देश-विदेश
तुहिन कांता पांडे बने SEBI के नए अध्यक्ष
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त सचिव तुहिन कांता पांडे को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे माधवी पुरी बुच की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 28 फरवरी को समाप्त हो गया है। 1987 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी पांडे आगामी तीन वर्षों तक सेबी के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं देंगे।
अपने करियर में पांडे ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वे वित्त मंत्रालय के निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव रह चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने लोक उद्यम विभाग (DPI), योजना आयोग (अब नीति आयोग), कैबिनेट सचिवालय और वाणिज्य मंत्रालय में भी कार्य किया है।
ओडिशा सरकार के अधीन भी उन्होंने स्वास्थ्य, वित्त, परिवहन, वाणिज्यिक कर और सामान्य प्रशासन विभागों में अपनी सेवाएं दी हैं। पांडे ने पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री और ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय से एमबीए किया है।
माधवी पुरी बुच का कार्यकाल समाप्त
मार्च 2022 में सेबी की पहली महिला प्रमुख बनीं माधवी पुरी बुच का कार्यकाल समाप्त हो गया है। उनके कार्यकाल के दौरान हिंडनबर्ग-अडानी विवाद बड़ा मुद्दा बना, जिसमें उन पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि, उन्होंने सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।
सेबी के सामने नई चुनौतियां
तुहिन कांता पांडे ऐसे समय में सेबी की कमान संभाल रहे हैं जब भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और इनसाइडर ट्रेडिंग जैसे मुद्दे चिंता का विषय बने हुए हैं। उनके सामने सेबी की नीतियों को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की चुनौती होगी।
उत्तराखंड के चमोली में बड़ा हादसा: ग्लेशियर टूटने से 57 मजदूर दबे, रेस्क्यू जारी
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में बड़ा हादसा हुआ है। बद्रीनाथ धाम के पास ग्लेशियर टूटने से 50 से ज्यादा मजदूर बर्फ में दब गए। इनमें से 10 मजदूरों को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 47 की तलाश जारी है।
ग्लेशियर टूटने से बड़ा हादसा
जानकारी के मुताबिक, हादसा बद्रीनाथ धाम से तीन किलोमीटर आगे माणा गांव के पास हुआ। शुक्रवार सुबह माणा-घस्तौली को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर बर्फ हटाने और मरम्मत का कार्य चल रहा था, जिसमें करीब 57 मजदूर लगे हुए थे। इसी दौरान ग्लेशियर टूटने से सभी मजदूर बर्फ में दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, 47 मजदूर अब भी लापता
बचाव अभियान में अब तक 10 मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया है। उन्हें गंभीर हालत में सेना के माणा कैंप में भर्ती कराया गया है। वहीं, 47 मजदूरों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता IG नीलेश आनंद भरणे ने बताया, "सीमा क्षेत्र माणा में सीमा सड़क संगठन (BRO) के कैंप के पास भीषण हिमस्खलन हुआ है, जिसमें सड़क निर्माण में लगे 57 मजदूर फंस गए हैं। इनमें से 10 मजदूरों को बचा लिया गया है और गंभीर हालत में सेना के कैंप में भर्ती किया गया है।" BRO के अधिशासी अभियंता CR मीना ने बताया कि मौके पर तीन से चार एंबुलेंस भेजी गई हैं, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण बचाव दल को वहां पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया दुःख
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "चमोली जिले के माणा गांव के पास BRO द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य के दौरान कई श्रमिकों के हिमस्खलन में दबने का दुखद समाचार मिला। ITBP, BRO और अन्य बचाव दल राहत और बचाव कार्य कर रहे हैं। मैं भगवान बद्री विशाल से सभी श्रमिक भाइयों की सुरक्षा की प्रार्थना करता हूं।"
बचाव कार्य में चुनौतियां
भारी बर्फबारी के कारण रेस्क्यू टीम को घटनास्थल तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह से स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और बचाव कार्य में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है।
इस घटना से पूरे प्रदेश में चिंता का माहौल है और प्रशासन तेजी से राहत कार्यों को अंजाम देने में जुटा हुआ है।
पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर TCS के मैनेजर ने की आत्महत्या...
