छत्तीसगढ़ / बीजापुर

अंबुजा अडानी के द्वारा संयत्र के श्रमिकों पर शोषण का लगाया गया आरोप, कहा श्रमिकों की जिम्मेदारी को अनदेखा कर रहा प्रबंधन।

बीजापुर, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बीजापुर में निजी स्कूलों को मान्यता देने संबंधी नियम निर्देश की प्रति उपलब्ध नहीं है।  जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बीजापुर में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दिनांक 22.7.2024 को नियमानुसार आवेदन पत्र देकर निजी स्कूलों को मान्यता देने संबंधी वर्तमान में प्रभावशील शासनादेश नियम निर्देश की प्रति उपलब्ध कराने हेतु निवेदन किया गया था किन्तु निर्धारित समय सीमा पर कोई जानकारी नहीं दिया गया जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि कार्यालय में निजी स्कूलों को मान्यता दिए जाने संबंधी कोई भी नियम निर्देश उपलब्ध नहीं है ।जिले में कई निजी स्कूल संचालित है प्रश्न यह उठता है कि जिले में संचालित निजी स्कूलों को मान्यता जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बीजापुर द्वारा किस नियम निर्देश के तहत दिया जा रहा है? जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में  निजी स्कूलों को मान्यता दिए जाने कोई गाइडलाइन उपलब्ध ही नहीं है ऐसे में निजी स्कूले नियमानुसार संचालित हो रहे हैं कैसे कहा जा सकता है? जिला मुख्यालय में कुछ स्कूल आवासीय भवनों पर संचालित है जिनके पास ना तो पर्याप्त बैठक व्यवस्था है और ना शौचालय पुस्तकालय  खेल कूद के मैदान फिर भी उन्हें मान्यता मिल रही है किस नियम के तहत सवाल उठना लाजमी है । जब जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में नियमावली नहीं है तो मान्यता कैसे व किस आधार पर दिया जा रहा है या नियमावली उपलब्ध है तो नियमावली को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? निजी स्कूल संचालन हेतु शासन के मापदंड को पूरा नहीं करने वाले निजी स्कूलो को संचालन की मान्यता दिया जा रहा है नियमावली देने से पोल खुलने की संभावना है इसलिए नियमावली नहीं दीं जा रही है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम केतहत निजी स्कूलों में अध्यनरत छात्रों को शिक्षा प्रदान किया जा रहा है जिसका शिक्षण शुल्क शासन के द्वारा निजी स्कूलों को भुगतान किया जा रहा है किन्तु उन बच्चों का एवं पालकों का निवास पता आधार कार्ड मोबाइल फोन तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं है इसलिए सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि निजी स्कूल संचालन और शुल्क भुगतान में किस तरह फर्जीवाड़ा हो रहा है ।दूसरी तरफ शासन के द्वारा संलगनीकरण बंद है विशेष परिस्थितियों में यदि करना है तो 6 माह से अधिक नहीं होना चाहिए किन्तु इस कार्यालय में वर्ष 2015 से हाई स्कूल में पदस्थ लिपिकों को निरंतर संलग्न कर आज तक रखा गया है शासन के आदेश जिला शिक्षा अधिकारी को कोई मायने नहीं रखता निश्चित ही जिन स्कूलों के कर्मचारी लिपिक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ हैं वहा का कार्य प्रभावित हो रहा होगा या कोई शिक्षक शैक्षणिक कार्य छोड़कर लिपिकीय कार्य कर रहे होगे जाहिर है बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती होगी बहरहाल शासन कोई भी नियम निर्देश आदेश जारी करें किन्तु जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बीजापुर के लिए कोई मायने नहीं रखता है।  जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय अपने हिसाब से ही चलाएंगे शासन के नियम निर्देश गाइडलाइंस का पालन करने की उन्हें कोई आवश्यकता नहीं है?

 
 
 

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