कांपा में जी राम जी योजना की नाली निर्माण पर उठे गंभीर सवाल! नागरिक सूचना पटल गायब, गुणवत्ता और प्राक्कलन अनुसार नहीं हो रहा काम
कबीरधाम |
2026-10-18 19:05:30
सरकारी निर्माण में पारदर्शिता पर सवालिया निशान, आखिर कितने लागत से बन रही नाली?
कवर्धा -:। सरकारी योजनाओं के तहत होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के दावों के बीच कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत बोड़ला अंतर्गत ग्राम पंचायत कांपा में जी राम जी योजना के तहत आर सी सी पक्की नाली निर्माण कार्य सवालों के घेरे में है। निर्माण स्थल पर नागरिक सूचना पटल नहीं होने और निर्माण कार्य प्राक्कलन के अनुसार नहीं होने की आशंका को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सूचना पटल गायब, फिर जनता को जानकारी कैसे मिले?
निर्माण स्थल पर नागरिक सूचना पटल नहीं लगाए जाने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब नाली निर्माण स्थल पर योजना का नाम, स्वीकृत लागत और कार्य से संबंधित आवश्यक जानकारी ही प्रदर्शित नहीं है, तो आम जनता को कैसे पता चले कि आखिर किस योजना से और कितनी राशि खर्च कर निर्माण कराया जा रहा है?
सवाल यह भी है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि निर्माण कार्य की जानकारी ही आम नागरिकों को उपलब्ध नहीं होगी, तो वे गुणवत्ता और खर्च की निगरानी कैसे करेंगे? सूचना पटल का अभाव निश्चित रूप से जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है, जिसकी जांच आवश्यक है।
प्राक्कलन के अनुसार निर्माण हुआ या सिर्फ औपचारिकता?
ग्रामीणों ने आरसीसी पक्की नाली निर्माण की गुणवत्ता और स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप काम नहीं होने की आशंका जताई है। ऐसे में जरूरी है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण की तकनीकी जांच करें और स्वीकृत प्राक्कलन, निर्धारित मापदंडों तथा वास्तविक निर्माण कार्य का बारीकी से मिलान करें।
सवाल सीधा है—यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहा है, तो उसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने में परेशानी क्या है? जांच से ही स्पष्ट होगा कि निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं। केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर मामले को समाप्त करने के बजाय मौके की वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्राक्कलन के अनुरूप काम नहीं होने की शिकायत की है।
ग्रामीणों की मांग है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच शिकायतकर्ता के समक्ष कराई जाए, ताकि निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। जांच के दौरान तकनीकी अधिकारियों द्वारा नाली की गुणवत्ता, निर्माण की निर्धारित माप, सामग्री के उपयोग और स्वीकृत प्राक्कलन का सत्यापन किया जाए। यदि जांच में गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि निर्माण कार्य की निगरानी किस अधिकारी द्वारा की जा रही है, नागरिक सूचना पटल क्यों नहीं लगाया गया और ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब कौन देगा?
फिलहाल ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे मामले की जांच कर तथ्य सार्वजनिक करें और शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी ग्रामीणों को उपलब्ध कराएं।
अब जवाबदेही तय होनी चाहिए
कांपा की नाली निर्माण का मामला केवल एक निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, तकनीकी गुणवत्ता और जनभागीदारी का सवाल भी है। ग्रामीणों ने शिकायत कर जांच की मांग उठाई है। अब संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है कि वह मामले को गंभीरता से ले, निष्पक्ष जांच कराए और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करे।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब जनता के बीच निर्माण कार्य हो रहा है, तो जनता को उसकी लागत और तकनीकी जानकारी से दूर क्यों रखा जा रहा है? क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे, या शिकायत के निस्तारण के लिए केवल कागजी कार्रवाई ही पर्याप्त मानी जाएगी?