छत्तीसगढ़ / कांकेर
कांकेयर ब्रांड बना ग्रामीण महिलाओं की पहचान, शुद्ध जैविक उत्पादों की बढ़ी मांग
उत्तर बस्तर कांकेर 22 जुलाई 2026
कांकेर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह ब्रांड जिले की हजारों महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने बताया कि ‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का, आम का अचार सहित विभिन्न जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दण्डकारण्य क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में उगाए गए ये उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। यह उत्पाद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किया जाता है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत होने के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
वर्तमान में ‘कांकेयर’ उत्पाद सी-मार्ट के माध्यम से स्थानीय बाजारों और कांकेश्वरी एफपीसी के जरिए इनका वितरण और बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। थोक खरीदने हेतु जिला पंचायत परिसर में स्थापित पैकेजिंग इकाई से खरीदा जा सकता है। अब ग्राहक इन्हें ऑनलाइन भीhttps://kancare.shop/
वेबसाइट के माध्यम से घर बैठे ऑर्डर कर सकते हैं और घर बैठे शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं। जिला पंचायत के अनुसार अब तक कांकेयर’ ब्रांड के तहत अरहर दाल 92 किलोग्राम, शहद 5.5 किलोग्राम, छिंद गुड़ 05 किलोग्राम, रागी आटा 09 किलोग्राम तथा मक्का आटा 06 किलोग्राम की बिक्री हो चुकी है। ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन की नई पहचान बनकर उभर रहा है।
कलेक्टर जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों का निराकरण करने दिए निर्देश
उत्तर बस्तर कांकेर।
जिला कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक कलेक्टर जनदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे आवेदकों ने अपनी विभिन्न मांगों एवं समस्याओं को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने प्राप्त आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के लिए निर्देशित किया। जिला कार्यालय में आज आयोजित जनदर्शन में कुल 28 आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें अन्त्योदय राशन कार्ड प्रदाय करने, प्रधानमंत्री आवास आवंटित करवाने, उच्च शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता, एग्रीस्टैक किसान पंजीयन, अतिथि शिक्षक पद पर भर्ती, अटल आवास आबंटित करने, प्राथमिक शाला भैराडीह हेतु भवन निर्माण जैसे विभिन्न प्रकार की मांगों व समस्याओं से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए। कलेक्टर क्षीरसागर ने जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों का निराकरण करने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी, अपर कलेक्टर द्वय जितेन्द्र कुर्रे एवं ए.एस. पैकरा, विभिन्न विभागों के जिला स्तर के अधिकारीगण उपस्थित थे।
कृषि स्थायी समिति की बैठक 23 को
उत्तर बस्तर कांकेर
जिला पंचायत कृषि स्थायी समिति के सभापति दीपांकर राय की अध्यक्षता में 23 जुलाई को दोपहर 12 बजे से कार्यालय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी भानुप्रतापपुर के सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई है। उक्त बैठक में संबंधित अधिकारियों को निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थित होने कहा गया है।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा का कलेक्टर-एसपी ने किया आत्मीय स्वागत
उत्तर बस्तर कांकेर 17 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा बस्तर प्रवास के दौरान आज सुबह 11 बजे शासकीय विश्राम गृह कांकेर पहुंचे। इस अवसर पर कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एसपी श्री निखिल राखेचा और जिला एवं सत्र न्यायालय कांकेर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री भास्कर मिश्र ने पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश श्री सिन्हा को पुलिस प्रशासन की ओर से ‘गॉर्ड ऑफ ऑनर’ के साथ सलामी दी गई। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी, अपर कलेक्टर श्री जितेन्द्र कुमार कुर्रे, एएसपी श्री योगेश साहू, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती सरस्वती बंजारे सहित जिला प्रशासन, पुलिस और जिला न्यायालय के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
