कलेक्टर के निर्देश बेअसर, सड़कों पर फिर मवेशियों का कब्जा
कबीरधाम |
2026-08-20 12:46:56
विकाश शुक्ला
कवर्धा। कबीरधाम जिले में प्रशासनिक निर्देशों के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर गोपाल वर्मा द्वारा सड़कों पर आवारा मवेशियों की समस्या को नियंत्रित करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद जिले के प्रमुख मार्गों पर हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। मवेशियों के झुंड खुलेआम सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
ताजा मामला राजनांदगांव रोड पर मैनपुरी के करीब का है, जहां मवेशियों का झुंड सड़क पर ही डेरा जमाए नजर आया। सड़क पर बेखौफ घूमते पशुओं को देखकर ऐसा लगता है कि मानो उन्होंने सड़क को ही अपना आशियाना बना लिया हो। सवाल यह है कि जब कलेक्टर के निर्देश जारी हो चुके हैं तो जिम्मेदार विभाग उन निर्देशों को जमीन पर उतारने में आखिर नाकाम क्यों हैं।
कुछ दिन पूर्व भागुटोला के पास सड़क दुर्घटना में कुछ मवेशियों की मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया था। घटना से नाराज स्थानीय नागरिकों ने करीब पांच घंटे तक चक्काजाम किया था। इसके चलते आम लोगों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उस घटना के बाद प्रशासन से उम्मीद थी कि सड़कों पर मवेशियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, लेकिन ताजा तस्वीरें व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही हैं।
आदेश जारी होते हैं, लेकिन पालन कौन करवाएगा
मवेशियों के सड़कों पर खुलेआम घूमने का मामला कोई नया नहीं है। बार-बार घटनाएं सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अमला प्रभावी कार्रवाई करने में असफल दिखाई दे रहा है। यदि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
जिले में केवल मवेशियों का मामला ही नहीं है। पूर्व में कलेक्टर द्वारा निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसी तरह नगर पालिका के सामने निर्माणाधीन चौपाटी को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन काम की गति को लेकर भी स्थिति संतोषजनक नजर नहीं आती।
कागजों में निर्देश, सड़कों पर पुरानी तस्वीर
प्रशासनिक व्यवस्था में निर्देश जारी करना अपनी जगह है, लेकिन उन निर्देशों का पालन करवाना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। यदि अधिकारी आदेश जारी करते रहें और जिम्मेदार विभाग उसे अमल में न लाएं तो ऐसे निर्देश महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाते हैं।
कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी यह सवाल खड़ा कर रही है कि जिम्मेदारी तय करने और निगरानी की व्यवस्था आखिर कहां है। अब जरूरत नए निर्देश जारी करने की नहीं, बल्कि पुराने निर्देशों के पालन की समीक्षा कर लापरवाही बरतने वालों पर जवाबदेही तय करने की है।