व्यापार

बांग्लादेश से नेपाल गए, फिर भारत आकर छोटी सी दुकान खोली, आज 19500 करोड़ की है कंपनी

success story:-कहते हैं सफलता कहां छुपी होती है, कोई नहीं जानता। आज हम बात कर रहे हैं आर आर केबल्स (R R Kabel Ltd) के संस्थापक रामेश्वर लाल काबरा की। वह बढ़िया कारोबार करने के लिए बांग्लादेश से नेपाल गए। लेकिन वहां मन नहीं लगा। फिर वापस भारत आ गए। कई शहरों में दुकान चलाई। फिर कंपनी बनाई। आज इस कंपनी का मार्केट कैप 19,500 करोड रुपये करीब है।रामेश्वरलाल काबरा की कहानी शुरू होगी है बांग्लादेश से। वहां से वह कारोबार के सिलसिले में नेपाल माइग्रेट कर गए। वहां उन्हें मन नहीं लगा तो फिर भारत आ गए। यहां उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर में इलेक्ट्रिकल गुड्स की दुकान खोली। वहां भी मन नहीं लगा तो मुंबई आ कर इसी चीज की दुकान खोल ली।उनके पुत्र और इस समय आर आर ग्लोबल के एमडी और ग्रुप प्रेसिडेंट श्रीगोपाल काबरा बताते हैं कि रामेश्वरलाल काबरा का एक ही ध्येय था- कड़ी मेहनत। इसी सिद्धांत को मानते हुए उन्होंने इलेक्ट्रिकल गुड्स के मैन्यूफैक्चरिंग पर शिफ्ट हुए। वहां उन्हें अपार सफलता मिली। तभी तो आज उनका ग्रुप डायवर्सिफाइड हो गया है।लगभग 25 साल पहले उन्होंने बिजली के तारों या केबल, स्विच, स्विचगियर, लाइटिंग और अन्य साजोसामान की फैक्ट्री लगाई। यह चल निकली। यह इसलिए चल निकली क्योंकि इसके बनाये सामान फायर प्रूफ होते हैं। मतलब कि मकान में या फैक्ट्री में आग भी लग जाए तो इसके केबल पर कोई असर नहीं होगा। मतलब कि शार्ट सर्किट जैसी दुर्घटना में भी आग नहीं लगेगी।इस कंपनी को जब शुरू किया गया था तो इसे बनाने में करीब 27 करोड़ रुपये की पूंजी लगी थी। आज की तारीख में यह कंपनी 20,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा छूने को बेताब है। बीते शुक्रवार को बीएसई में इसका एक शेयर 1718 रुपये से भी ऊपर बंद हुआ। इस हिसाब से कंपनी का मार्केट कैप 19,430.47 करोड़ रुपये है।रामेश्वरलाल काबरा समाजसेवा भी काफी सक्रिय रहे हैं। आदिवासी और वंचित समुदाय के लिए उन्होंने एकल आंदोलन और एकल विद्यालय की स्थापना की है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रेड एंड इंडस्ट्री के क्षेत्र में भी काफी योगदान दिया है। इसी योगदान को सम्मानित करने के लिए साल 2018 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

 

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