सेवा सेतु पोर्टल के जरिए एक ही दिन में हुआ निराकरण
ऑनलाइन आवेदन करने के कुछ घंटों में जुड़ा राशन कार्ड में आवेदक की पुत्री का नाम
कलेक्टर ने श्री बसंत को सौंपा संशोधित राशन कार्ड
कांकेर 15 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ शासन की जनहितकारी पहल सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और सुलभ सेवाएं प्रदाय कराई जा रही हैं। इसी क्रम में ग्राम तेलावट निवासी श्री बसंत कुमार साहू ने अपनी तीन वर्षीय बेटी गेश्रीका का नाम राशन कार्ड में जोड़ने के लिए सेवा सेतु पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन के अगले ही दिन उनकी बेटी का नाम राशन कार्ड में जोड़ दिया गया।
राशन कार्ड की अद्यतन प्रति जिला कलेक्टर श्री निलेश महादेव क्षीरसागर ने आवेदक श्री साहू को अपने हाथों से प्रदान की। त्वरित कार्रवाई से प्रसन्न बसंत कुमार साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से अब सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते। घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर कम समय में ही आवश्यक सेवाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु पोर्टल से आम नागरिकों का समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है तथा शासन की सेवाएं अधिक सरल, सुलभ और पारदर्शी बनी हैं।
मुख्यमंत्री उत्कर्ष योजनांतर्गत चयनित विद्यार्थियों की काउंसिलिंग 14 जुलाई को
उत्तर बस्तर कांकेर, 13 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्कर्ष योजना (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए चयनित विद्यार्थियों की काउंसिलिंग 14 जुलाई को प्रातः 11 बजे से कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कांकेर में जिला स्तरीय समिति द्वारा आयोजित की जाएगी। काउंसिलिंग में कक्षा 4थीं एवं 5वीं की अंकसूची, आय, जाति एवं निवास प्रमाण-पत्र तथा पालक की सहमति-पत्र के साथ उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
गौरतलब है कि इस योजनांतर्गत कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए चयन परीक्षा गत 05 जुलाई को आयोजित की थी, जिसका परिणाम जारी होने के बाद दावा-आपत्ति भी आमंत्रित किया गया था। दावा-आपत्तियों के निराकरण पश्चात जिला स्तरीय अंतिम मेरिट सूची अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातिवार पृथक-पृथक जारी किया गया है, जिसे कांकेर जिले की वेबसाइट kanker.gov.in तथा कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कांकेर तथा सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मंडल संयोजक कार्यालय एवं संबंधित आश्रम-छात्रावास अधीक्षक कार्यालय में देखा जा सकता है। काउंसिलिंग में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को पृथक से भी सूचना दी जा रही है।
शहीद परिवारों एवं नक्सल पीडि़त परिवारों के पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास से किया जाएगा लाभान्वित
उत्तर बस्तर कांकेर, 13 जुलाई 2026
कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने जिले में संचालित सभी निर्माण कार्यों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय पर पूरा करने तथा शहीद परिवारों एवं नक्सल पीडि़त परिवारों के पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित करने के लिए निर्देशित किया है। सोमवार को आयोजित समय-सीमा की बैठक में उन्होंने सीएम हेल्पलाइन, मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जनदर्शन, पीएम पोर्टल में प्राप्त शिकायतों केे अलावा सुशासन तिहार, बस्तर मुन्ने शिविरों के दौरान प्राप्त आवेदनों सहित विभिन्न प्रकरणों के निराकरण की विस्तृत समीक्षा की गई। उनके द्वारा सभी शिकायतों को गुणवत्ता के साथ निराकरण करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
बैठक में उन्होंने अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, आंगनबाड़ी भवन, उचित मूल्य सह गोदाम भवन, प्रधानमंत्री आवास, किसानों का एग्रीस्टेक में पंजीयन, मुख्यमंत्री घोषणा मद अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्य, आयुष्मान भारत अंतर्गत पंजीयन इत्यादि कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी कार्यों को समय-सीमा में पूरा करने निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी, अपर कलेक्टर कांकेर श्री जितेन्द्र कुर्रे, अपर कलेक्टर अंतागढ़ श्री ए.एस. पैकरा, सभी एसडीएम सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी, जनपद सीईओ एवं नगरीय निकायों के अधिकारी मौजूद रहे।
