छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

*सरकारी दफ्तर में शौचालय की सुविधा बदहाल! पुरुषों को खुले में शौच जाने की मजबूरी, आखिर जिम्मेदार कौन*

सरकारी दफ्तर में शौचालय की सुविधा बदहाल! पुरुषों को खुले में शौच जाने की मजबूरी, आखिर जिम्मेदार कौन*

जिला मुख्यालय कबीर धाम स्थित तहसील कार्यालय में बुनियादी सुविधा पर सवाल, शौचालय होने के बावजूद उपयोग में परेशानी; सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल*
"विकाश शुक्ला"
कवर्धा -जिला कबीरधाम सरकारी कार्यालयों में आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब सरकारी दफ्तर में ही बुनियादी सुविधाओं की कमी सामने आने लगे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। कबीरधाम जिले के कवर्धा स्थित तहसील कार्यालय में पुरुषों के लिए शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि शौचालय मौजूद होने के बावजूद उसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और लोगों को खुले में शौच जाने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है।

*शौचालय है, लेकिन सुविधा कहां*

तहसील कार्यालय में प्रतिदिन राजस्व संबंधी कामकाज के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और आम नागरिक पहुंचते हैं। कोई जमीन संबंधी प्रकरण लेकर आता है, तो कोई नामांतरण, सीमांकन, प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कार्यों के लिए कार्यालय के चक्कर लगाता है। ऐसे में लोगों को घंटों कार्यालय परिसर में रुकना पड़ता है। लेकिन जब प्राकृतिक जरूरत पूरी करने के लिए बुनियादी सुविधा ही उपलब्ध न हो, तो उनकी परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है।

बताया जा रहा है कि पुरुषों के लिए शौचालय की व्यवस्था होने के बावजूद वहां झाड़ियों और उचित रखरखाव की समस्या के कारण उसका इस्तेमाल करना मुश्किल हो रहा है। इसके चलते लोगों को खुले में शौच जाने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सरकारी कार्यालय में ऐसी बदहाली क्यों

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस तहसील कार्यालय में आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां उनकी मूलभूत जरूरतों का ध्यान क्यों नहीं रखा जा रहा है ,क्या संबंधित अधिकारियों को इस समस्या की जानकारी नहीं है, यदि जानकारी है, तो अब तक शौचालय की साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए गए l 

सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता बनाए रखना और नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में तहसील कार्यालय की इस स्थिति को नजरअंदाज करना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस मामले में किसी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि बिना जांच के नहीं की जा सकती, लेकिन बुनियादी सुविधा की बदहाली की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

अब कार्रवाई की दरकार, सिर्फ दावों से नहीं चलेगा काम

जरूरत है कि संबंधित विभाग के अधिकारी तत्काल मौके का निरीक्षण करवाएं शौचालय के आसपास की झाड़ियों को हटवाएं, साफ-सफाई सुनिश्चित करें और पुरुषों के लिए उपयोग योग्य शौचालय की व्यवस्था बहाल कराएं।

अब सवाल यही है कि जब सरकारी दफ्तर में ही आम नागरिकों को शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान होना पड़े, तो स्वच्छता और सुशासन के दावों का क्या मतलब रह जाता है,प्रशासन को इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देकर जल्द समाधान करना चाहिए, ताकि तहसील कार्यालय आने वाले लोगों को इस परेशानी से राहत मिल सकता है l

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