आगरा। यूपी के आगरा में पत्नी के उत्पीड़न से तंग आकर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के रिक्रूटमेंट मैनेजर के पद पर तैनात मानव शर्मा ने आत्महत्या कर ली। जान देने से पहले मानव ने एक वीडियो बनाया, जिसमें उन्होंने कहा कि 'प्लीज मर्दों की सोचो, बेचारे बहुत अकेले हैं...'। इसके बाद फंदे पर लटक कर जान दे दी। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
डिफेंस कॉलोनी, सदर के रहने वाले मानव शर्मा टीसीएस कंपनी, मुंबई में रिक्रूटमेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। उनके पिता नरेंद्र शर्मा एयरफोर्स से रिटायर हैं और मानव उनके इकलौते बेटे थे। मानव की शादी एक वर्ष पहले 30 जनवरी 2024 को शादी हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही पत्नी परेशान करने लगी, वे पत्नी को अपने साथ मुंबई ले गए।
मानव शर्मा के पिता नरेंद्र शर्मा ने थाना सदर में दर्ज कराए मुकदमे में आरोप लगाया है कि बेटा अपने साथ बहू को मुंबई ले गया था। बहू उसे परेशान करती थी, आत्महत्या करने की धमकी देती थी जिससे पूरा परिवार फंस जाएगा। आरोप है कि बहू अपने ब्वाय फ्रेंड से बात करती थी और उसी के साथ रहना चाहती थी। 23 फरवरी को मानव अपने साथ पत्नी को लेकर मुंबई से आगरा आया यहां से वह उसे छोड़ने बरहन चला गया। बरहन में ससुरालीजनों ने उसे प्रताड़ित किया।
6.57 मिनट के वीडियो में बयां किया दर्द
24 फरवरी की सुबह मानव ने कमरे में पंखे पर फंदा लगाकर जान दे दी। मानव शर्मा ने मरने से पहले 6.57 मिनट का वीडियो बनाया। गले में फंदा और आंख में आंसुओं के सैलाब के साथ मानव ने पत्नी से मिला वो दर्द बयां किया, जो वे शादी के बाद से झेलते आ रहे थे। मानव ने सबसे पहले द लॉ नीड टू प्रोटेक्ट मैन का जिक्र किया। सिस्टम से अपील करते हुए कहा प्लीज मर्दों के बारे में कोई तो बात करे, बेचारे बहुत अकेले हैं। रोते हुए कहा कि कानून में युवाओं को सुरक्षित करने की जरूरत है, नहीं तो कोई बचेगा ही नहीं, जिस पर इल्जाम लगा सको।
पत्नी के चरित्र पर भी की टिप्पणी
भावुक हुए मानव ने कहा कि 'मैं अपना बता देता हूं…सबका सेम है। इसके बाद पत्नी के चरित्र पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 'मुझे जाने से दिक्कत नहीं है, मैं जाना चाहता हूं, प्लीज मर्दों के बारे में कोई तो बात करे, बेचारे बहुत अकेले हैं।'
पहले भी कर चुका है जान देने की कोशिश
वे आगे कहते हैं कि 'पापा सॉरी, मम्मी सॉरी, अक्कू सॉरी…मेरे जाते ही सबकुछ ठीक हो जाएगा, मुझे जाने दो। मैं कल्पना कर रहा हूं, कैसे मरते हैं। मैंने पहले भी आत्महत्या की कोशिश की। इसके बाद मानव ने अपनी कटी हुई कलाई दिखाई।
मां-बाप को बिल्कुल टच नहीं करना
वीडियो के अंत में मानव ने कहा कि 'चलो ठीक है, प्लीज आउट, कोई फर्क नहीं पड़ता है, तुम्हारा लॉ आर्डर…तुम्हारा लॉ आर्डर। जाएंगे कोई दिक्कत नहीं है, मेरे मां-बाप को बिल्कुल टच मत करना। इन्हीं शब्दों के साथ वीडियो पूरा हो जाता है।
बेटे निशांत कुमार की लॉन्चिंग को तैयार हैं नीतीश कुमार
नीतीश कुमार की चुप्पी और निशांत कुमार के बयानों के कई मतलब और मायने भले ही निकाले जा रहे हो लेकिन राजनीति को सही ढंग से समझने वाला कोई भी जानकर यह बता सकता है कि पिता-पुत्र के मन में क्या चल रहा है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार लगातार अपने बयानों से यह संकेत दे रहे हैं कि वे बिहार की सक्रिय राजनीति में उतरने को तैयार हैं। निशांत के बयानों पर नीतीश कुमार की चुप्पी भी यही संकेत दे रही है कि बिहार के मुख्यमंत्री अपनी राजनीतिक विरासत और अपनी पार्टी- जनता दल यूनाइटेड दोनों को अपने बेटे के हाथ में सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।
नीतीश कुमार की चुप्पी और निशांत कुमार के बयानों के कई मतलब और मायने भले ही निकाले जा रहे हो लेकिन राजनीति को सही ढंग से समझने वाला कोई भी जानकर यह बता सकता है कि पिता-पुत्र के मन में क्या चल रहा है।
नीतीश कुमार शुरू से ही परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ रहे हैं। कई बार तो वह सार्वजनिक मंच से परिवारवाद की राजनीति करने के लिए लालू यादव पर निशाना साध चुके हैं। यहां तक कि दशकों तक नीतीश कुमार किसी भी सार्वजनिक मंच पर अपने बेटे निशांत कुमार को अपने साथ नहीं ले गए। लेकिन पिछले कुछ दिनों से नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार की तस्वीरें लगातार सामने आ रही है। निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर जेडीयू नेताओं के बयान भी लगातार आ रहे हैं।
