छत्तीसगढ़ / मनेन्द्रगढ़ – चिरिमिरी – भरतपुर
जल जीवन मिशन ने बदली सरस्वती बाई की जिंदगी
एमसीबी । मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत पाराडोल के हर घर तक जल जीवन मिशन के तहत नल से जल को पहुंचाने का सपना साकार हो चुका है। जल जीवन मिशन के तहत इस बस्ती के लोगों को अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की सुविधा मिल रही है। इस ऐतिहासिक और क्रांतिकारी पहल से ग्रामीणों के जीवन में व्यापक बदलाव आया है, और इसकी एक मिसाल ग्राम पंचायत पाराडोल की निवासी श्रीमती सरस्वती बाई की प्रेरणादायक कहानी है।
सरस्वती बाई एक सामान्य ग्रामीण महिला हैं, जिनका जीवन कभी पानी के लिए संघर्ष में बीतता था। अपने परिवार के लिए पानी लाने उन्हें लंबी दूरी तय कर खेतों के रास्ते कुएं तक जाना पड़ता था। यह प्रक्रिया न केवल उनके कीमती समय को बर्बाद करता था, बल्कि उनके परिवार के स्वास्थ्य जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में शुरू हुए जल जीवन मिशन से सरस्वती और उनके परिवार की जिंदगी बदल गई है।
सरस्वती का जीवन और उनके परिवार में आया बदलाव
अब सरस्वती के घर में नल से स्वच्छ और सुरक्षित पानी आता है। इस बदलाव ने न केवल उनके समय की बचत की है, बल्कि उनके परिवार के स्वास्थ्य में भी बड़ा सुधार किया है। सरस्वती बताती हैं कि अब वह समय, जो पानी लाने में व्यर्थ होता था, अब वह नहीं होता है अब कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताती हैं और खेती के अलावा अन्य कामों में भी ध्यान लगाती हैं। ग्राम पंचायत पाराडोल में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कुल 127 घरों में से 118 घरों में नल कनेक्शन लगकर पूर्ण हो चुका हैं। इसके साथ ही शासन ने इन कनेक्शनों का सत्यापन भी सुनिश्चित किया है, जिससे अब निजी स्रोतों पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो गई है।
सरस्वती ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का किया आभार
सरस्वती ने जल जीवन मिशन की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को आभार व्यक्त किया हैं। उनका कहना है कि इस योजना से ग्रामीण महिलाओं के जीवन को न केवल आसान बनाया है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी दिया है।
जल जीवन मिशन योजना से हो रहा व्यापक प्रभाव
जल जीवन मिशन योजना केवल पानी की आपूर्ति तक सीमित नहीं है। बल्कि यह ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सुधार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है। सरस्वती बाई की कहानी इस मिशन की अनगिनत सफलता की कहानियों में से एक है, जो यह साबित करती है कि जब सरकार और जनता मिलकर काम करते हैं, तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। जल जीवन मिशन ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में किए गए प्रयासों से समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
पर्यटन स्थल अमृतधारा में परियोजना निदेशक ने किया श्रमदान
एमसीबी । जिले के बहुचर्चित और रमणीय स्थल अमृतधारा में जिले के अधिकारियों सहित ग्रामीणों आगंतुकों ने स्वच्छता श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया। नये वर्ष के आगमन से अमृतधारा का लुफ्त उठाने हेतु हजारों की संख्या में पर्यटक अमृतधारा पहुंचते है। पिकनिक मनाते हुए जागरूकता के अभाव में जगह-जगह प्लास्टिक की थैलियों एवं बचे हुए अपशिष्ट को स्थल पर ही छोड़ देते है। स्थल पर सामुदायिक स्वच्छता हेतु जहां श्रमदान स्वच्छता की पहल की वही दूसरी और अपना कचरा अपनी जिम्मेदारी हेतु समझाइए भी दी गई। मंदिर समिति के पुजारी के द्वारा अमृतधारा स्थल पर स्वच्छता हेतु माइक के माध्यम से आगंतुकों से गंदगी न करने हेतु भी अनुरोध किया जाता है।
श्रमदान कर परियोजना निदेशक नितेश उपाध्याय ने 2025 में सामुदायिक स्वच्छता हेतु घरेलू गंदे पानी, जल संवर्धन जल संरक्षण हेतु, सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध, सोर्स सेग्रीगेशन, हेतु स्वच्छता शपथ दिलाई एवं संकल्प पर हस्ताक्षर किए गए। जिसमें जिला खनिज अधिकारी दयानंद तिग्गा, खनिज इंस्पेक्टर आदित्य मानकर, जनपद सीईओ वैशाली सिंह, रतन दास मानिकपुरी, रितेश पाटीदार, सिमेंद्र सिंह के साथ जिला समन्वयक राजेश जैन प्रभा प्यासी सरपंच सोनसाय, सचिव संतलाल साहू एवं स्वच्छग्राही समूह की महिलाएं उपस्थित रही।
स्वच्छता बेरियर बना आजीविका का स्रोत,न्यू ईयर पर 7530 रु मिला स्वच्छता शुल्क
