छत्तीसगढ़ / बस्तर

बाढ़ के बाद महामारी और मानसिक तनाव से निपटने विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य विभाग उतरा मैदान में

 राहत शिविरों का लिया सघन जायजा

जगदलपुर, 01 अक्टूबर 2026

बस्तर जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलजनित बीमारियों की रोकथाम और पीड़ितों तक त्वरित स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग और विश्व स्वास्थ्य संगठन की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाल लिया है। इसी कड़ी में बुधवार को संयुक्त दल ने जगदलपुर के विभिन्न जलमग्न गांवों, मोहल्लों और राहत शिविरों का सघन दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं की धरातलीय स्थिति की समीक्षा की। इस निरीक्षण दल में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक, विश्व स्वास्थ्य संगठन राज्य कंसलटेंट डॉ. उरिया नाग, डीपीएम डॉ. रीना लक्ष्मी तथा जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सी. मैत्री शामिल रहे।
संयुक्त टीम ने विकासखंड नानगुर के भेजापदर, आयुष्मान आरोग्य मंदिर उलनार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मालगांव और ग्राम तुरेनार का दौरा किया। भेजापदर में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरएस भंवर की उपस्थिति में संचालित राहत शिविर का मुआयना करते हुए पीड़ितों को मिल रहे उपचार और दवाओं की उपलब्धता की पड़ताल की गई। वहीं उलनार स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में संस्थागत प्रसव एवं नियमित ओपीडी सेवाएं सुचारू रूप से संचालित पाई गईं और वहां आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर की भी जांच की गई। मालगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को फौरन पूरी तरह दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए गए। तुरेनार में आयोजित स्वास्थ्य शिविर के दौरान स्थानीय सरपंच हेमवती की मौजूदगी में ग्रामीणों से संवाद किया गया, जहां ग्रामीणों ने नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच और आवश्यक दवाएं मिलने की बात कही।
निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने स्पष्ट किया कि आपदा की इस घड़ी में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी केवल बीमारियों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों को मानसिक संबल देना और महामारी से बचाना भी उतना ही अनिवार्य है। उन्होंने मैदानी अमले को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि ग्रामीणों को पानी उबालकर पीने के लिए जागरूक किया जाए तथा मितानिनों के माध्यम से घर-घर क्लोरीन की गोलियां और पेयजल स्रोतों के शुद्धिकरण हेतु ब्लीचिंग पाउडर का सघन वितरण सुनिश्चित हो। इसके साथ ही शिविरों में डायरिया, त्वचा रोग, मौसमी संक्रमण की दवाओं सहित सर्पदंश के त्वरित इलाज के लिए एंटी-स्नेक वेनम, ओआरएस और जिंक का पर्याप्त बैकअप बनाए रखने तथा जलजमाव वाले स्थानों पर एंटी-लार्वल छिड़काव तेज करने के निर्देश दिए गए।
डॉ. बसाक ने विशेष रूप से जोर देकर कहा कि बाढ़ की विभीषिका से भय, चिंता और तनाव से जूझ रहे ग्रामीणों को मनोसामाजिक सहयोग और विशेष काउंसलिंग दी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया जाए। निरीक्षण के अंत में अधिकारियों ने विषम परिस्थितियों में भी मुस्तैदी से सेवा दे रहे स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण की सराहना करते हुए इसी निष्ठा के साथ कार्य जारी रखने के लिए उनका उत्साहवर्धन किया।

Leave Your Comment

Click to reload image