छत्तीसगढ़ / धमतरी

सेवा संकल्प अभियान :सेवा की कहानी: गांव की मिट्टी से वैश्विक मंच तक : दीपक गौराहा ने विद्यार्थियों को सुनाई सफलता की कहानी

 कृषि विद्यार्थियों को मिला सपनों को उड़ान देने का संदेश

धमतरी, 28 सितंबर 2026

कृषि विद्यार्थियों को मिला सपनों को उड़ान देने का संदेश

किसी गांव की पगडंडी से शुरू हुआ सफर जब दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है, तो वह केवल सफलता की कहानी नहीं रहता, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद बन जाता है, जो अपनी परिस्थितियों से आगे बढ़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं। ऐसी ही प्रेरक कहानी सोमवार को कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद के विद्यार्थियों ने सुनी। अवसर था सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित “गांव के सपनों से वैश्विक नेतृत्व तक” विषयक प्रेरणादायी व्याख्यान का।

कार्यक्रम में बीएएसएफ के उद्योग प्रबंधक श्री दीपक गौराहा ने विद्यार्थियों के सामने अपनी जीवन और व्यावसायिक यात्रा के अनुभव रखे। बिलासपुर के एक गांव से निकलकर कृषि शिक्षा प्राप्त करने वाले श्री गौराहा ने अपने ज्ञान, निरंतर सीखने की इच्छा और मेहनत के बल पर अंतरराष्ट्रीय कार्यक्षेत्र में पहचान बनाई। आज वे बीएएसएफ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड एवं फिजी में उद्योग प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं।

जब गांव का सपना बना वैश्विक पहचान

श्री गौराहा ने विद्यार्थियों को बताया कि सपनों की शुरुआत परिस्थितियों को देखकर नहीं, बल्कि अपनी संभावनाओं को पहचानकर होती है। गांव से निकलने के बाद शिक्षा और करियर के दौरान उन्होंने अनेक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन सीखने की प्रक्रिया को कभी रुकने नहीं दिया। कृषि शिक्षा को उन्होंने केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि इसे नए अवसरों को समझने और अपने कौशल को विकसित करने का आधार बनाया।

उनकी कहानी सुनते हुए विद्यार्थियों के सामने कृषि शिक्षा का एक नया स्वरूप उभरा—जहां खेत और प्रयोगशाला के साथ-साथ उद्योग, प्रबंधन, तकनीक, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय अवसरों की दुनिया भी मौजूद है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि “बड़े सपने देखिए, जिज्ञासु बने रहिए, लगातार सीखते रहिए और अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास करते रहिए।”

सफलता के पीछे निरंतर सीखने की आदत

श्री गौराहा ने विद्यार्थियों से अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज के समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। बदलती दुनिया के साथ स्वयं को लगातार अपडेट करना जरूरी है। नई तकनीक सीखना, अपने विषय की गहरी समझ विकसित करना, संवाद कौशल बढ़ाना और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से सीखना युवा जीवन की महत्वपूर्ण पूंजी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीखने की सलाह दी। उनका कहना था कि हर चुनौती व्यक्ति को कुछ नया सिखाती है। सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति अपनी दिशा स्वयं तय कर सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को नकारात्मक सोच और नकारात्मक संगति से दूर रहने तथा ऐसे लोगों के साथ जुड़ने की सलाह दी, जो उन्हें सीखने, आगे बढ़ने और बेहतर करने के लिए प्रेरित करें।

कृषि की कक्षा से स्टार्टअप और उद्योग तक

व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण पहलू कृषि के बदलते स्वरूप को समझना भी रहा। श्री गौराहा ने बताया कि कृषि अब केवल उत्पादन तक सीमित क्षेत्र नहीं है। कृषि अनुसंधान, एग्री-बिजनेस, कृषि प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, कृषि तकनीक, ड्रोन, डिजिटल एग्रीकल्चर, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार जैसे अनेक नए क्षेत्र युवाओं के लिए खुले हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा को व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ने और अवसरों की तलाश करने के बजाय अवसर पैदा करने की सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

नौकरी तलाशने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें

कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री मनोज सागर ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के व्यापक आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से कृषि को केवल नौकरी का माध्यम नहीं, बल्कि व्यवसाय, उद्यमिता और रोजगार सृजन का क्षेत्र बनाने की दिशा में सोचने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े युवा उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन, तकनीकी सेवाओं और अन्य मूल्यवर्धित गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं। इससे वे स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर सकते हैं।

विद्यार्थियों के मन में जगी नई संभावनाएं

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्रेरणा उन्हें किसी किताब या भाषण से नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की वास्तविक जीवन यात्रा से मिली, जिसने गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय कार्यक्षेत्र तक का सफर तय किया है।

श्री दीपक गौराहा की कहानी ने विद्यार्थियों के सामने यह विश्वास रखा कि संसाधनों की सीमाएं सपनों की सीमा नहीं होतीं। सही दिशा में शिक्षा, निरंतर सीखने की आदत, सकारात्मक सोच और मेहनत के साथ गांव का युवा भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।

कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद के अधिष्ठाता डॉ. नवनीत राणा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, नवाचार और उद्यमशील सोच विकसित करना रहा।

सेवा संकल्प अभियान के इस आयोजन ने विद्यार्थियों को केवल करियर के विकल्पों की जानकारी नहीं दी, बल्कि उनके भीतर एक बड़ा सवाल भी जगाया—“मैं अपनी शिक्षा और प्रतिभा से अपने लिए ही नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए क्या कर सकता हूं?”

यही इस प्रेरणादायी कहानी की सबसे बड़ी सीख रही कि गांव की मिट्टी से जुड़े रहकर भी सपनों की उड़ान वैश्विक हो सकती है। कृषि शिक्षा से निकला युवा केवल अपना भविष्य नहीं संवार सकता, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से गांव, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के भविष्य को भी नई दिशा दे सकता है।

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