पर्यटन एवं दर्शनीय स्थल अमृतधारा में पर्यटन की नियमित साफ सफाई एवं स्वच्छता हेतु स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण अंतर्गत स्वच्छता बैरियर की शुरुआत की गई है। जिसमें 10 महिलाओं को जोड़ा गया। आगंतुकों से स्वच्छता शुल्क के रूप में 10 एवं 20 रुपये प्रति वाहन लिया जाता है। जिससे संलग्न स्वच्छग्राही महिलाओं को अतिरिक्त आय सृजित हो सके और स्थल पर नियमित रूप से साफ सफाई हो सके।
बिहान योजना से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ी अंजू की प्रेरणादायक कहानी
एमसीबी। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन में बदलाव लाने की दिशा में बिहान योजना ने अहम भूमिका निभाई है। इस योजना के माध्यम से लाखों महिलाएं आज आत्मनिर्भर बन रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है मनेंद्रगढ़ विकासखंड के चनवारीडांड की रहने वाली अंजू सिंह की है जिन्होंने संघर्ष और मेहनत से खुद को 'लखपति दीदी' के रूप में स्थापित किया।
आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों से परेशान थी अंजू
अंजू सिंह का जीवन आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ के साथ शुरू हुआ। उनके परिवार के पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था। गरीबी और कठिनाइयों के बीच उन्होंने अपने सपनों को साकार करने का हौसला बनाए रखा। इसी दौरान उन्हें राज्य सरकार की छत्तीसगढ़ ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान योजना' के बारे में जानकारी मिली। अंजू ने इस योजना से जुड़ने का निर्णय लिया, जो उनके जीवन में बदलाव लाने वाला सबसे बड़ा कदम साबित हुआ।
अंजू सिंह को बिहान योजना से मिली नई उम्मीद
बिहान योजना के तहत अंजू सिंह ने मुर्गीपालन का व्यवसाय शुरू किया। छोटे से कमरे से शुरू हुआ उनका व्यापार मेहनत और लगन के बलबूते धीरे-धीरे बढ़ने लगा। बिहान योजना के सहयोग और अपने दृढ़ संकल्प के चलते अंजू की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। आज अंजू सिंह की सालाना बचत एक लाख रुपये तक पहुंच गई है। इस सफलता ने न केवल उनके जीवन को बदल दिया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी जबरदस्त बढ़ोतरी की है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को व्यक्त किया आभार
अंजू सिंह ने अपनी सफलता के लिए प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता देने के लिए हैं। इन योजनाओं का लाभ लेकर हर महिला अपने जीवन को बेहतर बना सकती है।
अंजू अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
अंजू सिंह की कहानी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति और मेहनत का साथ मिले, तो हर बाधा को पार किया जा सकता है। आज अंजू सिंह सिर्फ 'लखपति दीदी' नहीं बल्कि उन हजारों महिलाओं के लिए एक मार्गदर्शक हैं, जो अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखती हैं। बिहान योजना ने यह साबित कर दिया है कि जब महिलाओं को अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव ला सकती हैं। अगर काम में लगाव हो तो हर चुनौती को मेहनत और धैर्य के साथ जीता जा सकता है। यह कहानी प्रदेश की हर महिला के लिए प्रेरणादायक है।
सिद्ध बाबा मंदिर: आस्था, प्रकृति और विकास का अद्वितीय संगम
एमसीबी । छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ में स्थित सिद्ध बाबा मंदिर एक ऐसा स्थल है जो धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। पहाड़ की चोटी पर स्थित यह मंदिर न केवल भक्तों के लिए पवित्र स्थल है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षक गंतव्य बन चुका है। यह धाम अपने शांत वातावरण और अद्वितीय प्राकृतिक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है।
प्राकृतिक सुंदरता का आकर्षण
मंदिर के चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ियों से दिखने वाला विहंगम दृश्य और शांत वातावरण यहां आने वाले हर व्यक्ति को आत्मिक शांति प्रदान करता है। हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र पर्यटकों को बार-बार आने के लिए प्रेरित करता है।
सिद्ध बाबा की दिव्य मान्यता
सिद्ध बाबा के चमत्कारिक रूप में सांप और बाबा के दर्शन की कहानियां यहां के भक्तों में आस्था का स्रोत हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूरी होती है। भक्तों के अनुसार, यह मंदिर दैवीय शक्ति का केंद्र है।
ऐतिहासिक महत्व और विकास की पहल