दूसरी तरफ, जिन निशांत कुमार की तारीफ में यह बताया जाता था कि वह बहुत सादगी से रहते हैं, मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हैं। वही निशांत कुमार आजकल लगातार मीडिया के सामने आ रहे हैं। सबसे अधिक गौर करने वाली बात यह है कि वह मीडिया को गंभीर राजनीतिक मसलों पर बयान देकर, हंगामा भी खड़ा कर रहे हैं। एक पल के लिए यह माना जा सकता है कि अपने पिता को फिर से बिहार का मुख्यमंत्री बनाने के लिए वह बिहार के मतदाताओं से अपील कर रहे हैं लेकिन एनडीए गठबंधन को लेकर भी उनका बोलना यह दर्शाता है कि नीतीश कुमार उन्हें राजनीति में उतारने का फैसला कर चुके हैं, निशांत कुमार भी इसके लिए अपने आपको तैयार कर रहे हैं और अब लॉन्चिंग के लिए सही मौके का इंतजार किया जा रहा है।
जो बात नीतीश कुमार स्वयं अपनी जुबान से नहीं बोल पा रहे थे, उन्होंने वह बात अपने पुत्र निशांत कुमार की जुबान से बुलवाकर एक बड़ा राजनीतिक दांव खेल दिया है। निशांत कुमार ने एनडीए गठबंधन के सबसे बड़े दल भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि, "एनडीए भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करे। जेडीयू के तमाम नेता और कार्यकर्ता सभी मिलकर सीएम फेस घोषित करें। ताकि उनके नेतृत्व में विकास कार्य जारी रहे।"
एक तरफ निशांत कुमार ने बीजेपी को एनडीए गठबंधन का नेता घोषित कर, विधानसभा चुनाव लड़ने की नसीहत दी तो वहीं दूसरी तरफ इशारों-इशारों में वह चिराग पासवान और प्रशांत किशोर जैसे नेताओं पर भी बड़ी बात कह गए।
निशांत कुमार के शब्दों पर गौर कीजिएगा। उन्होंने कहा कि, "वे मीडिया के माध्यम से राज्य के तमाम युवाओं से आह्वान करते हैं कि पिताजी ने विकास किया है तो, उनके लिए वोट करें। पिछली बार लोगों ने उन्हें 43 सीटें दे दी, फिर भी उन्होंने विकास का क्रम रुकने नहीं दिया। इस बार सीट बढ़ना मांगता है, ताकि पिताजी आगे भी कार्य जारी रख सकें।" यह सब जानते हैं कि 2020 के पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीयू उम्मीदवारों को हराने में बड़ी भूमिका चिराग पासवान ने निभाई थी। चिराग पासवान ने 2020 के विधानसभा चुनाव में अपने आपको नरेंद्र मोदी का हुनमान बताते हुए नीतीश कुमार की पार्टी को 43 सीटों पर ला दिया था। इस बार कुछ उसी तरह की भूमिका निभाने की तैयारी प्रशांत किशोर करते हुए नजर आ रहे हैं।
निशांत कुमार जिस नपे-तुले शब्दों के साथ सधे हुए अंदाज में बयान दे रहे हैं, उससे यह साफ-साफ नजर आ रहा है कि एक-एक शब्द का चयन बहुत सावधानी से किया गया है। इसका सीधा मतलब यही निकलता है कि, कितने बड़े पैमाने पर तैयारी की जा रही है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में बिहार की जनता के सामने समाजवादी विचारधारा के आंदोलन से निकले एक और दिग्गज नेता के पुत्र अपने पिता के नाम पर वोट देने की गुहार लगाते नजर आ सकते हैं।
इराकी विदेश मंत्री, संयुक्त राष्ट्र दूत ने संयुक्त राष्ट्र मिशन पर चर्चा की
बगदाद। इराकी विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने गुरुवार को यहां इराक के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि मोहम्मद अल हसन के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन को वापस लेने और भविष्य में सहयोग पर चर्चा की गई।
इराकी विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, बैठक में अल हसन ने हुसैन को इराक के लिए संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमआई) के कार्यों और इस वर्ष के अंत तक मिशन के कार्यों की समाप्ति के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी प्रदान की।
मई 2024 में जारी किए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में इराकी सरकार के अनुरोध के बाद 31 दिसंबर, 2025 तक यूएनएएमआई की इराक से वापसी आवश्यक है।
इसके अलावा, दोनों पक्षों ने इराक की संयुक्त राष्ट्र के साथ भागीदारी को मजबूत करने और संगठन में इसकी उपस्थिति को बढ़ाने पर चर्चा की, विशेष रूप से इराक द्वारा संयुक्त राष्ट्र में विकासशील देशों का सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन ‘जी-77’ की अध्यक्षता संभालने के बाद।
बयान के अनुसार, हुसैन ने पिछले वर्षों में इराक की सहायता करने में यूएनएएमआई की भूमिका की सराहना की और विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र के साथ उत्पादक सहयोग जारी रखने के लिए इराक की इच्छा पर बल दिया।
बयान में कहा गया कि अपनी ओर से, अल हसन ने मिशन और इराकी सरकार के बीच रचनात्मक सहयोग की सराहना की और स्थिरता एवं विकास की दिशा में इराक का समर्थन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
