कोटवार नियुक्ति को लेकर बोधापारा में विवाद गहराया 25 जुलाई को देवचंद खाण्डेकर के पक्ष में प्रस्ताव, 10 सितंबर को गेंदलाल बर्मन के पक्ष में प्रस्ताव होने की चर्चा; ग्रामीणों ने कलेक्टर जनदर्शन में लगाई न्याय की गुहार
मुंगेली |
2026-10-07 16:11:59
मुंगेली। ग्राम बोधापारा में कोटवार पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद अब कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंच गया है। कोटवार नियुक्ति की प्रक्रिया में कथित अनियमितता और प्रस्तावों को लेकर ग्रामीणों के बीच असंतोष सामने आया है। ग्रामवासियों के एक समूह ने 6 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत कर नव नियुक्त कोटवार देवचंद खाण्डेकर की नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने तथा मामले की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। जनदर्शन में प्रस्तुत आवेदन का टोकन क्रमांक 19497 बताया गया है।
ग्रामीणों की शिकायत का मुख्य आधार ग्राम पंचायत स्तर पर कोटवार नियुक्ति के लिए तैयार किए गए प्रस्तावों को लेकर है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि देवचंद खाण्डेकर के पक्ष में तैयार किए गए प्रस्ताव की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इसकी जानकारी ग्रामसभा में मौजूद सभी ग्रामीणों तथा संबंधित लोगों को नहीं दी गई। वहीं अब ग्रामीणों की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि बाद में 10 सितंबर 2026 को गेंदलाल बर्मन के पक्ष में भी प्रस्ताव पारित किया गया। ऐसे में एक ही पद को लेकर अलग-अलग समय पर सामने आए प्रस्तावों ने विवाद को और गंभीर बना दिया है।
25 जुलाई के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल
ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में 25 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत बोधापारा में हुई ग्रामसभा का उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार उस बैठक में ग्रामवासी, पंचगण, सरपंच और सचिव सहित संबंधित लोग मौजूद थे।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा के दौरान कोटवार पद के लिए प्रस्ताव तैयार करने को लेकर चर्चा हुई थी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उस समय सरपंच द्वारा किसी एक व्यक्ति के पक्ष में व्यक्तिगत प्रस्ताव तैयार करने से इनकार किए जाने की बात कही गई थी।
इसके बाद देवचंद खाण्डेकर के पक्ष में प्रस्ताव तैयार किए जाने की जानकारी सामने आने का ग्रामीणों ने दावा किया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि 25 जुलाई को देवचंद खाण्डेकर के पक्ष में प्रस्ताव तैयार किया गया था तो उसकी जानकारी ग्रामसभा में मौजूद सभी ग्रामीणों और संबंधित दावेदारों को क्यों नहीं दी गई, यह जांच का विषय है।
10 सितंबर को गेंदलाल बर्मन के पक्ष में प्रस्ताव का दावा
मामले में नया मोड़ तब सामने आया जब ग्रामीणों की ओर से दावा किया गया कि 10 सितंबर 2026 को गेंदलाल बर्मन के पक्ष में भी ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित किया गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 25 जुलाई 2026 को देवचंद खाण्डेकर के पक्ष में प्रस्ताव तथा 10 सितंबर 2026 को गेंदलाल बर्मन के पक्ष में प्रस्ताव होने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन दोनों प्रस्तावों की वास्तविक स्थिति, उनकी प्रमाणित प्रतियां, बैठक की कार्यवाही और प्रस्ताव रजिस्टर में दर्ज विवरण की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पंचायत अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
यही वजह है कि ग्रामीण अब प्रशासन से ग्राम पंचायत की मूल कार्यवाही रजिस्टर, प्रस्ताव रजिस्टर और संबंधित बैठकों के दस्तावेज मंगाकर जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
एक ही पद के लिए दो अलग-अलग प्रस्तावों से बढ़ा विवाद
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अलग-अलग तारीखों में अलग-अलग व्यक्तियों के पक्ष में प्रस्ताव पारित हुए हैं, तो कोटवार नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन यह जांच करे कि दोनों प्रस्ताव किन परिस्थितियों में पारित हुए, बैठक में कौन-कौन उपस्थित था, प्रस्ताव किसके द्वारा रखा गया और उस पर किस प्रकार सहमति दर्ज की गई।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार इसी विवाद के कारण गांव में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कौन सा प्रस्ताव नियमानुसार और वैध प्रक्रिया के तहत पारित हुआ।
गेंदलाल बर्मन को नियुक्त करने की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर से गेंदलाल बर्मन के पक्ष पर नियमानुसार विचार करने की मांग की है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि गेंदलाल बर्मन स्वर्गीय खोरबहरा कोटवार के ज्येष्ठ पुत्र हैं और शिक्षित भी हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि कोटवार पद के लिए गेंदलाल बर्मन की पात्रता और वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए उनकी दावेदारी पर नियमानुसार विचार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने कहा है कि सभी संबंधित अभ्यर्थियों की पात्रता और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।
देवचंद खाण्डेकर की नियुक्ति पर रोक की मांग
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक कोटवार नियुक्ति से संबंधित विवाद और दस्तावेजों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक देवचंद खाण्डेकर की नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों का तर्क है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित कोई अपील या आपत्ति लंबित है, तो अंतिम निर्णय आने तक आगे की कार्रवाई रोकना उचित होगा, ताकि बाद में किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी जटिलता उत्पन्न न हो।