सिद्ध बाबा मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी उल्लेखनीय है। मंदिर परिसर में प्राचीन शिलालेख इसकी प्राचीनता को प्रमाणित करते हैं। हाल ही में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल पर मंदिर के विकास के लिए 74 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। इस राशि से पेयजल, रोपण, और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अधिक सहूलियत होगी।
स्थानीय समुदाय और आस्था का केंद्र
मंदिर के आसपास बसे आदिवासी समुदाय के लोग इसे अपनी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। यहां की सिद्ध पूजा विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मंदिर के विकास के लिए स्वीकृत बजट को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह है, और उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त किया है।
पर्यटन के लिए उभरता केंद्र
सिद्ध बाबा मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि इसे ईको-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह पहल क्षेत्र में रोजगार और विकास की संभावनाएं भी लेकर आएगी।
सिद्ध बाबा मंदिर, धार्मिक और प्राकृतिक आकर्षणों से समृद्ध एक अद्वितीय स्थल है। यह न केवल छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आस्था का प्रतीक है, बल्कि पर्यटन और विकास के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्राकृतिक सौंदर्य व धार्मिक आस्था का अनूठा संगम है अमृतधारा जलप्रपात
एमसीबी । छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में हसदेव नदी पर स्थित अमृतधारा जलप्रपात अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह 90 फुट (27.4 मीटर) ऊँचा और 15 फीट चौड़ा जलप्रपात पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
प्राकृतिक और धार्मिक महत्व
अमृतधारा जलप्रपात के पास स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर इस स्थल के धार्मिक महत्व को बढ़ाता है। सावन के महीने में यहां शिव भक्तों का तांता लगता है, जो जलप्रपात की रमणीयता और मंदिर की पवित्रता का अनुभव करने के लिए आते हैं।
सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता
यह क्षेत्र पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आता है और यहां पंडो, गोंड़, बैगा, चेरवा जैसी जनजातियां निवास करती हैं। उनकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं और प्राकृतिक सौंदर्य इस स्थल को और अधिक आकर्षक बनाते हैं। बारिश के मौसम में जलप्रपात का तेज बहाव और आसपास की हरियाली इसे और भी मनमोहक बना देती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अमृतधारा जलप्रपात का नाम कोरिया रियासत के राजा द्वारा रखा गया था। यह जलप्रपात जनजातीय गांवों के पास स्थित है, जो वर्षों से इस क्षेत्र का हिस्सा रहे हैं।
पर्यटन के लिए आदर्श स्थल
रायपुर से करीब 300 किलोमीटर दूर और मनेंद्रगढ़ नेशनल हाइवे के पास स्थित यह स्थल पर्यटकों के लिए आसानी से पहुँचने योग्य है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों के पर्यटकों के लिए यह एक प्रमुख आकर्षण है। सावन और बारिश के दौरान, जलप्रपात का दृश्य ऐसा होता है कि लोग इसे अपने कैमरों में कैद करना चाहते हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान
अमृतधारा जलप्रपात न केवल एक प्राकृतिक और धार्मिक स्थल है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के लिए आजीविका का भी स्रोत है। यहां आने वाले पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
अमृतधारा जलप्रपात अपनी अनोखी सुंदरता, धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक विविधता के कारण छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। यह स्थान शहर की हलचल से दूर, प्रकृति और शांति का अनुभव करने के लिए आदर्श है।
मृतक के परिजन के लिए को 4 लाख की सहायता राशि स्वीकृत
एमसीबी । राजस्व-आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में संशोधित प्रावधान के अनुसारप्राकृतिक आपदा राहत के अंतर्गत आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत, मनेन्द्रगढ़ तहसील के ग्राम मौहारपारा वार्ड क्र0 06 निवासी मृतक शुभम कुमार की पानी की टंकी में डूबने से हुई मृत्यु पर दुर्गावती (मृतक की माता) को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। स्वीकृत राशि का व्यय मांग संख्या-58 मुख्य शीर्ष-2245 प्राकृतिक आपदा राहत के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में विकलनीय होगा।
छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम संशोधन नियम के तहत् होगी अजजा व अजा के पदों का आरक्षण
एमसीबी। जिले में पहली बार जिला पंचायत के 10 सदस्यों का निर्वाचन प्रस्तावित है। छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम 1995 (2024) संशोधन नियम के अनुसार, नियम 04 के बिंदु क्र. 03 के तहत सबसे पहले अनुसूचित जनजाति का आरक्षण किया जाएगा, इसके बाद अनुसूचित जाति का आरक्षण किया जाएगा। आरक्षण प्रवर्गवार अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति का अवरोही क्रम के प्रतिशत के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया में कुल 10 जिला पंचायत सदस्यों में से अनुसूचित जनजाति के 07, अनुसूचित जाति के 01 और अनारक्षित के 02 पद आरक्षित होंगे। अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिए आरक्षित क्षेत्र में अधिकतम प्रतिशत वाले निर्वाचन क्षेत्रों को सर्वप्रथम आरक्षित किया जाएगा। यदि यह निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति प्रवर्ग में उच्चतम स्तर पर आता है तो इस क्षेत्र को छोड़कर निचले क्रम वाले क्षेत्र को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 30 के अंतर्गत जिला पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या में से कम से कम 50 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। इनमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं के लिए आरक्षित स्थान भी शामिल हैं। इस प्रक्रिया के तहत अनुसूचित जनजाति की कुल 07 सीटों में से 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के आधार पर 04 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। अनुसूचित जाति की कुल 01 सीट में से 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के आधार पर यह 01 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। अनारक्षित की कुल 02 सीटों में से 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के आधार पर 01 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। इस प्रकार कुल 10 सीटों में से 06 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
जिला पंचायत में पहली बार निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न की जा रही है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में महिलाओं के आरक्षण की प्रक्रिया प्रत्येक प्रवर्ग में लाटरी के माध्यम से की जाएगी। अनुसूचित जाति की 01 सीट होने के कारण यह नियमानुसार महिला के लिए आरक्षित रहेगी। पेसा (PESA) नियम लागू होने के कारण जिले की तीनों जनपद पंचायतों में अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रहेंगे। इनमें से 02 महिला सीटें लाटरी के माध्यम से आरक्षित की जाएंगी।
धान खपाने वालों कोचियों तथा बिचौलियों पर कार्रवाई
एमसीबी । कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर केल्हारी तहसीलदार करमचंद जाटवर के कुशल मार्गदर्शन में तहसील केल्हारी क्षेत्रांतर्गत 27 दिसंबर 2024 को मध्यप्रदेश राज्य से छत्तीसगढ़ राज्य में बिचौलियों के द्वारा अवैध धान परिवहन कर धान खपाने की कोशिश की जा रही थी। राजस्व एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने तत्परता दिखाते हुये 02 पिकअप व उसमें लोड 93 बोरी धान जप्ती की कार्रवाई की गयी। इसके साथ ही कोचियों के द्वारा दूसरे किसानों के खातों के माध्यम से धान खपाने के लिए समिति में लाये गये 20 बोरी धान की भी जप्ती की गयी। इसी क्रम में 19 दिसंबर को 53 बोरी, 23 दिसंबर को 73 बोरी, 24 दिसंबर को 215 बोरी धान पकड़ने कार्यवाही की गयी। गौरतलब है कि जिले में किसानों से धान खरीदी का कार्य किया जा रहा है। ऐसे में अवैध धान को लेकर भी जिला प्रशासन लगातार कार्यवाही कर रहा है ताकि किसी भी प्रकार से अवैध धान की बिक्री धान खरीदी केंद्रों में ना की जा सके।
अवैध क्रशर सील व दर्री टोला में स्थित पत्थर खदान में खनिज विभाग ने की कार्रवाई