विस्थापित अफगानों की मदद के लिए जापान और यूएनएचसीआर ने मिलाया हाथ
काबुल। जापान और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) ने जबरन विस्थापित और वापस लौटे अफगानों की मदद के काबुल में एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए। जापान सरकार और यूएनएचसीआर ने सोमवार को एक परियोजना के लिए 6 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत जबरन विस्थापित अफगानों, वापस लौट आए शरणार्थियों के साथ साथ-साथ उनका समर्थन करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण आजीविका के अवसरों उपलब्ध कराया जाएगा।
नई परियोजना की फंडिंग जापान सरकार ने जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के जरिए की है। यूएनएचसीआर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य स्थायी आय के अवसर प्रदान करना, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना, लोगों - विशेषकर महिलाओं को अपने भविष्य के बारे में निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाना है।
अफगानिस्तान में यूएनएचसीआर के प्रतिनिधि अराफात जमाल ने कहा, हम वापस लौटने वाले शरणार्थियों, जबरन विस्थापितों और मददगार लोगों की मदद के लिए इन महत्वपूर्ण प्रयासों पर जेआईसीए के साथ काम करके खुश हैं। अफगानिस्तान में जापान के राजदूत ताकायोशी कुरोमिया ने कहा, जापान सरकार अफगानिस्तान को समर्थन देना जारी रखेगी, विशेष रूप से कृषि और समुदाय आधारित बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के माध्यम से, जो समावेशी और टिकाऊ हैं तथा महिलाओं के लिए अवसर प्रदान करती हैं।
अपने देश में युद्ध और संघर्ष से भागकर, अफगानिस्तान के लोग दशकों से मुख्य रूप से पाकिस्तान और ईरान में शरण ले रहे हैं। हाल ही में, अफगान मीडिया रिपोर्टों ने ईरान और पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों की दुर्दशा को उजागर किया, जिसमें दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के कई मामले सामने आए और कई को जबरन निर्वासन का सामना करना पड़ा।
ट्रंप कैबिनेट का फैसला: विदेशी सहायता अनुबंधों में 90% की कटौती
वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका में ट्रंप सरकार सत्ता में आने के बाद एक के बाद एक ताबड़तोड़ फैसले ले रही है। ट्रम्प प्रशासन ने बुधवार को बताया कि वह अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए अमेरिकी एजेंसी के 90% से अधिक विदेशी सहायता अनुबंधों को समाप्त कर रहा है और दुनिया भर में कुल 60 अरब डॉलर की अमेरिकी सहायता को समाप्त कर रहा है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को यूरोपीय संघ से आयात पर 25% टैरिफ लगाने का भी एलान किया।
ट्रंप प्रशासन के हालिया कदमों के बाद USAID की कुछ ही परियोजनाएं बचेंगी। जिन्हें अधिवक्ता प्रशासन के साथ चल रही अदालती लड़ाइयों में बचाने का प्रयास कर सकेंगे। ट्रम्प प्रशासन ने एसोसिएटेड प्रेस की ओर से प्राप्त एक आंतरिक ज्ञापन और बुधवार को एक संघीय मुकदमे में प्रस्तुत दस्तावेजों में अपनी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।
बुधवार के खुलासे से यह भी पता चलता है कि प्रशासन विदेशों में अमेरिकी सहायता और विकास सहायता से किस हद तक पीछे हट रहा है। ट्रंप 2.0 ने अमेरिका की दशकों पुरानी नीति से भी पीछे हटने का फैसला किया है। अमेरिका की ओर से यह विदेशी सहायता अन्य देशों और अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर करके और गठबंधन बनाकर अमेरिकी हितों में मदद करने के लिए की जाती रही है।
यूएसएआईडी परियोजनाएं पैसे की बर्बादी: डोनाल्ड ट्रंप
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके सहयोगी एलन मस्क ने संघीय सरकार के आकार में कटौती करने के अपने प्रयास में विदेशी सहायता में किसी भी अन्य लक्ष्य की तुलना में अधिक कठोर और तेज गति से कटौती की है। दोनों का कहना है कि यूएसएआईडी परियोजनाएं उदारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाती हैं और पैसे की बर्बादी हैं।
ट्रम्प ने 20 जनवरी को आदेश दिया कि 90 दिनों तक कार्यक्रम-दर-कार्यक्रम समीक्षा की जाएगी कि कौन से विदेशी सहायता कार्यक्रम जारी रखने योग्य हैं, और लगभग रातोंरात सभी विदेशी सहायता निधियों को काट दिया। फंडिंग फ्रीज ने विदेशों में हजारों अमेरिकी वित्त पोषित कार्यक्रमों को रोक दिया है, क्योंकि प्रशासन और मस्क के सरकारी दक्षता विभाग की टीमों ने जबरन छुट्टी और बर्खास्तगी के माध्यम से यूएसएआईडी कर्मचारियों के बहुमत को नौकरी से हटा दिया है।
