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दक्षिण एशिया में बढ़ा गर्मी का खतरा, भारत समेत 4 देशों ने मिलकर बनाई रणनीति

 नई दिल्ली । प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहे अभूतपूर्व अल नीनो के बीच दक्षिण एशिया में भीषण गर्मी और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान ने साझा प्रयास तेज किए हैं। ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क (GHHIN) साउथ एशिया हब ने ग्लोबल हीट फोरम में चारों देशों के लिए गर्मी और स्वास्थ्य पर पहली राष्ट्र-स्तरीय आकलन रिपोर्ट जारी की।

आकलन में सामने आया है कि गर्मी का खतरा अब केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिमालयी देशों नेपाल और भूटान के ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है। चारों देशों ने हीट एक्शन प्लान और पूर्व चेतावनी प्रणालियां विकसित की हैं, लेकिन अब चुनौती इन व्यवस्थाओं को जमीनी स्तर पर लोगों की सुरक्षा से जोड़ने की है।

भारत में 57% जिले उच्च से बहुत उच्च गर्मी जोखिम में
GHHIN के आकलन के अनुसार, भारत में 57 प्रतिशत जिले पहले ही उच्च से बहुत उच्च गर्मी जोखिम का सामना कर रहे हैं। इन जिलों में देश की करीब तीन-चौथाई आबादी रहती है। भारत में 250 से अधिक शहर और जिला स्तर के हीट एक्शन प्लान लागू हैं।

गर्मी से होने वाली बीमारियों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय व्यवस्था भी बनाई गई है और 18 हजार से अधिक मेडिकल अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। आकलन में सुझाव दिया गया है कि अब गर्मी से निपटने की कार्रवाई को केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित रखने के बजाय इसके लिए अलग वित्तीय व्यवस्था और हर योजना में स्वास्थ्य परिणामों को शामिल किया जाना चाहिए।

नेपाल में 2024 में 50 दिन 40 डिग्री से ऊपर रहा तापमान
हिमालयी देश नेपाल में भीषण गर्मी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय मौसम विभाग के अनुसार, 2024 में दक्षिणी तराई क्षेत्र में 50 दिन तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।

नेपाल ने अपनी पहली संघीय हीट योजना जारी की है और चरणबद्ध हीट अलर्ट प्रणाली भी शुरू की है। हालांकि, स्वास्थ्य व्यवस्था में गर्मी से जुड़ी बीमारियों का व्यवस्थित आंकड़ा अभी दर्ज नहीं किया जाता। आकलन में तराई के अस्पतालों में गर्मी के कारण होने वाली भर्ती को अनिवार्य रूप से दर्ज करने और मौसम विभाग की चेतावनियों को स्थानीय कार्रवाई से जोड़ने की सिफारिश की गई है।

बांग्लादेश में बढ़ा ‘फील्स लाइक’ तापमान
बांग्लादेश में विश्व बैंक के अनुसार 1980 के बाद से तापमान और नमी को मिलाकर मापे जाने वाले ‘फील्स लाइक’ तापमान में करीब 4.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। अब साल का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खतरनाक उमस वाली गर्मी वाला हो गया है।

बांग्लादेश ने अपनी राष्ट्रीय अनुकूलन योजना में गर्मी को शामिल किया है। नारायणगंज में पहला शहरी हीट एक्शन प्लान बनाया गया है। साथ ही गर्मी से जुड़ी बीमारियों पर राष्ट्रीय दिशानिर्देश और ‘B.E.A.T. the Heat’ जन अभियान शुरू किया गया है। GHHIN ने राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर अलग हीट एक्शन प्लान तथा अस्पतालों से जुड़ी हीट-हेल्थ निगरानी प्रणाली विकसित करने की जरूरत बताई है।

भूटान में बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई नई चुनौती
भूटान के दक्षिणी निचले इलाकों में बढ़ता तापमान अब उन घाटियों तक गर्मी का खतरा पहुंचा रहा है, जिन्हें पहले अपेक्षाकृत ठंडा माना जाता था। इससे ऐसी आबादी के सामने नया स्वास्थ्य जोखिम पैदा हुआ है, जहां भीषण गर्मी से निपटने की पहले व्यापक योजना नहीं रही है।

भूटान में राष्ट्रीय स्तर पर गर्मी से जुड़ी जिम्मेदारियां स्वास्थ्य मंत्रालय को दी गई हैं। 2022 के एक नियम के तहत श्रमिकों को गर्मी से सुरक्षा देना अनिवार्य है। देश की पहले से मौजूद बाढ़ और ग्लेशियर झीलों की पूर्व चेतावनी प्रणालियों को गर्मी के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावना भी है। आकलन में इन अलग-अलग व्यवस्थाओं को एकीकृत कर एक हीट एक्शन प्लान बनाने की सिफारिश की गई है।

‘चेतावनी को सुरक्षा में बदलना अगली चुनौती’
GHHIN साउथ एशिया हब के अध्यक्ष और CEEW फेलो डॉ. विश्वास चितले ने कहा कि दक्षिण एशिया में भीषण गर्मी अब सालभर बना रहने वाला क्षेत्रीय जोखिम बन चुकी है। उनके मुताबिक, चारों देशों में गर्मी की स्थिति पांच साल पहले की तुलना में खराब होने का अनुमान है। अब मौसम संबंधी पूर्वानुमानों को स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, स्थानीय बजट और श्रम नियमों से जोड़ने की जरूरत है, ताकि हर चेतावनी को प्रभावी सुरक्षा में बदला जा सके।

NRDC की डायरेक्टर प्रीमा मदान ने कहा कि भीषण गर्मी केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, समानता, उत्पादकता और सतत विकास से जुड़ी मानवीय चुनौती है। उनके अनुसार, भारत में हीट एक्शन प्लान का बड़ा नेटवर्क दिखाता है कि तैयारी से जीवन बचाने में मदद मिलती है। अब कार्यान्वयन, स्वास्थ्य व्यवस्था और स्थानीय वित्त को मजबूत करने की जरूरत है।

सीमा पार सहयोग पर जोर
UNESCAP के कियोंग को ने कहा कि गर्मी सीमाओं पर नहीं रुकती, इसलिए इससे निपटने की कोशिशें भी सीमित नहीं रहनी चाहिए। देशों के बीच पूर्वानुमान साझा करने, कार्रवाई शुरू करने वाले तापमान मानकों में तालमेल और मौजूदा आपदा प्रणालियों में गर्मी को शामिल करने पर जोर दिया गया।

GHHIN साउथ एशिया हब का उद्देश्य चारों देशों में संस्थानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का क्षेत्रीय नेटवर्क तैयार करना तथा इन आकलनों को गर्मी के मौसम से पहले और बाद में सरकारों के लिए ब्रीफिंग में बदलना है। इसके जरिए गर्मी से जुड़े वैज्ञानिक आकलनों को क्षेत्र के सबसे संवेदनशील समुदायों के लिए समन्वित कार्रवाई में बदलने पर जोर दिया जाएगा।

 

 

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