीओ₂ई प्रति टन एल्युमीनियम पर पहुंच गई, जो वित्तीय वर्ष21 के बाद से इसका सबसे कम स्तर है। इस प्रगति को और तेज़ करने के लिए, वेदांता वर्ष 2030 तक लगभग 1,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा दीर्घकालिक पावर परचेज एग्रीमेंट्स के माध्यम से प्राप्त करने की योजना बना रही है, जिससे उसके संचालन भारत की नेट ज़ीरो महत्वाकांक्षाओं और कम-कार्बन एल्युमीनियम की बढ़ती वैश्विक मांग के अनुरूप होंगे।
 
इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम कंपनी की गेल गैस लिमिटेड के साथ साझेदारी है, जिसके तहत झारसुगुड़ा स्मेल्टर को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी। यह परिवर्तन 2025 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे प्रति वर्ष 47,000 टन से अधिक सीओ₂ उत्सर्जन में कमी आएगी — जो स्वच्छ ऊर्जा की ओर एक बड़ा कदम है। गेल 7.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण कर रही है, जो 32,000 एससीएम/दिन प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करेगी। यह पांच-वर्षीय समझौता वेदांता के आगामी 430 केटीपीए कास्ट हाउस का समर्थन करेगा और कंपनी की डिकार्बोनाइजेशन रोडमैप को और मजबूत बनाएगा।

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