छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

जनमन प्रधामंत्री न्याय महाभियान में हो रहा गड़बड़ झाला

 जनमन प्रधामंत्री न्याय महाभियान में हो रहा गड़बड़ झाला

जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की शून्य 
 कमीशन से मिलने वाली आर्थिक लाभ पर गिद्द नजर

कवर्धा-  देश के 2011 की जनगणना पर ध्यान रखा जाए तो भारत के 18 राज्य केंद्र शासित प्रदेशों में आदिवासियों का एक समूह करीब 10.45 करोड़ की संख्या में निवास कर रही है उनके माली हालत को देखते हुए संवेदनशीलता के साथ केंद्र की सरकार ने एक न्याय महाभियान चलाकर आवास,स्वच्छता,पेय जल,सड़क, बिजली आदि व्यवस्था देने पर बल दिया है किंतु भ्रष्ट निर्माण एजेंसियां सही तरीके से काम नहीं कर पा रही हैं । उदाहरण के तौर पर 
 
प्रधानमंत्री जनमन योजना की सड़के जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान के अंतर्गत बजाग मुख्य मार्ग मुनमुना से कमराखोल तक बनाई जा रही है जिसमें भी क्रियान्वयन एजेंसी की मिलीभगत से संबंधित ठेकेदार निर्माण कार्य को भ्रष्टाचार के आर्थिक लाभ के चलते अंजाम देने में लगा हुआ है।
 
  समय सीमा में काम पूर्ण नहीं हो रहा पैकेज क्रमांक सी. जी .09 - 136 सड़क की लंबाई 3.50 किलोमीटर की है जिसमें 2.90 km पर डामरीकरण करने की बात कही गई है 0.60km पर सीसी रोड बनाना है। कार्य आरंभ 5-9-2024 को हो गया है जिसे 4-9-2025 को पूर्ण होना है। लागत राशि 225.91 लाख बताई गई है। निष्पादन करने की जिम्मेदारी परियोजना क्रियान्वयन इकाई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना कवर्धा को दी गई है।ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्तीय राशि प्रदान की गई है। जो शासन के द्वारा निर्धारित समय सीमा में पूर्ण होता हुआ दिखाई नही पड़ रहा है।इसका सीधा मतलब है विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम का। कमराखोल को सड़क का लाभ समय पर नही मिलेगा । 
 
 कार्य में भ्रष्टाचार हावी - प्रांकलन के हिसाब से कार्य नही हो रहा है।स्थल पर लगी सूचना फलक में जो बातें लिखी गई है उसका उपयोग नही किया जा रहा है। जितनी मिट्टी, मुरूम,पानी और रोलर से दबाने की बात कही गई है, नहीं किया जा रहा है। चोरी से बिना अनुमति के अबतक मुरूम निकलकर डाला गया है। जांचकर उचित वैधानिक कार्रवाई किया जाना चाहिए।
 
 पुलिया निर्माण में घपला होने की अंदेशा जितनी पुलिया निर्माण की बात कही जा रही है उसमें भी घपला होने की संभावना जताई जा रही है । प्रांकलन के अनुरूप नही बनाया जा रहा है।  सभी बातें सूचना फलक पर लिखा गया है। सड़क निर्माण मुनमुना से कमराखोल तक बनाया जाना है। सड़क निर्माण कार्य पर मुरूम वन विभाग पंडरिया के पहाड़ के किनारे से निकालकर डाला गया है। भूमि राजस्व विभाग की बताई जा रही है। बिना अनुमति खोदाई कर दादागिरी से उपयोग में लाए जाने की बात कही जा सकती है ।एक तरफ वन विभाग पंडरिया का जंगल है दूसरे तरफ वन विकास निगम का जंगल है, मुख्यमार्ग से महज 5 सौ मीटर दूर सब कुछ हो रहा है और राजस्व विभाग के अमला को कोई भनक नही है। 
 
खनिज विभाग अपने दफ्तर में मस्त जिले में खनिज विभाग हैं  स्टॉफ की कमी का रोना रोता है और अपने दफ्तर में बैठे कागजी कार्रवाई में मस्त रहते हैं। उन्हें मालूम है जिले में कितने निर्माण कार्य हो रहे हैं कौन कौन से ठेकेदार के पास कौन सी मटेरियल का अनुमति है। लोगों के शिकायत पर अनसुनी करते हुए पाए जाते हैं। कार्रवाई के नाम पर खाना पूर्ति करना दिखाई पड़ता है। पर्यावरण संरक्षण की दुहाई देने वालों की बात केवल रंगीन दस्तावेजी कागजों में ही सुशोभित हो रही होंगी । ठेकेदार बिना प्रशासनिक व सरकारी अनुमति के भयरहित हो बेखौफ अतिक्रमणकारियों जैसा अपना  साम्राज्य स्थापित कर लिया है । तभी तो जो जहां पाता है वहीं अपने काम को अंजाम दे रहा है।

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