पहुंचविहीन केन्द्रों में खाद्यान्न का अग्रिम भण्डारण
उत्तर बस्तर कांकेर, 10 जुलाई 2026
वर्षाकाल के दौरान पहंुचविहीन क्षेत्रों के नागरिकों को राशन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले के 33 पहुंचविहीन केंद्रों के 08 उचित मूल्य की दुकानों में 04 माह एवं 25 दुकानों में 06 माह के लिए खाद्यान्न का अग्रिम भण्डारण किया गया है। इसके अलावा कांकेर जिले से ही नारायणपुर जिले के 04 उचित मूल्य दुकानों के लिए भी खाद्यान्न भण्डारण किया गया है। पहंुचविहीन केंद्रों के उचित मूल्य दुकानों में चावल 6600 क्विंटल, शक्कर 3301 क्विंटल, 3300 क्विंटल, चना 3300 क्विंटल तथा गुड़ 600 क्विंटल का अग्रिम भण्डारण किया गया है।
सोलह लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत
उत्तर बस्तर कांकेर, 10 जुलाई 2026
कलेक्टर श्री निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर द्वारा सर्प काटने, तालाब एवं डबरी में डूबने से मृत्यु होने के चार प्रकरणों में मृतकों के निकटतम आश्रितों के लिए चार-चार लाख रूपए की मान से 16 लाख रूपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई हैं। बांदे तहसील के शांति नगर निवासी 71 वर्षीय सुधीर सरकार की सर्प काटने से मृत्यु होने के प्रकरण में उनकी पत्नी श्रीमती सेफाली सरकार के लिए चार लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार पखांजूर तहसील के ग्राम पी.व्ही. 46 निवासी 25 वर्षीय प्रहलाद समद्दार की तालाब में डूबने से मृत्यु होने के प्रकरण में उनके निकटतम आश्रित बिरेन्द्र समद्दार और उर्मिला समद्दार के लिए चार लाख रूपए, ग्राम पी.व्ही. 41 पुरूषोत्तम नगर निवासी 41 वर्षीय खगेन घोष की तालाब में डूबने से मृत्यु होने के प्रकरण में पत्नी श्रीमती अनिता घोष के लिए चार लाख रूपए तथा बांदे तहसील के ग्राम मरोड़ा की 08 वर्षीय अन्नु तोप्पा की सर्प काटने से मृत्यु होने के प्रकरण में उनके माता-पिता सोमनाथ तोप्पा और श्रीमती जुंपा बाई तोप्पा के लिए चार लाख रूपए की सहायता राशि कलेक्टर द्वारा स्वीकृत की गई है। स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार के माध्यम से हितग्राही के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा।
सोलर हाईमास्ट लाइट से रोशन हो रहे चौक-चौराहे
उत्तर बस्तर कांकेर, 10 जुलाई 2026
पारंपरिक ऊर्जा के स्थान पर सौर ऊर्जा बेहतर विकल्प के तौर पर सामने आ रही है। जिले के दुर्गम इलाकों सहित शहरी क्षेत्रों में भी सोलर हाईमास्ट लाइटें चौक-चौराहे को रोशन कर रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के माध्यम से स्थापित सोलर हाई मास्ट लाइटें आदिवासी क्षेत्रों में सुरक्षा व प्रकाश व्यववस्था का मुख्य आधार बन गया है। इनके लगने से प्रमुख चौक-चौराहें, ग्रामीण बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर रात में भी दिन जैसी निर्बाध रोशनी रहती है, जिससे अपराधिक घटनाओं में कमी आई है और महिलाओं व राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।
जिला प्रशासन से प्राप्त स्वीकृति उपरांत जिले के भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम कोरर शीतलापारा में सोलर हाईमास्ट लाइट स्थापित की गई है, मौसम खराब होने या बिजली गुल होने की स्थिति में भी से सोलर हाईमास्ट लाइट पर्याप्त बैटरी बैकअप के कारण स्वचालित रूप से रात भर जगमगाती रहती हैं। ग्रामवासियों ने इसके लिए क्रेडा विभाग एवं शासन का आभार व्यक्त किया है।
किसान अपना रहे आधुनिक तकनीक: सीड ड्रील मशीन से धान-मक्का की बुवाई
उत्तर बस्तर कांकेर, 10 जुलाई 2026