एमसीबी । कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर खनिज विभाग ने बड़ी कार्यवाही करते हुए 26 दिसंबर 2024 को स्थान ग्राम दर्रीटोला तहसील नागपुर अंतर्गत आने वाले खसरा क्रमांक 208/1, 208/2, 211 रकबा 1.113 हे. क्षेत्र पर प्यारेलाल साहू निवासी लोहारी के पक्ष में स्वीकृत खनिज साधारण पत्थर उत्खनीपट्टा के मौका जांच में खदान में पाई गई अनियमितताओं व उत्खनन योजना अनुसार खनन कार्य नहीं किए जाने के कारण, पट्टा शर्तों के उल्लंघन एवं पर्यावरणीय नियमों के पालन नहीं किए जाने के कारण पट्टाधारक प्यारेलाल साहू निवासी लोहारी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015, एवं खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत कार्यवाही की गई है।
इसी क्रम में लक्ष्मण मिश्रा निवासी बरबसपुर के द्वारा स्वयं के निजी भूमि खसरा क्रमांक 842/1 रकबा 0.380 हे. क्षेत्र में बिना वैध अनुमति के क्रशर स्थापित किए जाने छत्तीसगढ़ खनिज (खनन परिवहन तथा भंडारण) नियम 2009 के तहत कार्यवाही किया गया। खनिज विभाग द्वारा मौके पर जाकर क्रशर को सीलबंद किया गया है। आपको बता दे कि विभाग द्वारा लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर अवैध उत्खनन और परिवहनकर्ताओं के विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है। सूचना मिलते ही विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही की जा रही है।
आरक्षण कार्यवाही 29 को
एमसीबी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2024-25 के तहत पदों के आरक्षण के लिए तिथि निर्धारित कर दी है। कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभा कक्ष में 29 दिसंबर को सुबह 10ः30 बजे से जिला पंचायत सदस्यों का आरक्षण, सुबह 11ः00 बजे से समस्त जनपद पंचायतों के महिला अध्यक्ष पदों के आरक्षण तथा दोपहर 12ः00 बजे से समस्त जनपद पंचायत सदस्य पदों का आरक्षण की कार्यवाही की जायेगी।
केल्हारी में सुशासन दिवस पर अटल जी को किया गया याद
एमसीबी । जिले विकासखण्ड मनेंद्रगढ़ के ग्राम पंचायत केल्हारी अटल चौक सहित आस पास के ग्राम पंचायत में भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस मनाया गया और अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन परिचय के बारे में बताया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत जिला सदस्य दृगपाल सिंह, भाजपा वरिष्ठ कार्यकर्ता पीताम्बर गुप्ता जनपद सदस्य अनीता सिंह, सुनील तिवारी ने अटल जी के छायात्रित पर दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी का मुंह मीठा कराया गया। इस कार्यक्रम में सरपंच आशा सिंह, सचिव गंगा राम, अशोक कुमार, शिवकुमार, सौरभ, जयसिंह, संतोष, अजीत जायसवाल, सुरेश गुप्ता, आनंद गुप्ता सहित अनेक ग्रामीण लोग शामिल रहे।
जिले में आदिमानव द्वारा बनाए गए शैलचित्र शोधपरख : डॉ विनोद पांडेय
एमसीबी । राज्य शासन पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग द्वारा महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय रायपुर के सभागार में 21 से 23 दिसंबर तक प्राचीन छत्तीसगढ़ में कला और वास्तु कला विषय पर राज्य स्तरीय शोध संगोष्ठी का आयोजन डॉ. भुवन विक्रम क्षेत्रीय निदेशक भोपाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की विशिष्ट अतिथि एवं संचालक पुरातत्व पर्यटन संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य की अध्यक्षता में किया गया।
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. विनोद कुमार पांडेय ने मनेंद्रगढ़- चिरमिरी -भरतपुर जिले के शैलाश्रय के बारे में व्याख्यान एवं प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया तथा जिले के भरतपुर विकासखंड के तिलौली, आरा, लावाहोरी (घोड़बंधा पाठ) भंवरखोह (कोहबउर), नवाडीह के शैलाश्रयों (आदिमानव द्वारा चट्टानों, पहाड़ों, गुफाओं में उकेरे गए चित्र) के बारे में विस्तार से अवगत कराया साथ ही पेपर प्रेजेंटेशन भी दिया। छत्तीसगढ़ व विभिन्न राज्यों से आए 64 लोगों ने शोध सारांश भेजें। जिसमें से संगोष्ठी के मूल विषय और उपविषयों पर केंद्रित 44 आलेखों का वाचन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पुरातत्व विभाग के उपसंचालक डॉ. पी॰ सी॰ पारख, पूर्व उप संचालक जी. एल. रायकवार, राहुल सिंह, प्रोफेसर एल. एस. निगम, प्रोफेसर दिनेश नंदिनी परिहार, डॉ. मोना जैन, डॉ. नितेश मिश्रा, मंगलानंद झा, प्रभात सिंह, अमर भारद्वाज सहित अनेक पुरातत्वविद व इतिहासकार उपस्थित रहे।
एकलव्य आवासीय विद्यालयों प्रवेश के लिए ऑनलाईन तिथियों में संशोधन
