इस्तीफा तो फिर सीएम बनने के लिए दिया है
आप के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल कुछ भी करते हैं तो दूसरे के भले के लिए नहीं करते हैं। वह कुछ भी करते हैं तो अपने भले के लिए करते हैं,कुछ लोगों को लगता है कि वह अपनी पार्टी के किसी नेता के भले के लिए कर रहे है, पार्टी के लिए भले के लिए कर रहे हैं, दिल्ली की जनता के भले के लिए कर रहे हैं,देश की राजनीति में कोई मिसाल पेश करने के लिए कर रहे हैं।वह ऐसा हमेशा कहते जरूर है लेकिन हकीकत में वह ऐसा करते नहीं है।वह कुछ भी करते हैं तो जनता को,देश को बताते ऐसा हैं जैसे उन्होंने कोई महान काम कर दिया है, ऐसा महान काम कर दिया है जो देश में पहले कोई नहीं कर सका है और भविष्य में कोई कर भी नहीं सकेगा।
जब उनको शराब घोटाले के आरोप में जेल जाना पड़ा तो जेल इस तरह गए जैसे शहीद भगत सिंह के बाद वही जेल वाले क्रांतिकारी हैं। उन्होंने देश में कोई क्रांति कर दी इसलिए उनको जेल भेज दिया गया है। देश में परंपरा है कि किसी नेता को जेल जाना पड़ता है तो वह जेल जाने से पहले इस्तीफा देता है। आज तक जेल जाने वाले नेता को इस्तीफा देने पर ही कहा जाता था कि उसमें नैतिकता है, उसके लिए नैतिकता को कोई मोल है।केजरीवाल किसी पर भरोसा नहीं करते है, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देने की परंपरा को धता बताते हुए कह दिया वह इस्तीफा नहीं देंगे,जेल से सरकार चलाएंगे।उन्होंने इस्तीफा न देने के पीछे का कारण बताया कि वह संविधान के मानने वाले नेता हैं, संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि सीएम को जेल जाना पड़े तो उसके लिए इस्तीफा देना अनिवार्य नहीं है यानी इस्तीफा नहीं देना उनके लिए महान काम था क्योंकि ऐसा तो आज तक कर नहीं सका था।
केजरीवाल के लिए इस्तीफा नहीं देना महान काम था तो उनके दल के सभी नेताओं ने यही कहा और यही माना कि केजरीवाल इस्तीफा नहीं देकर महान काम कर रहे हैं। अब उनको सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है तो उन्होंने दो दिन बाद सीएम पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर देश को चौंका दिया।वह तय कर चुके थे कि इस्तीफा देना है तो उसी दिन इस्तीफा दे सकते थे, वह तय कर चुके थे कि किस को कुछ महीने के लिए सीएम बनाना है तो उसी दिन उसका नाम बता सकते थे लेकिन मीडिया में उनके महान काम इस्तीफे की चर्चा दो दिन तक हो इसलिए उन्होंने उसी दिन इस्तीफा नहीं दिया।वह तय कर चुके थे कि आतिशी को ही सीएम बनाना है, लेकिन वह जानना चाहते थे कि पार्टी में कोई विरोध तो नहीं करेगा इसलिए उन्होंने लोगों से राय ली ताकि ऐसा लगे कि वह सभी से पूछ कर किसी को सीएम बना रहे हैं। विधायक दल की बैठक में आतिशी के नाम पर प्रस्ताव उन्होंने खुद रखा तो कोई उसका विरोध तो कर ही नहीं सकता था।उनकी पसंद पर सभी ने सहमति जताई।