जिले के किसान भाई आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए सीड ड्रील मशीन से धान-मक्का का बुवाई कर रहे हैं। कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जिले के किसानों खेती की नई तकनीक को अपनाने एवं कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीड ड्रील मशीन के माध्यम से धान एवं मक्का की बुवाई के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह तकनीक कम समय, कम लागत और कम पानी में बेहतर खेती का प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। खरीफ सीजन में सूखा की स्थिति एवं श्रमिकों की कमी, पानी की कमी को देखते हुए सीडड्रील मशीन से ग्राम कन्हारपुरी, कुलगांव, भनसुली (नरहरपुर) कांकेर में कृषक श्री नरेन्द्र नेताम, देवेन्द्र देहारी, संतराम आंचला, मनोज आंचला, ताराचंद्र मिश्रा के खेतों में सीडड्रील से धान बुआई तथा ग्राम कोमलपुर के कृषक श्री संजीव कावड़े के खेत में मक्का की बुआई का कार्य किया गया। यह तकनीक श्रमिकों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कृषि अभियांत्रिकी विभाग के मार्गदर्शन में इस खरीफ सत्र में अब तक लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में सीड ड्रील मशीन से धान एवं मक्का की बुवाई की जा चुकी है। सीडड्रील मशीन से एक घंटे में सवा एकड़ तक की बुआई हो जाती है। इस मशीन की सहायता से बुवाई का कार्य कम समय में कम बीज से सीधे खेत में बोया जाता है। श्रमिक की कमी और जल संकट की स्थिति में यह तकनीकी किसानों के लिए लाभदायी सिद्ध हो रहा है। कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे कृषि मशीनीकरण को अपनाते हुए सीड ड्रील जैसी आधुनिक तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग करें, ताकि कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त कर खेती को लाभकारी बनाया जा सके।
सुदूर वनांचल ग्राम चिचगांव के किसान ने जैविक खेती से लिखी सफलता की नई इबारत
एम.ए. शिक्षित होकर भी खेती को बनाया आजीविका का माध्यम
10 एकड़ में विविध जैविक खेती से हो रही सालाना 08 लाख रुपये से अधिक की आय
उत्तर बस्तर कांकेर, 09 जुलाई 2026
जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र के आमाबेड़ा तहसील के ग्राम चिचगांव के किसान श्री सोनूराम धु्रव आज उन किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेती में नई संभावनाएं तलाशना चाहते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने नौकरी की बजाय खेती को अपने व्यवसाय के रूप में चुना और पूरी तरह जैविक खेती अपनाकर यह साबित कर दिया कि वैज्ञानिक सोच, परंपरागत ज्ञान और दृढ़ संकल्प साथ हों तो गांव में रहकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
चिचगांव के जैविक किसान श्री सोनूराम धु्रव ने एम.ए. (अर्थशास्त्र) की पढ़ाई पूरी की है। उनके पास लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि है, जहां वे पूरी तरह जैविक एवं समन्वित कृषि प्रणाली अपनाते हैं। वे राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम ¼NPOP) के अंतर्गत प्रमाणित किसान हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ प्रमाणीकरण समिति, भारत वानिकी एवं कृषि द्वारा निरीक्षण के बाद जैविक खेती का प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया है।
वर्ष 2015 से शुरू किया जैविक खेती का सफर
श्री धु्रव बताते हैं कि आज से लगभग 11 साल पहले उन्होंने वर्ष 2015 से जैविक खेती की शुरुआत की थी। प्रारम्भिक चरण में चुनौतियां जरूर थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनके खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली सहित आधुनिक जल प्रबंधन की व्यवस्था है, जिससे कम पानी में बेहतर उत्पादन प्राप्त हो रहा है। वे 10 एकड़ भूमि में विविध प्रकार की फसलें उगाते हैं। इनमंम लगभग 4 एकड़ में 100 प्रतिशत जैविक चिन्नौर धान की खेती करते हैं। इसके साथ ही वे ब्लैक राइस (काला धान) का भी उत्पादन करते हैं। इस वर्ष उन्होंने 400 पौधे काली मिर्च के लगाए हैं, जिनमें अब फल आना शुरू भी हो गया है। इसके अलावा वे गेहूं, उड़द, कुल्थी, रागी, काली हल्दी, आम सहित कई अन्य फसलों की खेती करते हैं तथा गौ-पालन भी करते हैं। इससे उनकी खेती पूरी तरह समन्वित एवं टिकाऊ बन गई है।
वृक्ष आयुर्वेद और पंचमहाभूत आधारित खेती
श्री ध्रुव अपनी खेती में ताराचंद बेलजी तकनीक का उपयोग करते हैं, जिसे वे वृक्ष आयुर्वेद आधारित प्राकृतिक खेती बताते हैं। यह पद्धति पंचमहाभूत- भूमि, गगन, वायु, अग्नि और जल के सिद्धांतों पर आधारित है। उनका मानना है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर खेती करने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसलें अधिक पौष्टिक व उपजाऊ होती हैं।
घर में तैयार करते हैं जैविक रसायन
श्री ध्रुव ने बताया कि खेत और आसपास उपलब्ध स्थानीय संसाधनों जैसे नींबू, पपीता, हर्रा तथा अन्य प्राकृतिक पदार्थों से स्वयं जैविक घोल एवं जैविक रसायन तैयार करते हैं। इनका उपयोग लंबे समय तक किया जा सकता है। बीज से लेकर खाद और कीटनाशक तक वे अधिकांश सामग्री स्वयं तैयार करते हैं, जिससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