एमसीबी । भारत सरकार जनजातिय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली अंतर्गत गठित राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति, नई दिल्ली द्वारा एवं छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय आदिम जाति कल्याण, आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में शिक्षण सत्र 2025-26 में कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु ऑनलाईन पंजीयन वेबसाईट http://eklavya.ch.nic.in पर दिनांक 11 नवंबर 2024 से पंजीयन प्रारंभ कर दिनांक 19 जनवरी 2025 को प्राक्चयन परीक्षा का आयोजन किया जाना था। उपरोक्त परीक्षा अपरिहार्य कारणों से दिनांक 16 फ़रवरी 2025 को आयोजित किया जाना है। प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाईन आवेदन करने की संशोधित तिथि निम्नानुसार है- ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2024 तक ऑनलाईन भरे गये फार्म में त्रुटि सुधार की तिथि 01 से 08 जनवरी 2025 रात्रि 11ः00 बजे तक, प्रवेश परीक्षा की तिथि 16 फ़रवरी 2025 तक संशोधन किया गया है।
विकासखंड भरतपुर की महिला कर्मचारियों को मिला चुनाव प्रशिक्षण
एमसीबी । अनुविभागीय अधिकारी राजस्व भरतपुर के निर्देशन में 19 दिसम्बर को नोडल अधिकारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी भरतपुर ने विकासखंड भरतपुर में पंचायत-निकाय चुनाव के लिए 225 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया। जिसमें तीन केंद्र बनाए गए थे। स्वामी आत्मानंद स्कूल भरतपुर में कुल 80 प्रशिक्षणार्थी, विकासखंड स्त्रोत सभा कक्ष में 55 प्रशिक्षणार्थी तथा जनपद सभा कक्ष में 90 प्रशिक्षणार्थियों को मास्टर ट्रेनरों के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया एवं चुनाव की बारीकियों को समझाया गया।
मतदान केंद्रों का चयन, सुरक्षा व्यवस्था, नामांकन प्रक्रिया और प्रतीकों का आवंटन सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही मतदान दलों का गठन, मतदान सामग्री का वितरण और प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की जिम्मेदारी भी रिटर्निंग ऑफिसर की होगी। चुनाव प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचरण संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। सभी राजनीतिक दलों के अभ्यर्थियों को अपने नामांकन पत्र के साथ निर्धारित प्रारूप में शपथ पत्र और आवश्यक कागजात जमा कराने के लिए निर्देश दिए हैं। वहीं, निर्वाचन व्यय की सीमा और उससे संबंधित जानकारी भी स्पष्ट रूप से दी जाएगी। सभी राजनीतिक दलों को प्रचार सामग्री के लिए पूर्व में अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। मतदान प्रक्रिया के लिए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए हैं। जिसमें पंच के लिए सफेद, सरपंच के लिए नीला, जनपद सदस्य के लिए पीला और जिला सदस्य के लिए गुलाबी मतपत्र का उपयोग होगा। मतदाता घूमते तीर के चिन्ह वाली रबर मोहर का उपयोग कर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतपेटियों के लिए गोदरेज और एमपी टाइप की पेटियों का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रवेश और निकासी मार्ग अलग-अलग रखे जाएंगे। हर मतदान केंद्र में दो मतदान कक्ष होंगे और पर्याप्त बिजली, पानी एवं शौचालय व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है। मतदान के बाद मतपेटियों को सील किया जाएगा और सभी अभ्यर्थियों के अभिकर्ताओं की उपस्थिति में मतगणना होगी। पंच, सरपंच, जनपद सदस्य और जिला सदस्य की मतगणना क्रमवार की जाएगी। सभी प्रशिक्षणार्थियों को निर्देश दिया कि वे चुनाव प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखें।
डबरी निर्माण से किसान मोहित हुआ आत्मनिर्भर
एमसीबी । मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत महाई के एक छोटे से किसान मोहित की जिंदगी हर बीतते दिन के साथ सूखती फसल की तरह निराशा में घिरता जा रहा था । मोहित के पास तीन एकड़ जमीन तो थी, लेकिन बिना सिंचाई साधन के वह जमीन सिर्फ बारिश की भरोसे पर निर्भर था । हर साल अनिश्चित बारिश और पानी की कमी ने उनके लिए खेती को घाटे का सौदा बना रहा था । जैसे-जैसे फसलें असफल हो रही थीं, मोहित का आत्मविश्वास टूटता जा रहा था। खेती के घाटे ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वे अब मजदूरी का सहारा लें।
एक किसान जिसकी जमीन कभी उसके जीवन का आधार थी, अब उसके लिए एक बोझ बन चुका था । लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुआ। यह कहानी मोहित के संघर्ष और उनकी किस्मत बदलने वाले एक अद्भुत बदलाव की है।
मोहित का बारिश के भरोसे से आत्मनिर्भरता तक का सफर