सभी ने मान लिया केजरीवाल ने बहुत अच्छा फैसला लिया है। सभी ने कहा कि केजरीवाल के लिए सत्ता कोई मायने नहीं रखती है, सीएम का पद उनके लिए तुच्छ है, वह तो जब चाहे सीएम का पद छोड़ सकते है।देश में सब जानते हैं कि केजरीवाल ने सीएम की कुर्सी खुशी-खुशी नहीं छोडी़ है, मजबूरी में छोडना पडा़ है। क्योकि सुप्रीम काेर्ट ने जमानत देते वक्त शर्ते ही ऐसी लगा दी थी कि वह नाम को सीएम रहते लेकिन सीएम को कोई काम तो वह कर नहीं पाते। इसलिए उन्होंने नाम को पांच छह महीने सीएम रहने से अच्छा किसी और को सीएम बनाने को मजबूर हुए।
केजरीवाल ने सीएम की कुर्सी पांच छह महीने के लिए छोड़ी है, इसका संकेत तो उन्होंने यह कह कर दिया है कि जनता उनको जिताकर ईमानदार घोषित करोगी तो वह फिर से सीएम की कुर्सी पर बैंठेंगे। यानी उन्होंने कानून की अदालत से ईमानदार घोषित होने में देरी के चलते जनता की अदालत में जाने का फैसला किया ताकि वह चुनाव जीतकर खुद को र्ईमानदार साबित कर सकें। सबसे अच्छी बात यह है कि जनता की अदालत में खुद को ईमानदार साबित करने के लिए कोई सबूत भी पेश नहीं करना है।जनता की अदालत में सिर्फ उनको भावुक होना है, जनता को भावुक करना है। उनकी पूरी पार्टी को भी यही करना है और कहना है कि देश में केजरीवाल से ज्यादा ईमानदार कोई नहीं है। वह और उनकी पार्टी के लोग तो पहले भी कई बार कह चुके हैं यदि देश में केजरीवाल ईमानदार नहीं है तो कोई ईमानदार नहीं है।
केजरीवाल को जनता को चुनाव जीतने के लिए यकीन दिलाना है कि वह ईमानदार है, कोई शराब घोटाला नहीं किया है। वह अदालत में कह चुके हैं कि जब जांच एजेंसियां उनके और उनके नेताओं के यहां से चवन्नी भी जब्त नहीं कर सकी है तो इसका मतलब है कि कोई शराब घोटाला हुआ ही नहीं है। यही वह जनता के बीच भी जाकर कहेंगे। दिल्ली की जनता उन पर तीन बार भरोसा कर चुकी है, इसलिए उनको उम्मीद है कि जनता फिर एक बार फिर उन पर भरोसा करेगी। जनता इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी को, भ्रष्टाचार के आरोप के बाद जयललिता को चुनाव जिता सकती है तो केजरीवाल भी उम्मीद कर रहे हैं कि तीसरी बार भी जनता ऐसा करेगी।
यह सवाल खूब चर्चा में है कि केजरीवाल ने आतिशी को ही सीएम पद के लिए क्यों चुना। कई बडे़ नेता इसलिए नहीं चुने गए उन पर आरोप है।वह जमानत पर हैं।अपनी पत्नी को इसलिए नहीं बनाया कि वह विधायक नहीं है, और चुनाव पांच महीने बात होने हैं। आतिशी को इसलिए बनाया कि आतिशी केजरीवाल के जेल में रहने के दौरान सरकार व पार्टी को बनाए रखने का काम बखूबी किया।कई मंत्रालय अकेली देखती रही, केजरीवाल व पार्टी का पक्ष देश की जनता के सामने मजबूती से ऱख सकीं। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि किसी भी मामले में नौटंकी केजरीवाल की तरह कर सकती है। वह केजरीवाल के लिए रोई, भावुक बयान प्रेस में दिए। भूख हड़ताल की। अपने आपको को मौका मिला तो साबित किया।
वह केजरीवाल के साथ ही सिसोदिया की भरोसेमंद नेता हैं। दोनो जिस पर भरोसा करें सीएम पद तो उसी को मिल सकता था। उसी को मिला।आतिशी के सीएम बन जाने के बाद भाजपा अब आतिशी-आतिशी करेगी,उसका पूरा ध्यान आतिशी पर रहेगा,केजरीवाल पर नही रहेगा। अगले पांच महीने केजरीवाल चाहते हैं कि भाजपा का ध्यान उन पर न रहे, इसीलिए उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा देकर आतिशी को सीएम बनाया है। भले ही कुछ महीने के लिए सीएम बनाया है बनाया तो है।