बुधवार को संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों में, यूएसएआईडी के साथ अनुबंधों पर बकाया गैर-लाभकारी संस्थाओं ने ट्रम्प के राजनीतिक नियुक्तियों और मस्क की टीम के सदस्यों का वर्णन किया है, जिन्होंने बिना किसी सार्थक समीक्षा के, दुनिया भर में यूएसएआईडी के अनुबंधों को बहुत तेज गति से समाप्त कर दिया। गैर-लाभकारी संगठनों के वकीलों ने यूएसएआईडी अधिकारी द्वारा सोमवार को कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल का हवाला देते हुए लिखा, "अभी और भी कई बर्खास्तगीयां होने वाली हैं, इसलिए कृपया तैयार रहें!" विदेश विभाग ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बर्खास्तगी की समीक्षा की है।
कुल मिलाकर, ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि वह 54 बिलियन डॉलर की कटौती के लिए 6,200 बहुवर्षीय यूएसएआईडी अनुबंध पुरस्कारों में से 5,800 को समाप्त कर देगा। 4.4 बिलियन डॉलर की कटौती के लिए 9,100 स्टेट डिपार्टमेंट अनुदानों में से 4,100 को समाप्त किया जा रहा है। वाशिंगटन फ्री बीकन ने सबसे पहले इस ज्ञापन के बारे में रिपोर्ट दी थी।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रशासन ने यह कदम संघीय अदालत के आदेश के बाद उठाया है, जिसमें अधिकारियों को बुधवार के अंत तक विदेशी सहायता निधि पर ट्रम्प प्रशासन की महीने भर की रोक हटाने का समय दिया गया था।
ज्ञापन में कहा गया है, "इसके जवाब में, राज्य और यूएसएआईडी ने तेजी से कदम उठाए," और बड़ी संख्या में यूएसएआईडी और राज्य विभाग के विदेशी सहायता कार्यक्रमों को अनुबंध समाप्ति के लिए लक्षित किया।
गैर-लाभकारी संगठनों, जिनमें हजारों ठेकेदार शामिल हैं, को रोक के शुरू होने के बाद से अरबों डॉलर का भुगतान बकाया है, ने सामूहिक रूप से अनुबंध समाप्ति को वित्तपोषण रोक को अस्थायी रूप से हटाने के आदेश का पालन करने से बचने के लिए एक चाल बताया है।
ट्रम्प प्रशासन के अधिकारियों ने - मामले में संघीय न्यायाधीश की बार-बार चेतावनी के बाद - बुधवार को यह भी कहा कि भुगतान पर एक महीने की रोक के बाद उन्होंने अंततः यूएसएआईडी बिलों का भुगतान फिर से शुरू कर दिया है, जिससे बकाया कुछ मिलियन बिलियन डॉलर का भुगतान हो गया है।
यूरोपीय संघ से आयात पर 25% टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि उनका प्रशासन जल्द ही यूरोपीय संघ से आयात पर 25% टैरिफ की घोषणा करेगा। ट्रम्प ने अपने मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान संवाददाताओं से कहा, "हमने निर्णय ले लिया है और हम शीघ्र ही इसकी घोषणा करेंगे, और सामान्य तौर पर यह 25% होगा और यह कारों और अन्य सभी चीजों पर लगेगा।"
यूरोपीय संघ ने यात्री कारों पर 10% टैरिफ लगाया है, जो अमेरिकी यात्री कार टैरिफ 2.5% से चार गुना ज़्यादा है। अमेरिकी अधिकारियों ने यूरोपीय मूल्य वर्धित करों के बारे में भी शिकायत की है जो कम से कम 17.5% है।
वेनेजुएला सरकार की तेल निर्यात करने की मंजूरी समाप्त
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी शेवरॉन कॉरपोरेशन को वेनेजुएला से तेल निकालने और निर्यात करने की अनुमति देने वाला अमेरिकी सरकार का परमिट इस सप्ताह समाप्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही दक्षिण अमेरिकी देश के लिए वित्तीय जीवनरेखा बन चुका यह परमिट भी समाप्त हो जाएगा।
ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल नेटवर्क पर घोषणा करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार पर पिछले वर्ष जुलाई में हुए राष्ट्रपति चुनाव के लिए लोकतांत्रिक शर्तों को पूरा नहीं करने तथा निर्वासन के लिए तैयार वेनेजुएला के अप्रवासियों को वापस भेजने के लिए पर्याप्त तेजी से कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया।
शिकागो परिषद के प्रतिनिधिमंडल से मिले राहुल
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शिकागो काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स के निदेशक मंडल के सदस्यों से मुलाकात की। कांग्रेस पार्टी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और नाटो में पूर्व अमेरिकी राजदूत इवो एच. डालडर ने किया।
शिकागो काउंसिल गैर लाभकारी वैश्विक स्तर का संगठन है और माना जाता है कि यह संगठन दुनिया के देशों के बीच नयी नयी जानकारी को साझा करने और परस्पर सहयोग को बढ़ाने को समर्पित है। सूत्रों के अनुसार बाद में इस प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा अन्य कई नेताओं से भी मुलाकात की है।
सीएम योगी ने संगम तट पर प्रारंभ किया स्वच्छता अभियान
