पंडरिया/ कवर्धा-छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना "छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण" के तहत स्वकृत सीसी रोड जो ग्राम पंचायत रोहरा में निर्मित की गई वह सीसी सड़क निर्माण कार्य गुणवत्ता को लेकर गंभीर विवादों में घिर गया है। लगभग 14 लाख 46 हजार रुपये की लागत से निर्मित 330 मीटर लंबी सीसी सड़क कार्य पूर्ण होने के एक वर्ष के भीतर ही जगह-जगह से दरकने, फटने एवं टूटकर टुकड़ों में बिखरने लगी है। सड़क की वर्तमान स्थिति को देखकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत रोहरा में महेश के घर से बस्ती की ओर निर्मित सीसी सड़क में निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग किया गया तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हाफ नदी के मिट्टी मिश्रित रेत एवं अन्य अमानक निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया। इसके अलावा सड़क निर्माण के बाद आवश्यक क्योरिंग (पानी से नियमित तराई) भी पर्याप्त रूप से नहीं कराई गई, जिसके कारण सड़क समय से पहले क्षतिग्रस्त हो गई।
नागरिक सूचना पटल पर अंकित विवरण के अनुसार इस कार्य की तकनीकी स्वीकृति क्रमांक 52 दिनांक 21 अप्रैल 2025 तथा प्रशासकीय स्वीकृति क्रमांक 18811 दिनांक 28 अप्रैल 2025 को प्रदान की गई थी। कार्य की स्वीकृत लागत 14.46 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। निर्माण एजेंसी के रूप में ग्राम पंचायत एवं सरपंच को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कार्य का शुभारंभ 23 मई 2025 को किया गया तथा इसे 7 जुलाई 2025 को पूर्ण दर्शाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने का उद्देश्य तभी सार्थक हो सकता है, जब निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मापदंडों एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किए जाएं। किंतु रोहरा में निर्मित सड़क की स्थिति यह संकेत दे रही है कि निर्माण कार्य में कहीं न कहीं गंभीर अनियमितता एवं लापरवाही बरती गई है।
ग्राम पंचायत रोहरा के कुछ ग्रामीणों ने सरपंच एवं सचिव के कथित दबाव और भय के कारण नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि यदि सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी मानकों की अनदेखी की गई, जिससे सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका भी उत्पन्न हो रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि मामले की जांच हेतु स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए तथा सड़क निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और भुगतान संबंधी अभिलेखों की सूक्ष्मता से जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे जनहित में व्यापक जनआंदोलन एवं धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन ग्रामीणों की शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हुए इस बहुचर्चित निर्माण कार्य की जांच कराता है अथवा मामला केवल शिकायतों तक ही सीमित रह जाता है। फिलहाल सड़क की जर्जर स्थिति ग्रामीण विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।