साहित्य विचारों की आजादी का मंच, पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध: प्रमिला जयपाल
सिएटल । भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने पढ़ने की अहमियत समझाई है। उन्होंने लोगों से सेंसरशिप का विरोध करने और चुनौती दी गई किताबों को पढ़ना जारी रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि साहित्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने और दबाई जा रही आवाजों को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। सिएटल में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण के उद्घाटन समारोह में जयपाल ने कहा, मेरे लिए पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध का सबसे बड़ा माध्यम है। सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित कार्यक्रम में जयपाल ने किताबों के इस उत्सव को अमेरिका और दुनिया के दूसरे हिस्सों में अभिव्यक्ति, असहमति और लोकतांत्रिक बहस पर बढ़ती पाबंदियों के संदर्भ से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।
जयपाल ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने की भी आलोचना की।
उन्होंने अमेरिका में कुछ किताबों पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र किया। इनमें टोनी मॉरिसन की ‘द ब्लूएस्ट आई’, ‘द काइट रनर’, ‘मिल्क एंड हनी’ और अरुंधति रॉय की ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ शामिल हैं।
जयपाल ने कहा कि इस तरह के कदम बुनियादी स्वतंत्रताओं के लिए खतरा हैं और उन्होंने इनका विरोध जारी रखने का संकल्प जताया।
उन्होंने कहा, हम अपने लोकतंत्र को फिर से मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि हमारे मौलिक अधिकारों को बंद न किया जा सके।
जयपाल ने लोगों से केवल मतदान और सामुदायिक स्तर पर सक्रिय रहने तक सीमित न रहने, बल्कि लगातार पढ़ने, अपने अनुभव साझा करने और उन लेखकों की कहानियों से जुड़ने की भी अपील की, जिनकी आवाज दबाई जा रही है। साहित्य की भूमिका बताते हुए उन्होंने कहा कि यह शक्तिशाली संस्थानों से सवाल करता है और हमारी बातचीत तथा सोच की सीमाओं को विस्तार देता है।