महाकुंभ नगर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार सुबह महाकुंभ 2025 की औपचारिक पूर्णाहुति के लिए प्रयागराज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने महाकुंभ नगर के अरैल घाट पर सफाईकर्मियों के साथ मिलकर सफाई की और गंगा तट पर मंत्रियों के साथ श्रमदान किया। वहीं, जल में मौजूद छोड़े गए वस्त्रों को निकालकर महाकुंभ के उपरांत पूरे मेला क्षेत्र की स्वच्छता के लिए अभियान का शुभारंभ किया।
सीएम योगी ने स्वच्छता अभियान से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं प्रतिबद्ध स्वच्छता दूतों की सतत सेवा से स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित महाकुंभ-2025 प्रयागराज की परिकल्पना सिद्ध हुई है। आज प्रयागराज के अरैल घाट पर स्वच्छता अभियान में अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ सहभाग किया। महाकुंभ-2025, प्रयागराज के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी महानुभावों का हार्दिक आभार एवं अभिनंदन।
सफाई कार्य के बाद सीएम योगी अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ फ्लोटिंग जेटी के जरिए संगम के लिए रवाना हुए। इस दौरान उन्होंने जेटी से साइबेरियन पक्षियों को दाना खिलाया। संगम पहुंचकर सीएम योगी ने मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य रूप में मौजूद मां सरस्वती का विधिवत पूजन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने मंत्रियों के साथ मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर विधि-विधान से मां की आरती उतारी और लोक कल्याण की कामना की। सीएम योगी ने संगम स्नान को आए श्रद्धालुओं का भी अभिवादन किया।
इस अवसर पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, राकेश सचान, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, अनिल राजभर, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, डीजीपी प्रशांत कुमार और प्रमुख सचिव गृह एवं सूचना संजय प्रसाद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री दिनभर महाकुंभ नगर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वे महाकुंभ को ऐतिहासिक, दिव्य, भव्य, स्वच्छ, सुरक्षित और डिजिटल बनाने में योगदान देने वाले कर्मचारियों और संस्थाओं से मुलाकात करेंगे और उन्हें सम्मानित करेंगे। शाम को सीएम योगी पुलिसकर्मियों से भी संवाद करेंगे और सुरक्षित महाकुंभ के लिए उनका आभार प्रकट करेंगे। इसके अलावा, महाकुंभ की व्यवस्था में लगे अधिकारियों और मेला प्रशासन से जुड़े लोगों के साथ भी उनकी बैठक प्रस्तावित है।
चार राज्यों में किसान कांग्रेस के नए अध्यक्ष नियुक्त
छत्तीसगढ़ में अभिषेक मिश्रा को मिली कमान
नई दिल्ली। अखिल भारतीय किसान कांग्रेस ने चार राज्यों में संगठनात्मक बदलाव करते हुए नए अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को इस निर्णय की जानकारी दी।
जानकारी के अनुसार, कामना प्रभाकर राव को आंध्र प्रदेश, अभिषेक मिश्रा को छत्तीसगढ़, धर्मेंद्र सिंह चौहान को मध्य प्रदेश और अशोक कुमार बैद्य को त्रिपुरा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
कांग्रेस के इस कदम को आगामी चुनावी तैयारियों के मद्देनजर संगठन को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
भीड़ ने बदली रामलला की दिनचर्या, प्रतिदिन 19 घंटे भक्तों को दे रहे हैं दर्शन
अयोध्या। महाकुंभ शुरू होने के बाद रिकॉर्ड संख्या में लोग अयोध्या पहुंच रहे हैं। इस बीच इतनी भीड़ आ जाएगी इसकी कल्पना मंदिर ट्रस्ट ने भी नहीं की थी। पिछले एक माह से आ रही अप्रत्याशित भीड़ ने रामलला की दिनचर्या बदल दी है। मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक रामलला के दरबार में सवा करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई है। अधिक से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर सकें इसलिए मंदिर सुबह पांच बजे से रात 12 बजे तक खोला जा रहा है। रामलला प्रतिदिन 19 घंटे भक्तों को दर्शन दे रहे हैं।
रामलला के दरबार में रोजाना साढ़े तीन से चार लाख श्रद्धालु हाजिरी लगा रहे हैं। ट्रस्ट की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार मकर संक्रांति 14 जनवरी से 26 फरवरी महाशिवरात्रि तक रामलला के दरबार में 1.26 करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया है। राम मंदिर में निरंतर उमड़ रही भीड़ ने रामलला की पूरी दिनचर्या को प्रभावित कर रखा है।
