छत्तीसगढ़ / बस्तर

पुनर्वास से आत्मनिर्भरता की ओर बीजापुर के पुर्नवासितों ने जाना बस्तर का इतिहास और संस्कृति

 जगदलपुर ।

  बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लौटकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए तथा वर्तमान में नुआ बाट पुनर्वास केंद्र में निवासरत पुर्नवासितों के लिए रविवार का दिन अत्यंत प्रेरणादायक और विशेष रहा। केंद्र में पिछले ढाई महीनों से वेल्डिंग का व्यावसायिक कौशल सीख रहे इन युवाओं को आज जिला प्रशासन की विशेष पहल पर बस्तर के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का शैक्षणिक व अध्ययन भ्रमण कराया गया।

        इस शैक्षणिक भ्रमण की पृष्ठभूमि जिला पंचायत बस्तर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  तन्मय खन्ना के नुआ बाट पुनर्वास केंद्र के प्रथम निरीक्षण के दौरान बनी थी, जब हितग्राहियों ने उनसे संवाद करते हुए अंचल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थानों को देखने तथा करीब से समझने की इच्छा जताई थी। युवाओं की इस जिज्ञासा और सकारात्मक सोच को सम्मान देते हुए कलेक्टर  आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज बस्तर द्वारा इस भ्रमण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

        दिनभर चले इस भ्रमण के दौरान हितग्राहियों को बस्तर की पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरू होने का अवसर मिला। उन्होंने माँ दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया, तत्पश्चात बस्तर राजमहल और ऐतिहासिक दलपत सागर की प्राकृतिक सुंदरता व इतिहास को जाना। इसके अलावा युवाओं ने भारत का नियाग्रा कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का आनंद लिया और माँ दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचकर बस्तर के आधुनिक विकास व कनेक्टिविटी की रफ्तार को करीब से देखा।

       यह भ्रमण हितग्राहियों के लिए केवल एक यात्रा न होकर एक अत्यंत सकारात्मक और अविस्मरणीय अनुभव साबित हुआ। पुनर्वास केंद्र में अर्जित वेल्डिंग कौशल, अनुशासन और इस प्रकार के व्यावहारिक अनुभवों के बल पर ये युवा अब समाज की मुख्यधारा में अपनी सशक्त भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। प्रशासन को पूर्ण विश्वास है कि ये हितग्राही आत्मनिर्भर बनकर न केवल अपने जीवन में एक नया अध्याय शुरू करेंगे, बल्कि आंचल के अन्य भटके हुए युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभरेंगे।

 

 

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