केविके बेमेतरा में TCBT प्राकृतिक खेती तकनीक पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला
60 से अधिक प्रगतिशील कृषकों ने लिया प्रशिक्षण, प्राकृतिक खेती की तकनीकों और कम लागत वाले कृषि आदानों की दी गई जानकारी
बेमेतराअगस्त 2026
कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा में किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से ताराचंद बेलजी तकनीक (TCBT) प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों, प्राकृतिक कृषि आदानों के निर्माण एवं उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक कीट प्रबंधन तथा कम लागत में टिकाऊ कृषि उत्पादन के संबंध में किसानों को विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस श्री ताराचंद बेलजी ने TCBT प्राकृतिक खेती तकनीक की अवधारणा एवं इसके व्यावहारिक पहलुओं पर किसानों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने पतवार रसायन के संबंध में जानकारी देते हुए इसके निर्माण, उपयोग की विधि तथा फसलों में प्रयोग से संबंधित तकनीकी जानकारी साझा की। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कीट विज्ञान विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर ने प्राकृतिक खेती में जैविक एवं प्राकृतिक उपायों से कीट प्रबंधन तथा फसल सुरक्षा के संबंध में वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की। TCBT प्रशिक्षक श्री रविकांत साहू ने विभिन्न प्राकृतिक कृषि आदानों की प्रायोगिक विधि एवं उपयोग की जानकारी देते हुए अन्न द्रव्य रसायन के बारे में विस्तार से समझाया। वहीं TCBT विशेषज्ञ श्री रणवीर ने प्राकृतिक खेती में उपयोग की जाने वाली विभिन्न तकनीकों, विशेष रूप से जैव रसायन तथा खेत स्तर पर इनके उपयोग की जानकारी किसानों को दी।
कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री तोषण कुमार ठाकुर ने किसानों को प्राकृतिक खेती में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों के उपयोग से कृषि की उत्पादन लागत को कम करने के साथ-साथ किसानों की आय और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक कृषि इनपुट तैयार करने, मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने, प्राकृतिक तरीके से कीट प्रबंधन करने तथा फसल उत्पादन में स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग के संबंध में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बेमेतरा जिले के जैविक एवं प्राकृतिक खेती से जुड़े 60 से अधिक प्रगतिशील कृषक शामिल हुए। किसानों ने TCBT तकनीक एवं अपने प्रक्षेत्रों से संबंधित समस्याओं और जिज्ञासाओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखा तथा उनके तकनीकी समाधान की जानकारी प्राप्त की। तकनीकी सत्र का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डोमन सिंह टेकाम एवं डॉ. रजनी डी. अगाशे ने किया।
कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों का किया अवलोकन
प्रशिक्षण उपरांत अतिथियों एवं किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र के प्रदर्शनी कक्ष का अवलोकन किया। यहां प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों, जिले के प्रगतिशील किसानों द्वारा किए जा रहे नवाचारों तथा केविके द्वारा संचालित प्राकृतिक खेती इकाई, बीज उत्पादन इकाई, हाईटेक नर्सरी एवं मछली पालन इकाई सहित विभिन्न गतिविधियों का भ्रमण किया गया। अतिथियों एवं किसानों ने केविके द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के संबंध में आवश्यक सुझाव भी दिए।
प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान अतिथियों द्वारा प्राकृतिक खेती में उपयोगी कृषि आदानों के लिए बहुउपयोगी वृक्षों का पौधारोपण किया गया। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र में TCBT तकनीक के प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थल का निरीक्षण एवं चयन भी किया गया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र जोशी, डॉ. लव, डॉ. चंद्रशेखर खरे तथा कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री व्ही.के. टंडन सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।