*दुनिया में बढ़ रहा कैंसर का बोझ, भारत में भी रोकथाम बड़ी चुनौती*
2026-09-26 12:15:21
*दुनिया में बढ़ रहा कैंसर का बोझ, भारत में भी रोकथाम बड़ी चुनौती*
*ACTREC विशेषज्ञ बोले—शुरुआती पहचान से बेहतर हो सकते हैं उपचार के नतीजे, तंबाकू नियंत्रण पर जोर*
मुंबई: कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच बीमारी की देर से पहचान सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने के लिए रोकथाम, समय पर जांच, शुरुआती निदान और जन-जागरूकता को मजबूत करना जरूरी है। यह बात टाटा मेमोरियल सेंटर के एडवांस्ड सेंटर फॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर (ACTREC) के विशेषज्ञों ने छत्तीसगढ़ से आए पत्रकारों के साथ संवाद के दौरान कही।
ACTREC के निदेशक डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि कैंसर नियंत्रण केवल अस्पतालों और उपचार तक सीमित नहीं रह सकता। इसकी रोकथाम की शुरुआत समुदाय स्तर से करनी होगी। उन्होंने तंबाकू से होने वाले नुकसान, स्वस्थ जीवनशैली, टीकाकरण, उपयुक्त स्क्रीनिंग और समय पर चिकित्सकीय परामर्श के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैंसर का बोझ लगातार बढ़ रहा है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया में करीब 2 करोड़ नए कैंसर मामले और 97 लाख कैंसर से मौतें दर्ज हुईं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मौजूदा रुझान जारी रहने पर वर्ष 2050 तक दुनिया में हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या 3.5 करोड़ से अधिक हो सकती है।
भारत में भी कैंसर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। IARC के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में करीब 14.1 लाख नए कैंसर मामले और 9.17 लाख मौतें हुईं। देश में महिलाओं और पुरुषों में कैंसर के अलग-अलग प्रकार प्रमुख हैं, जिनमें स्तन कैंसर, होंठ एवं मुख गुहा का कैंसर तथा सर्वाइकल कैंसर प्रमुख रूप से सामने आते हैं।
ACTREC के उप निदेशक डॉ. नवीन खत्री ने कहा कि कैंसर की देर से पहचान इसके नियंत्रण की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। कई प्रकार के कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलने पर उपचार अधिक प्रभावी होता है। इसलिए लोगों में जागरूकता और उपयुक्त मामलों में नियमित स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों ने कहा कि कैंसर को केवल उपचार की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे के रूप में देखने की आवश्यकता है। कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को ज्ञात कारणों को नियंत्रित करके कम किया जा सकता है, जबकि कुछ कैंसर की समय पर स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान से उपचार की संभावना बेहतर हो जाती है।
तंबाकू कैंसर के प्रमुख रोकथाम योग्य जोखिम कारकों में शामिल है। विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में कैंसर के एक बड़े हिस्से का संबंध तंबाकू सेवन से है। तंबाकू का सेवन मुख गुहा, फेफड़े और कई अन्य प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। इसलिए तंबाकू नियंत्रण और इसके दुष्प्रभावों के प्रति जन-जागरूकता कैंसर की रोकथाम की महत्वपूर्ण कड़ी है।
विशेषज्ञों ने सर्वाइकल कैंसर को रोकथाम और शुरुआती हस्तक्षेप की प्रभावशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। HPV टीकाकरण, उपयुक्त स्क्रीनिंग और कैंसर-पूर्व अवस्था में समय पर उपचार से इस बीमारी के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।
WHO के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर दुनिया में महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसर में शामिल है। वर्ष 2022 में इसके करीब 6.6 लाख नए मामले और 3.5 लाख मौतें हुईं। WHO ने टीकाकरण, स्क्रीनिंग और उपचार के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने का वैश्विक लक्ष्य रखा है।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि हर प्रकार के कैंसर के लिए व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग प्रभावी नहीं होती। जिन कैंसर के लिए प्रभावी स्क्रीनिंग पद्धतियां उपलब्ध हैं, उनमें उनका उचित उपयोग महत्वपूर्ण है। वहीं, अन्य कैंसर के मामले में लगातार बने रहने वाले या असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज न कर समय पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली को भी कैंसर के बदलते स्वरूप से जोड़ा। शहरीकरण, शारीरिक गतिविधि में कमी, खान-पान में बदलाव, तंबाकू सेवन और अन्य जोखिम कारक कैंसर के स्वरूप को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में भारत में कैंसर का बढ़ता बोझ देखते हुए समुदाय स्तर पर रोकथाम और जागरूकता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
ACTREC विशेषज्ञों ने कहा कि कैंसर नियंत्रण के लिए रोकथाम, आवश्यकतानुसार टीकाकरण, उपयुक्त स्क्रीनिंग, शुरुआती निदान, प्रमाण-आधारित उपचार और जन-जागरूकता को एक साथ आगे बढ़ाना होगा।
छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने प्रेस टूर के दौरान ACTREC का दौरा किया। इस दौरान उन्हें कैंसर महामारी विज्ञान, रोकथाम, सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों और अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने तंबाकू से जुड़े कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, स्क्रीनिंग, ग्रामीण-शहरी अंतर और कैंसर उपचार तक पहुंच से जुड़े पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिए।
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