’सेवा की कहानी’ : ’सेवा संकल्प से आत्मनिर्भरता की ओर- मत्स्य पालन ने बंजारीडांड की महिलाओं को दी नई आर्थिक राह’
कोरिया, 25 सितंबर 2026
सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य शासकीय योजनाओं के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। कोरिया जिले के बंजारीडांड गांव की साक्षर भारत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सफलता इसी संकल्प की एक प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
समूह की अध्यक्ष श्रीमती जानकी साहू के नेतृत्व में समूह की 10 महिलाओं ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए कृषि कार्य के साथ मत्स्य पालन को अतिरिक्त आजीविका के रूप में अपनाया। पहले समूह की महिलाएं मुख्य रूप से गृहकार्य एवं कृषि कार्य पर निर्भर थीं। कृषि से सीमित आय होने के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई होती थी। ऐसे में महिलाओं ने सामूहिक प्रयास से आय का नया साधन विकसित करने का निर्णय लिया।
समूह ने अपने गांव के शासकीय तालाब को 10 वर्षीय पट्टे पर लेकर मत्स्य पालन शुरू किया। मत्स्य पालन विभाग की मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत समूह को आवश्यक सहयोग प्राप्त हुआ। विभाग द्वारा 01 नग आइस-बॉक्स 6,000 तथा 01 नग महाजाल 10,000 शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा 40 पैकेट मत्स्य बीज, जिसकी राशि 5,600 है, 50 प्रतिशत अनुदान पर प्रदान किया गया।
योजना से प्राप्त संसाधनों ने समूह की महिलाओं को मत्स्य पालन की गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद की। कम लागत में मत्स्य बीज और आवश्यक उपकरण उपलब्ध होने से महिलाओं के लिए नई आजीविका गतिविधि शुरू करना आसान हुआ।
’आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा’
मत्स्य पालन को कृषि के साथ जोड़ने का सकारात्मक असर समूह की आय पर भी दिखाई दिया। योजना से पहले समूह की अनुमानित आय लगभग 8,500 रुपये प्रतिमाह यानी 1.02 लाख रुपये वार्षिक थी, जो अब बढ़कर लगभग 21,000 प्रतिमाह यानी 2.52 लाख रुपये वार्षिक हो गई है। इस तरह समूह की आय में लगभग 2.5 गुना वृद्धि हुई है।
आय बढ़ने से समूह की महिलाएं अपनी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हुई हैं। आर्थिक मजबूती के साथ उनके सामाजिक स्तर और जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे केवल कृषि पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि मत्स्य पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।
हितग्राही का कथन श्रीमती जानकी साहू, अध्यक्ष, साक्षर भारत स्वयं सहायता समूह, बंजारीडांड ने कहा “पहले हमारी आय मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करने में कई बार कठिनाई होती थी। मत्स्य पालन को आजीविका से जोड़ने के बाद हमारी आय में अच्छा इजाफा हुआ है। विभाग से मत्स्य बीज, महाजाल और आइस-बॉक्स मिलने से हमें बहुत मदद मिली। आज समूह की महिलाएं मिलकर काम कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।”
सेवा से सशक्तिकरण, जनभागीदारी से बदलाव
बंजारीडांड की महिलाओं की यह पहल सेवा संकल्प अभियान के उस उद्देश्य को रेखांकित करती है, जिसमें शासकीय योजनाओं के माध्यम से लोगों को संसाधन और अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें अपने विकास का सहभागी बनाया जा रहा है। विभागीय सहयोग और समूह की महिलाओं की मेहनत व सामूहिकता ने आजीविका के एक नए अवसर को आर्थिक मजबूती में बदल दिया है।