पुजारियों का कहना है कि रामलला की आरती, राग-भोग के दौरान भी मंदिर बंद नहीं हो पा रहा है। बताया गया कि इस समय रामलला को सुबह चार बजे ही जगाया जाता है। इसके बाद उनकी मंगला व श्रृंगार आरती होती है। सुबह पांच बजे से मंदिर दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। श्रद्धालुओं में दर्शन की ललक इस कदर है कि रात दो बजे से दर्शनपथ पर श्रद्धालु जुटने लगते हैं। दोपहर की आरती के दौरान भी दर्शन चलता रहता है। केवल पांच से 10 मिनट के पर्दा लगाकर रामलला को भोग अर्पित किया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु मंदिर में कतारबद्ध रहते हैं।
18 से 19 घंटे खुल रहा है मंदिर
पहले दोपहर भोग आरती के लिए मंदिर एक घंटे के लिए बंद किया जाता था। यही स्थिति संध्या आरती के दौरान भी रहती है। राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी श्रद्धालुओं की भीड़ को अप्रत्याशित बताते हैं। उनका कहना है कि रामलला को ठीक से विश्राम नहीं मिल पा रहा है, मंदिर 18 से 19 घंटे खोलना पड़ रहा है, यह स्थिति व्यवहारिक नहीं है।
महाशिवरात्रि पर शिवमय हुई राम नगरी
सर्वार्थ सिद्धि व त्रिग्रही योग के दुर्लभ संयोग में महाशिवरात्रि पर रामनगरी ब्रह्ममुहूर्त से ही बमबम करने लगी। घाट से लेकर मठ-मंदिरों तक हर-हर महादेव की गूंज... शिवालयों में पूजन सामग्री से सजी थाली लेकर कतारबद्ध भक्त और श्रद्धालुओं से पटी अयोध्या। बुधवार को रामनगरी में यह दृश्य आस्था का चरम प्रदर्शित कर रहा था। रामधुन में लीन रहने वाली अयोध्या पूरी तरह से शिवमय नजर आई। प्रशासन के मुताबिक करीब पांच लाख भक्तों ने जलाभिषेक, पूजन किया। महाशिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुई शिवालयों सहित अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन का सिलसिला दिन भर चलता रहा।
अधिकतर ने भोले के मंदिर पर दस्तक देने से पूर्व सरयू में स्नान किया। इसी के साथ ही आस्था का प्रवाह शिव मंदिरों की ओर निकल पड़ा। हालांकि रामपथ पर बैरिकेडिंग के चलते श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। नागेश्वरनाथ तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को टेढ़ी बाजार के पीछे से होते हुए करीब चार किलोमीटर तक चलना पड़ा। क्षीरेश्वरनाथ पहुंचने के लिए यह दूरी बढ़कर पांच किलोमीटर हो गई। जैसे ही श्रद्धालु भोलेबाबा की चौखट पर पहुंचे और उनके कानों में हर-हर महादेव की गूंज पहुंची तो उनकी सारी थकान दूर होती नजर आई। क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में राम मंदिर के दर्शनार्थी भी खूब उमड़े। दर्शनार्थियों ने रामलला के साथ भोलेबाबा की भी पूजा-अर्चना की। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। सीसीटीवी से मेला क्षेत्र की निगरानी होती रही। मंडलायुक्त गौरव दयाल, आईजी प्रवीण कुमार, एसएसपी राजकरण नय्यर ने मेला क्षेत्र का भ्रमण कर व्यवस्थाओं को परखा।
महाकुंभ ने भारत की विकास यात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया : पीएम मोदी
प्रयागराज में संपन्न हुए महाकुंभ को लेकर प्रधानमंत्री ने एक ब्लॉग लिखा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रयागराज में संपन्न हुए महाकुंभ को लेकर एक ब्लॉग लिखा। प्रधानमंत्री ने इस भव्य आयोजन को युग परिवर्तन की आहट करार दिया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने भारत की विकास यात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया है और यह संदेश है 'विकसित भारत' का। उन्होंने इस आयोजन को एकता का महाकुंभ करार देते हुए कहा कि समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र के लोग इस महाकुंभ में एक हो गए। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए देशवासियों की ओर से किए परिश्रम से अभीभूत पीएम मोदी सोमनाथ के दर्शन के लिए जाएंगे और हर भारतीय के लिए प्रार्थना करेंगे।
पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा, 'महाकुंभ संपन्न हुआ। एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में पूरे 45 दिनों तक जिस प्रकार 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ, एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ी, वो अभिभूत करता है! महाकुंभ के पूर्ण होने पर जो विचार मन में आए, उन्हें मैंने कलमबद्ध करने का प्रयास किया है…'
आइए पढ़ते हैं पीएम मोदी का पूरा ब्लॉग
पीएम मोदी ने लिखा, 'महाकुंभ संपन्न हुआ। एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वो सैकड़ों साल की गुलामी की मानसिकता के सारे बंधनों को तोड़कर नव चैतन्य के साथ हवा में सांस लेने लगता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है, जैसा हमने 13 जनवरी के बाद से प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में देखा।'