प्रधानमंत्री के आह्वान से मिली प्रेरणा
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के आह्वान से उन्हें विशेष रूप से प्रेरणा मिली। उनका मानना है कि रासायनिक खेती से मिट्टी और मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं, जबकि जैविक खेती से पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न का उत्पादन संभव है। वे बताते हैं कि प्रधानमंत्री का “खर्च कम करें और लाभ बढ़ाएं” का संदेश उनके लिए प्रेरणास्रोत है। इसी सोच के साथ वे खेत में उपयोग होने वाले अधिकांश संसाधन स्वयं तैयार करते हैं, जिससे उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है और लाभ बढ़ता है।
मिट्टी की सेहत पर विशेष ध्यान
अपने खेत की मिट्टी की जांच में कार्बन की मात्रा कम मिलने पर उन्होंने तिल की खेती शुरू की है। फसल की कटाई के बाद उसके अवशेषों को खेत में मिलाकर वे जैविक कार्बन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता तथा पीएच स्तर संतुलित रखने में मदद मिलती है।
प्रति एकड़ 20 क्विंटल उत्पादन, चिन्नौर चावल 150 रुपये प्रति किलो
खरीफ सीजन में वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं और प्रति एकड़ लगभग 20 क्विंटल उत्पादन प्राप्त करते हैं। उनके खेत में उत्पादित चिन्नौर चावल शत-प्रतिशत जैविक है जो बाजार में लगभग 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता है। विभिन्न फसलों एवं कृषि गतिविधियों से उन्हें प्रतिवर्ष 8 लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त होती है। इस कार्य में उनके परिवार के सभी सदस्य सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
दूरस्थ क्षेत्र और कभी माओवाद से प्रभावित रहे ग्राम चिचगांव के प्रगतिशील जैविक किसान श्री ध्रुव ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्थानीय संसाधनों और प्राकृतिक पद्धतियों के साथ किया जाए तो कम लागत में भी बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। आज वे अपने क्षेत्र के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि जैविक खेती ही भारत के किसानों की प्राचीन पारम्परिक उत्कृष्ट कृषि पद्धति है जिसे आने वाले समय में पूरा देश अपनाएगा।
‘दीदी के गोठ’ के विशेष प्रसारण में महिलाओं ने साझा किया आत्मनिर्भर बनने का अनुभव
सांसद श्री नाग ने किया ‘कांकेयर‘ उत्पाद समूह की वेबसाइट एवं पैकेजिंग यूनिट का शुभारंभ
कहा- केन्द्र एवं राज्य सरकार की आजीविकामूलक योजनाओं से जुड़कर जिले की महिलाएं हो रहीं आर्थिक रूप से सशक्त व आत्मनिर्भर
उत्तर बस्तर कांकेर, 09 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) द्वारा संचालित मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ के 12वें विशेष प्रसारण का आयोजन आज जिला पंचायत के सभा कक्ष में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री भोजराज नाग रहे, जिसमें जिले के विभिन्न विकासखंडों से आईं बिहान से जुड़ी स्वसहायता समूहों की महिलाओं एवं लखपति दीदियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बिहान से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त व आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
इस अवसर पर सांसद श्री नाग ने समूह की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर बड़ी संख्या में महिलाएं लखपति दीदी बन रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि सुदूर अंचलों के गांवों में भी महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी ने कहा कि समूह एक ऐसा माध्यम है जिससे हर वर्ग की महिलाएं संगठित होकर स्वयं के बूते इतिहास लिख रही हैं। शासन की छोटी सी आर्थिक मदद से वे निर्धनता से सम्पन्नता की ओर लगातार बढ़ रही हैं और समाज में अपनी पृथक पहचान स्थापित कर रही हैं। इसके अलावा कार्यक्रम में उपस्थित छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, नगरपालिका परिषद कांकेर के अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक, जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती तारा ठाकुर तथा श्री महेश जैन ने भी संबोधित किया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने जिले में बिहान के