पंचायत के प्रस्ताव और कार्यवाही रजिस्टर की जांच की मांग
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में विशेष रूप से ग्राम पंचायत के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। इनमें ग्रामसभा की कार्यवाही रजिस्टर, प्रस्ताव रजिस्टर, कोटवार नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव, बैठक में उपस्थित सदस्यों की जानकारी तथा संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेज शामिल हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि दोनों तारीखों—25 जुलाई और 10 सितंबर 2026—के प्रस्ताव ग्राम पंचायत के अभिलेखों में दर्ज हैं, तो उनकी प्रमाणित प्रतियां सामने आने के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पंच के प्रभाव को लेकर भी आरोप
शिकायत में ग्रामीणों ने देवचंद खाण्डेकर की पत्नी के ग्राम पंचायत में पंच होने का भी उल्लेख किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में पद पर होने के कारण उनके प्रभाव का इस्तेमाल देवचंद खाण्डेकर के पक्ष में प्रस्ताव तैयार कराने में किया गया।
हालांकि यह आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच में संबंधित दस्तावेजों और पंचायत की कार्यवाही का परीक्षण होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्ताव तैयार करने में किसी प्रकार का प्रभाव या अनियमितता हुई थी या नहीं।
तहसीलदार के आदेश को भी चुनौती
ग्रामीणों की शिकायत में कोटवार नियुक्ति से संबंधित तहसीलदार के आदेश का भी उल्लेख है। शिकायत के अनुसार तहसीलदार द्वारा 7 सितंबर 2025 को पारित आदेश के विरुद्ध गेंदलाल बर्मन ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, मुंगेली के समक्ष अपील प्रस्तुत की है।
ग्रामीणों की मांग है कि जब तक अपील का अंतिम निराकरण नहीं हो जाता, तब तक देवचंद खाण्डेकर की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। साथ ही तहसीलदार के आदेश की भी नियमानुसार समीक्षा करने की मांग की गई है।
जनदर्शन में दर्ज हुई शिकायत
कलेक्टर जनदर्शन में प्रस्तुत आवेदन के अनुसार शिकायत 6 अक्टूबर 2026 को दर्ज की गई। आवेदन में आवेदक के रूप में ग्राम बोधापारा के समस्त ग्रामवासियों का उल्लेख किया गया है और टोकन क्रमांक 19497 दर्ज है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जांच कराई जाए तथा जांच के दौरान ग्राम पंचायत के मूल अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाए।
ग्रामीणों ने मांगी निष्पक्ष जांच
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष में विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि कोटवार नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। उनका कहना है कि यदि सभी दस्तावेजों और प्रस्तावों की जांच निष्पक्ष रूप से हो जाती है तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी दावेदारों की पात्रता, वरिष्ठता और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर शासन के नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाए।
जांच के बाद ही साफ होगी प्रस्तावों की वास्तविक स्थिति
फिलहाल 25 जुलाई को देवचंद खाण्डेकर के पक्ष में तथा 10 सितंबर को गेंदलाल बर्मन के पक्ष में प्रस्ताव पारित होने की बात ग्रामीणों और सूत्रों के माध्यम से सामने आई है। इन प्रस्तावों की प्रमाणिकता और वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अंतिम रूप से कौन सा प्रस्ताव ग्राम पंचायत के अधिकृत अभिलेख में किस रूप में दर्ज है।
प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायत की कार्यवाही रजिस्टर, प्रस्ताव रजिस्टर, ग्रामसभा की उपस्थिति तथा संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड की जांच किए जाने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- देवचंद खाण्डेकर की नियुक्ति पर जांच पूरी होने तक तत्काल रोक।
- 25 जुलाई 2026 के प्रस्ताव की जांच।
- 10 सितंबर 2026 को गेंदलाल बर्मन के पक्ष में बताए जा रहे प्रस्ताव की जांच।
- ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत की मूल कार्यवाही रजिस्टर का परीक्षण।
- प्रस्ताव रजिस्टर की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग।
- गेंदलाल बर्मन की पात्रता एवं वरिष्ठता की जांच।
- तहसीलदार के 7 सितंबर 2025 के आदेश की समीक्षा।
- एसडीएम के समक्ष लंबित अपील का नियमानुसार निराकरण।
- पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच।
शिकायत में शामिल ग्रामीण
कलेक्टर जनदर्शन में प्रस्तुत शिकायत में पन्ना ध्रुव, उमा देवी, मनोज बंजारा, महंत, इंद्रमान जांगड़े, ईश्वरी, उपेंद्र यादव, हरवंश बर्मन, माखन, दशरथ वर्मा, राजू यादव, दिलीप लहरे, रंजीत बंजारे, सूरज साहू, भागीरथी ध्रुव, रूप सिंह, करन, रेशन बाई, फूलसिंह, मुकेश, सोहन वर्मा, दसरु सप्रे, प्रकाश, कीर्ति, भानुप्रताप खांडे, ध्रुव सिंह सप्रे, प्रमोद, धर्मेंद्र वर्मा, संजू, संतोष सप्रे, रोशन ओगरे, भोला, अनु ओगरे, भारत, अश्वनी जांगड़े, सोनू, राम सिंह, नरेंद्र राजपूत, शत्रुहन, गोमती पात्रे, राजेश, राधिका, प्रिंस आर्यन, पुष्पांजलि, श्रेवती ओगरे, दिनेश, सिलोचना, प्रभा, ज्योति, धर्मेंद्र पात्रे, राकेश, रोशन, बसंत कुमार, सचिन कुमार, मुरुचंद, शिवकुमार, लोचन प्रसाद, राजेंद्र कुमार, अर्जुन, राजा, दिलीप वर्मा एवं संगीता वर्मा सहित अन्य ग्रामीणों के नाम शिकायत में दर्ज बताए गए हैं।
अब ग्रामीणों की निगाह प्रशासनिक जांच पर टिकी है। 25 जुलाई और 10 सितंबर के कथित प्रस्तावों सहित कोटवार नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ी और दोनों प्रस्तावों की वास्तविक स्थिति क्या है।