उदंती-सीतानदी में शुरू हुआ स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम -एआई तकनीक से वन और वन्यजीवों की 24X7 निगरानी
हाथी-बाघ सुरक्षा और वन अपराधों पर लगेगी लगाम
- धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
- अशोक कुमार चंद्रवंशी
सहायक जनसंपर्क अधिकारी
रायपुर, 8 अगस्त 2026


स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम एक उन्नत सुरक्षा निगरानी तकनीक है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और क्लाउड कंप्यूटिंग का उपयोग करती है। पारंपरिक सीसीटीवी के विपरीत, यह केवल रिकॉर्डिंग नहीं करता, बल्कि असामान्य गतिविधियों, चेहरे और संदिग्ध हरकतों को पहचानकर वास्तविक समय में अलर्ट भेजता है। एआई (AI) तकनीक वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही है। यह तकनीक कैमरा ट्रैप, ड्रोन और सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके जानवरों की गिनती, अवैध शिकार और वनों की कटाई की वास्तविक समय में पहचान करने में मदद करती है
छत्तीसगढ़ सरकार वन और वन्यजीव संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों का तेजी से उपयोग कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है। यह व्यवस्था वन्यजीवों की सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम और वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ऊंचे टावरों से जंगलों पर 24 घंटे नजर
इस परियोजना के तहत 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर एआई कैमरे और पीयर-टू-पीयर (पी2पी) वायरलेस सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की मदद से दूरस्थ और दुर्गम जंगलों में भी चौबीसों घंटे निगरानी की जा सकेगी।
संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रायल शुरू
स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल कुल्हाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलीखण्ड उत्तर उदंती रेंज में किया जा रहा है। ये क्षेत्र हाथियों और अन्य वन्यजीवों के प्रमुख आवागमन मार्ग हैं और अवैध शिकार, लकड़ी तस्करी तथा अतिक्रमण की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। शिकारी गतिविधियों और पेड़ों की अवैध कटाई की आवाज़ सुन कर तुरंत अलर्ट भेजेगा।
एआई कैमरे करेंगे वन्यजीवों की स्वतः पहचान
इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एआई कैमरे हाथी, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे प्रमुख वन्यजीवों की स्वतः पहचान कर सकेंगे। साथ ही शिकारी, लकड़ी तस्कर और अवैध घुसपैठ जैसी संदिग्ध गतिविधियों का भी तुरंत पता लगा सकेंगे। बाघ या हाथियों के रिहायशी इलाकों के पास आने पर वन विभाग को तुरंत सूचना देगा।