माध्यम से संचालित किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में संचालित 28 क्लस्टरों के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस दौरान कांकेर उत्पाद समूह द्वारा तैयार की गई वेबसाइट का भी लोकार्पण किया गया, साथ ही सांसद श्री भोजराज नाग ने ‘कांकेयर‘ ब्रांड की पैकेजिंग यूनिट का शुभारंभ किया। इस यूनिट में स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की आधुनिक पैकेजिंग कर उन्हें बाजार तक पहुंचाया जाएगा, जिससे उत्पादों को बेहतर पहचान एवं विपणन का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद कांकेर के उपाध्यक्ष श्री उत्तम यादव, पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन श्री कुशलानंद गजबल्ला ने किया।
बिहान’ योजना से श्रीमती सविता साहू बनीं ‘लखपति दीदी’
चटिया मिल और मशरूम उत्पादन से आर्थिक रूप से हुई आत्मनिर्भर
उत्तर बस्तर कांकेर, 08 जुलाई 2026

जिले में ‘बिहान’ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी कई महिलाएं विभिन्न व्यवसायिक गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। सालाना 01 लाख रूपए से अधिक की आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ बन रही हैं, इससे उन्हें सम्मानजनक पहचान मिल रही है।
विकासखण्ड कांकेर के ग्राम सिदेसर निवासी श्रीमती सविता साहू आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। महानदी महिला क्लस्टर संगठन माकड़ीखूना के अंतर्गत संचालित गायत्री स्व सहायता समूह की सदस्य सविता साहू ने बिहान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी है। सविता साहू ने बताया कि समूह में जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी। परिवार का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना कठिन था। स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की इच्छा होने के बावजूद आर्थिक संसाधनों की कमी थी।
श्रीमती सविता साहू ने बताया कि बिहान योजना के बारे में जानकारी मिलने पर गायत्री स्व सहायता समूह से जुड़कर सदस्यता ग्रहण की। समूह में नियमित बचत और बैठकों के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहयोग मिलने लगा। बिहान योजनांतर्गत चक्रीय निधि, प्रोत्साहन स्वरूप राशि भी प्राप्त हुआ तथा आजीविका गतिविधियों के लिए 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि का लाभ मिला। बैंक से लेन-देन करना भी सीख गई। समय-समय पर बिहान के बीपीएम, एसी एवं पीआरपी के मार्गदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। बैंक से मुद्रा ऋण प्राप्त करने में भी बिहान की टीम ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। बिहान के मार्गदर्शन में सविता साहू ने चटिया मिल एवं मशरूम उत्पादन का व्यवसाय शुरू किया। उनके इस उद्यम से वर्ष 2024-25 में लगभग 03 लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त हुई, जबकि वर्ष 2025-26 में 01 लाख 21 हजार रूपए अर्जित कर अपने व्यवसाय का विस्तार कर रही है। आज सविता साहू न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर चुकी हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
प्रबंधकारिणी समिति की बैठक में पंचवर्षीय तथा वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने कलेक्टर ने दिए निर्देश
उत्तर बस्तर कांकेर, 08 जुलाई 2026
जिला खनिज संस्थान न्यास निधि प्रबंधकारिणी समिति की बैठक कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसके तहत स्वीकृत निर्माणाधीन कार्यों तथा अपूर्ण कार्यों की समीक्षा की गई। इसके अलावा पंचवर्षीय एवं वार्षिक निर्माण कार्यों की कार्ययोजना तैयार किए जाने के संबंध में विभागों से प्राप्त प्रस्तावों पर चर्चा की गई। कलेक्टर ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि जो कार्य लंबित हैं तथा अब तक प्रारंभ नहीं हो पाए हैं, उन्हें निरस्त कर राशि वापस जमा कराएं।
कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आज सुबह 11.30 बजे से आयोजित प्रबंधकारिणी समिति की बैठक में कलेक्टर ने विभागवार स्वीकृत कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने ऐसे स्वीकृत कार्य जो अब तक प्रारंभ नहीं हो पाए हैं, पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें निरस्त करने तथा आबंटित राशि वापस जमा कराने के लिए जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी को निर्देशित किया। कलेक्टर ने डीएमएफ मद से जिले में स्वीकृत निर्माण एवं विकास कार्यों की वर्षवार एवं विभागवार आबंटित राशि के व्यय और निर्माण कार्य की स्थिति की जानकारी ली। इसके अलावा बैठक में पंचवर्षीय एवं वार्षिक निर्माण कार्यों के विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना एवं प्राप्त प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु काउंसलिंग तिथि में वृद्धि