जब ग्राम पंचायत महाई में जिला प्रशासन ने किसानों की समस्याओं पर ध्यान दिया, तो मोहित की हालत ने अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उनकी जमीन को देखकर यह साफ हो गया कि अगर सिंचाई की सुविधा मिल जाए, तो यह जमीन सिर्फ उपजाऊ ही नहीं, बल्कि समृद्धि का साधन बन सकती है। यहीं से शुरू हुआ बदलाव का सफर। मनरेगा योजना के तहत डबरी निर्माण कार्य को स्वीकृति मिली। डबरी निर्माण के लिए 2 लाख 28 हजार रुपए का प्रशासनिक स्वीकृत बजट पास किया गया। लेकिन सिर्फ बजट ही पर्याप्त नहीं था। सही स्थान का चयन, निर्माण सामग्री की उपलब्धता और जल संग्रहण को सुनिश्चित करना, इन सभी चुनौतियों का सामना ग्राम पंचायत महाई और जिला प्रशासन ने किया। विशेषज्ञों की मदद से मोहित के खेत में जलभराव वाली उपयुक्त जगह का चयन किया गया और मनरेगा के माध्यम से निर्माण कार्य शुरू हुआ।
मोहित के साथ-साथ गांव वालों को भी मिला रोजगार
इस डबरी निर्माण कार्य में न केवल मोहित का परिवार लाभान्वित हुआ, बल्कि गांव के कई मजदूरों को भी लाभ मिला । डबरी निर्माण ने पूरे गांव को 100 दिनों का रोजगार दिया । यह काम सिर्फ मोहित की जमीन को सिंचाई योग्य बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम था।
जब डबरी का निर्माण पूरा हुआ, तो यह केवल एक जलाशय नहीं था, बल्कि मोहित के सपनों को नया आधार मिला । उनकी जमीन पर अब सिर्फ पानी का इंतजार नहीं था; यह एक ऐसी जमीन बन गई थी, जो सालभर पूरी तरह उपजाऊ होने वाला था ।
इस डबरी ने मोहित को न केवल पारंपरिक फसलों की पैदावार बढ़ाने का मौका दिया, बल्कि उन्हें नए प्रयोग करने का आत्मविश्वास भी दिया। उन्होंने अपनी जमीन पर सब्जी की खेती शुरू की और पहली बार मछली पालन का साहस किया। इस बार उन्हें मछली पालन से 50 हजार रुपए का मुनाफा हो रहा है। वहीं धान की फसल से 40 हजार रुपए की आय हो रहा है।
मोहित कहते हैं कि "पहले मैं सिर्फ बारिश के भरोसे रहता था। फसल खराब होती थी, तो हाथ में कुछ भी नहीं बचता था। लेकिन अब मेरे पास अपनी डबरी है। मैं सब्जी और मछली पालन से भी अच्छी आय अर्जित कर रहा हूं। अब मुझे भविष्य के लिए चिंता नहीं बल्कि नई उम्मीदें हैं।"
डबरी निर्माण ने दी मोहित की आत्मविश्वास को नई राह
डबरी निर्माण ने सिर्फ उनकी आय नहीं बढ़ाई, बल्कि आत्मनिर्भरता की भावना भी जगाई। अब मोहित अपनी जमीन पर गर्व महसूस करते हैं। उनकी मेहनत और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस तरह से किसानों की समस्याओं को समझते हुए ठोस कदम उठाए हैं, वह ग्रामीण विकास का एक बेहतरीन उदाहरण है। डबरी निर्माण जैसी योजनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सही नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति से छोटे किसानों की जिंदगी बदली जा सकती है।
मोहित की डबरी सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि उनके संघर्ष की जीत का प्रतीक है। यह कहानी साबित करती है कि छोटे और प्रभावशाली बदलाव किस तरह से बड़े परिणाम ला सकते हैं। डबरी ने मोहित को न केवल आर्थिक स्थिरता दी, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का तोहफा भी दिया। मोहित की कहानी हर उस किसान के लिए एक प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के बावजूद बेहतर भविष्य का सपना देखता है। यह सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास की भी कहानी है, जहां हर बूंद से खुशहाली की फसल उगाई जा रही है।
सरकार के एक साल पूर्ण होने पर समस्त विभाग एक साल की उपलब्धियों की जानकारी दें: कलेक्टर
एमसीबी । कलेक्टर डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय के सभा कक्ष में साप्ताहिक समय-सीमा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की गई, जिसमें विभागीय महत्वपूर्ण पत्रों, पिछले शिविर के लंबित मुद्दों, डीएमएफ कार्यों की प्रगति तथा आगामी बैठक में शामिल होने वाले प्रस्तावों पर चर्चा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
9 दिसंबर को माननीय मुख्यमंत्री जी का कार्यक्रम चिरमिरी में सम्पन्न हुआ। इसके लिए कलेक्टर ने राजस्व विभाग तथा पुलिस विभाग सहित कार्यक्रम की सहभागिता करने वाले समस्त विभागों को धन्यवाद देते हुए कहा कि सभी के सहयोग से कार्यक्रम गरिमामय पूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ। इसके लिए सभी को बधाई दी। इसके बाद कलेक्टर ने राज्य शासन के एक साल पूर्ण होने पर समस्त विभागों को एक साल की उपलब्धियों की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।
