छत्तीसगढ़ / कोरबा

बायोफ्लॉक तकनीक से मत्स्य पालन की नई राह

 कोरबा । ग्राम नकटीखार की श्रीमती एलिजाबेथ मिंज खेती-किसानी के साथ गृहस्थी की जिम्मेदारियां भी संभालती हैं। परिवार की आजीविका को बेहतर बनाने और अपनी मेहनत से आय का नया जरिया तैयार करने की उनकी इच्छा थी। मत्स्य पालन विभाग से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने योजना के तहत बायोफ्लॉक टैंक स्थापना के लिए आवेदन किया।

योजना से मिली सहायता से उनके लिए मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीक अपनाने का रास्ता खुला। बायोफ्लॉक पद्धति में अपेक्षाकृत कम स्थान और पानी में मछली पालन की सुविधा होती है। इससे सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए भी मत्स्य पालन को आजीविका के रूप में अपनाने की संभावना बनती है। श्रीमती मिंज के लिए यह सहायता केवल एक संसाधन मिलने तक सीमित नहीं है; यह अपने परिवार की आर्थिक गतिविधियों में योगदान देने और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ने का अवसर भी है। मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से उन्हें नई तकनीक के माध्यम से उत्पादन और आय बढ़ाने की उम्मीद मिली है। उनकी यह पहल ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, सीखने की तत्परता और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए आगे आने की प्रेरक मिसाल है।


 

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