उत्तर बस्तर कांकेर, 07 जुलाई 2026
कलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में शिक्षण सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु काउंसलिंग तिथि में वृद्धि की गई है। ऐसे अभ्यर्थी जो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 30 जून से 06 जुलाई के बीच किसी कारणवश काउंसलिंग में शामिल नहीं हुए हैं, इन अभ्यर्थियों के लिए अब 08 जुलाई एवं 09 जुलाई को ऑनलाइन काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त सुश्री जया मनु ने बताया कि काउंसलिंग से वंचित विद्यार्थी आवश्यक दस्तावेजों के साथ काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने जिले में संचालित किसी भी एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में उपस्थित हो सकते हैं।
समर्थन मूल्य पर धान विक्रय हेतु कृषकों का नवीन पंजीयन 31 अक्टूबर तक
गत वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों को इस वर्ष 2026-27 के लिए पंजीकृत माना जाएगा
उत्तर बस्तर कांकेर, 06 जुलाई 2026
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए ऑनलाईन सोसायटी माड्यूल से 31 अक्टूबर 2026 तक नवीन पंजीयन तथा संशोधन करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। विगत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों को आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए पंजीकृत माना जाएगा एवं इसके लिए विगत खरीफ वर्ष में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान के रकबे तथा खसरा को राजस्व विभाग के माध्यम से एग्रीस्टेक पंजीयन पोर्टल में अद्यतन करा लिया जाएगा।
राज्य शासन द्वारा एग्रीस्टेक में कृषक पंजीयन कराने हेतु दिशा-निर्देश जारी किया गया है। जारी निर्देशानुसार खरीद कार्यों में पारदर्शिता में सुधार के लिए बायोमेट्रिक आधारित खरीदी प्रणाली गत वर्ष अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में भी लागू रहेगी। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हेतु कृषक पंजीयन के लिए खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों को आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए पंजीकृत माना जाएगा एवं इसके लिए विगत खरीफ वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान के रकबे एवं खसरे को राजस्व विभाग के माध्यम से एग्रीस्टेक पंजीयन पोर्टल से अद्यतन करा लिया जाए। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में उपार्जन केन्द्रों में धान विक्रय हेतु कृषकों के पास कृषि मंत्रालय भारत सरकार द्वारा संचालित एग्रीस्टेक पोर्टल के माध्यम से एग्रीस्टेक आईडी/फार्मर आईडी प्राप्त किया जाना अनिवार्य होगा। इस वर्ष कृषकों को कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के एकीकृत किसान पोर्टल में किसान पंजीयन किये जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
वन पट्टाधारी, डूबान, शासकीय पट्टेदार, कोटवार, संस्थागत कृषकों को भी धान विक्रय किये जाने हेतु एग्रीस्टेक में पंजीयन किया जाना अनिवार्य होगा। ऐसे कृषक जिन्होंने विगत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान विक्रय हेतु पंजीयन कराया था एवं जिनके पास एग्रीस्टेक फार्मर आईडी तथा किसान कोड उपलब्ध है, उन्हें पृथक से कोई नवीन पंजीयन कराए जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में कृषक पंजीयन के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार नवीन किसान पंजीयन, विगत वर्ष से पंजीकृत कृषकों के खसरा मैपिंग, बैंक विवरण संशोधन, एग्रीस्टेक पोर्टल के अथोराईजेशन मॉड्यूल का प्रयोग कर अधिया, रेगहा हेतु नॉमिनी पंजीयन तथा वनाधिकार पट्टाधारी, डूबान कृषकों एवं संस्थागत का नवीन पंजीयन 01 जुलाई से 31 अक्टूबर तक किया जाएगा। इसी प्रकार नॉमिनी संशोधन 01 जुलाई से धान खरीदी की अवधि तक तथा डिजिटल क्राप सर्वे के माध्यम से फसल की प्रविष्टि 15 अगस्त से 31 अक्टूबर तक किया जाएगा।