कलेक्टर ने जिले में नगर निगम, नगर पंचायत, नगर परिषद और ग्राम पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए सभी एसडीएम, जनपद सीईओ, सीएमओ और तहसीलदारों को निर्देशित किया कि सभी मतदान केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करे, इसके अतिरिक्त स्ट्रांग रूम की व्यवस्था, साफ सफाई, पेयजल की व्यवस्था, शौचालय की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। उन्होंने विधायक निधि को कार्यों को प्राथमिकता के साथ प्रारम्भ करने के निर्देश दिये। उन्होंने ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि से बनने वाले गोदाम की जानकारी लेते हुए गोदामों के लिए जमीन का चिन्हांकन करने के निर्देश दिये।
श्रम विभाग को कम दाम में मजदूरों को खाना उपलब्ध कराने कैंटिन संचालन हेतु बड़ी बाजार और जनकपुर में अस्पताल के सामने चिन्हाकित स्थानों का प्रस्ताव तैयार कर भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने पशु विकास विभाग को केल्हारी में बकरी पालन तथा मनेंद्रगढ़ में पोल्ट्री फार्म हेतु जमीन का चिन्हांकन जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को जानकारी भेजने के निर्देश दिये। जल जीवन मिशन के तहत कलेक्टर ने शत्-प्रतिशत पूर्ण हुए गांवों की जानकारी लेते हुए जनपद सीईओ को भ्रमण के दौरान रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है। कि जिन गांवों में एफएचटीसी के कार्य गुणवत्तापूर्ण हुए हैं या नहीं।
जल संसाधन विभाग को निर्देश देते हुए उन्होंने जिले के समस्त बांध एवं जलाशयों का भ्रमण कर कितने स्थानों पर नहरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है और कितने स्थानों पर नहर का उपयोग नहीं हो रहा है उसकी जानकारी एक माह के अंदर प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। कलेक्टर ने 17 प्लस उम्र के बच्चों का शत्-प्रतिशत आयुष्मान कार्ड बनाये जाने हेतु चिकित्सा विभाग को अन्य विभागों से समन्वय स्थापित कर आयुष्मान कार्ड पूर्ण करने के निर्देश दिये। कलेक्टर ने निर्देश दिया कि जिन विभागों को भूमि आवंटित हो चुकी है, वे अपनी भूमि पर घेरा बंदी या खूंटा गाड़ने का कार्य शीघ्र पूरा करें। पुराने पेंशन मामलों, कलेक्टर कार्यालय से पीडब्ल्यूडी चौक और पीडब्ल्यूडी से बाजार तक रोड किनारे जितने भी अवैध दुकानें है उसको तत्काल हटाने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने स्कूलों में जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण जल्द से जल्द पूर्ण कराकर प्रमाण पत्र बांटने के लिए कहा इसके अलावा अटल आवास की निर्माण, ट्राइबल मल्टी मार्केटिंग के भूमि आबंटित, प्रधानमंत्री सड़क योजना के द्वारा बन रहे सड़क को पूर्ण करने, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के लिए आवास आबंटन तथा जल शक्ति मिशन में यूजर आईडी लॉगिन और जिओ ट्रैकिंग की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के भी निर्देश दिए। इस बैठक में अपर कलेक्टर अनिल सिदार, संयुक्त कलेक्टर सी.एस. पैकरा, एसडीएम प्रवीण कुमार भगत, तहसीलदार मनेंद्रगढ़, केल्हारी, भरतपुर, कोटाडोल, जनपद सीईओ मनेंद्रगढ़, खड़गवां, भरतपुर, समस्त नगर पंचायत सीएमओ सहित जिले के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
भरतपुर अनुविभाग में 3654 बोरी अवैध धान जब्त
भरतपुर अनुविभाग में धान खरीदी वर्ष 2024-25 के तहत अन्य राज्यों के धान को अनुविभाग के विभिन्न उपार्जन केंद्रों में खपाने की कोशिश की जा रही थी। धान खरीदी 2024-25 की नीति के अनुसार और अवैध धान के खिलाफ राजस्व एवं खाद्य विभाग द्वारा संयुक्त कार्यवाही की गई। इस कार्रवाई के दौरान अनुविभाग से सटे मध्यप्रदेश राज्य से रात में विभिन्न वाहनों में लाए गए कुल 295 बोरी धान को वाहन सहित जब्त कर कुवांरपुर थाना पुलिस चौकी और जनकपुर थाने में सुपुर्द किया गया।
कार्रवाई के इसी क्रम में अन्य राज्य से लाए गए धान को विभिन्न गोदामों और घरों में छुपाकर रखा गया था। संयुक्त दल ने कुल 3359 बोरियों (35-40 किलो प्रति बोरी) को जब्त कर जहां से धान जब्त किया गया, वहीं सुपुर्दगी में दे दिया। इस प्रकार संयुक्त कार्यवाही के अंतर्गत कुल 3654 बोरी धान को अवैध रूप से उपार्जन केंद्रों में खपाने से रोका गया।
यह पूरी कार्यवाही अनुविभागीय अधिकारी (रा.) के निर्देशानुसार तहसीलदार भरतपुर, खाद्य निरीक्षक भरतपुर और खाद्य निरीक्षक कोटाडोल के संयुक्त दल द्वारा अंजाम दी गई।