देश-विदेश

विपक्ष सांसदों ने एफसीआरए बिल का जताया विरोध

 नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र में एफसीआरए विधेयक, अयोध्या में भूमि खरीद-फरोख्त, विपक्षी दलों के विरोध और झारखंड के छात्र आंदोलन पर सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने एफसीआरए विधेयक पर सरकार से स्पष्टता की मांग की है। उन्होंनेसरकार से पारदर्शिता बरतने और नियम को सभी संगठनों पर समान रूप से लागू करने की मांग की है। सपा सांसद डिंपल यादव ने सवाल उठाया कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक पंजीकृत संगठन है या नहीं।

उन्होंने कहा कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एफसीआरए बिल के जरिए एनजीओ और विभिन्न संगठनों के तहत पंजीकृत संपत्तियों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है और इससे लोगों में डर का माहौल पैदा हो सकता है। सपा सांसद ने अयोध्या से जुड़े जमीन और ट्रस्ट के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से एसआईटी कमेटी गठित है, लेकिन जमीन के लेन-देन को लेकर उठे सवालों का अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। उनके मुताबिक, कुछ संपत्तियों को कथित तौर पर वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक दाम पर खरीदे जाने के आरोप हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 2 करोड़ रुपये की जमीन 16 करोड़ रुपये में और 5 करोड़ रुपये की जमीन कथित तौर पर 25, 30 या 40 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने दान राशि में कथित अनियमितताओं और सोने-चांदी की वस्तुओं के गायब होने से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन मामलों का उचित हिसाब और रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।

कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि विपक्ष की मांगों में बदलाव के बावजूद सरकार की ओर से जरूरी जवाब नहीं मिला है। पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी, जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई की घटनाओं को लेकर सदन में स्पष्टीकरण देने की मांग की जा रही है।

Leave Your Comment

Click to reload image