छत्तीसगढ़ / रायपुर

वर्षावास का हृदय है पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व : मुनि संवेगरत्न सागर

 रायपुर । विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास में  सोमवार को मुनि संवेगरत्न सागर ने पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की महत्ता बताई। मुनिश्री ने कहा कि पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व वर्षावास का हृदय है। यह पर्व  बाहरी गतिविधियों से विराम लेकर अपने भीतर झांकने और आत्मशुद्धि का अवसर देता है।

मुनिश्री ने कहा कि पर्युषण के दिनों में हमें अपने अनावश्यक उपक्रमों और प्रवृत्तियों को विराम देने का पुरुषार्थ करना चाहिए। पर्युषण हमें इन प्रवृत्तियों से हटकर आत्मचिंतन और साधना की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। आत्मा को निर्मल करने और पुण्य को बढ़ाने का अवसर पर्वाधिराज पर्युषण लेकर आ रहा है। इन दिनों में तप, त्याग, संयम, स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण और धर्माराधना के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। इसे आत्मनिरीक्षण और आत्मपरिवर्तन का पर्व बनाएं। अपने दोषों को पहचानकर उन्हें दूर करने तथा जीवन में संयम और सदाचार को अपनाने का संकल्प लें।

विवेकानंद नगर में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व में बिखरेगा भक्ति का रंग
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया ने कहा कि आत्मशुद्धि के महापर्व पर्वाधिराज पर्युषण का शुभारंभ 8 सितंबर से होगा। 15 सितंबर तक इस महापर्व में विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास में भक्ति का रंग बिखरेगा।  पर्वाधिराज पर्युषण के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक -श्राविकाएं धर्म, तप, संयम और आत्मचिंतन की साधना में लीन रहेंगे। विवेकानंद स्थित संभवनाथ जिनालय में विशेष पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।

प्रतिदिन नयनाभिराम आंगी से सजेगा परमात्मा का दरबार
चातुर्मास समिति के महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अवसर पर प्रतिदिन परमात्मा की नयनाभिराम आंगी सजाई जाएगी। आकर्षक एवं मनोहारी आंगी के विशेष दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचेंगे। परमात्मा की भव्य आंगी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। महापर्व के दौरान प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन, पूजा, सामायिक, प्रतिक्रमण, तप-साधना और स्वाध्याय सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुनिभगवंतों द्वारा आत्मकल्याण, संयम और अहिंसा का संदेश दिया जाएगा। 15 सितंबर को सवत्सरी महापर्व (क्षमायाचना) के साथ पर्यूषण महापर्व का समापन होगा। अंतिम दिन हजारों की संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपवास रहेंगे। 16 सितंबर को पारणा होगा। पर्यूषण महापर्व के दौरान प्रतिदिन सुबह एवं शाम प्रतिक्रमण होगा। संभवनाथ जिनालय में प्रतिदिन दोपहर परमात्मा की आंगी सजाई जाएगी।

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