उन्होंने लिखा, '22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मैंने देवभक्ति से देशभक्ति की बात कही थी। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान सभी देवी-देवता जुटे, संत-महात्मा जुटे, बाल-वृद्ध जुटे, महिलाएं-युवा जुटे, और हमने देश की जागृत चेतना का साक्षात्कार किया। ये महाकुंभ एकता का महाकुंभ था, जहां 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ गई थी।'
उन्होंने लिखा, 'तीर्थराज प्रयाग के इसी क्षेत्र में एकता, समरसता और प्रेम का पवित्र क्षेत्र श्रृंगवेरपुर भी है, जहां प्रभु श्रीराम और निषादराज का मिलन हुआ था। उनके मिलन का वो प्रसंग भी हमारे इतिहास में भक्ति और सद्भाव के संगम की तरह ही है। प्रयागराज का ये तीर्थ आज भी हमें एकता और समरसता की वो प्रेरणा देता है।'
पीएम मोदी ने लिखा, 'बीते 45 दिन, प्रतिदिन, मैंने देखा, कैसे देश के कोने-कोने से लाखों-लाख लोग संगम तट की ओर बढ़े जा रहे हैं। संगम पर स्नान की भावनाओं का ज्वार, लगातार बढ़ता ही रहा। हर श्रद्धालु बस एक ही धुन में था- संगम में स्नान। मां गंगा, यमुना, सरस्वती की त्रिवेणी हर श्रद्धालु को उमंग, ऊर्जा और विश्वास के भाव से भर रही थी। प्रयागराज में हुआ महाकुंभ का ये आयोजन, आधुनिक युग के मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए, प्लानिंग और पॉलिसी एक्सपर्ट्स के लिए, नए सिरे से अध्ययन का विषय बना है। आज पूरे विश्व में इस तरह के विराट आयोजन की कोई दूसरी तुलना नहीं है, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण भी नहीं है। पूरी दुनिया हैरान है कि कैसे एक नदी तट पर, त्रिवेणी संगम पर इतनी बड़ी संख्या में करोड़ों की संख्या में लोग जुटे। इन करोड़ों लोगों को ना औपचारिक निमंत्रण था, ना ही किस समय पहुंचना है, उसकी कोई पूर्व सूचना थी। बस, लोग महाकुंभ चल पड़े...और पवित्र संगम में डुबकी लगाकर धन्य हो गए।'
उन्होंने लिखा, 'मैं वो तस्वीरें भूल नहीं सकता...स्नान के बाद असीम आनंद और संतोष से भरे वो चेहरे नहीं भूल सकता। महिलाएं हों, बुजुर्ग हों, हमारे दिव्यांग जन हों, जिससे जो बन पड़ा, वो साधन करके संगम तक पहुंचा। मेरे लिए ये देखना बहुत ही सुखद रहा कि बहुत बड़ी संख्या में भारत की आज की युवा पीढ़ी प्रयागराज पहुंची। भारत के युवाओं का इस तरह महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए आगे आना, एक बहुत बड़ा संदेश है। इससे ये विश्वास दृढ़ होता है कि भारत की युवा पीढ़ी हमारे संस्कार और संस्कृति की वाहक है और इसे आगे ले जाने का दायित्व समझती है और इसे लेकर संकल्पित भी है, समर्पित भी है। इस महाकुंभ में प्रयागराज पहुंचने वालों की संख्या ने निश्चित तौर पर एक नया रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन इस महाकुंभ में हमने ये भी देखा कि जो प्रयाग नहीं पहुंच पाए, वो भी इस आयोजन से भाव-विभोर होकर जुड़े। कुंभ से लौटते हुए जो लोग त्रिवेणी तीर्थ का जल अपने साथ लेकर गए, उस जल की कुछ बूंदों ने भी करोड़ों भक्तों को कुंभ स्नान जैसा ही पुण्य दिया। कितने ही लोगों का कुंभ से वापसी के बाद गांव-गांव में जो सत्कार हुआ, जिस तरह पूरे समाज ने उनके प्रति श्रद्धा से सिर झुकाया, वो अविस्मरणीय है।'
उन्होंने लिखा, 'उस जल की कुछ बूंदों ने भी करोड़ों भक्तों को कुंभ स्नान जैसा ही पुण्य दिया। कितने ही लोगों का कुंभ से वापसी के बाद गांव-गांव में जो सत्कार हुआ, जिस तरह पूरे समाज ने उनके प्रति श्रद्धा से सिर झुकाया, वो अविस्मरणीय है। ये कुछ ऐसा हुआ है, जो बीते कुछ दशकों में पहले कभी नहीं हुआ। ये कुछ ऐसा हुआ है, जो आने वाली कई-कई शताब्दियों की एक नींव रख गया है। प्रयागराज में जितनी कल्पना की गई थी, उससे कहीं अधिक संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे। इसकी एक वजह ये भी थी कि प्रशासन ने भी पुराने कुंभ के अनुभवों को देखते हुए ही अंदाजा लगाया था। लेकिन अमेरिका की आबादी के करीब दोगुने लोगों ने एकता के महाकुंभ में हिस्सा लिया, डुबकी लगाई। आध्यात्मिक क्षेत्र में रिसर्च करने वाले लोग करोड़ों भारतवासियों के इस उत्साह पर अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि अपनी विरासत पर गौरव करने वाला भारत अब एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। मैं मानता हूं, ये युग परिवर्तन की वो आहट है, जो भारत का नया भविष्य लिखने जा रही है।'
पीएम मोदी ने लिखा, 'साथियों, महाकुंभ की इस परंपरा से, हजारों वर्षों से भारत की राष्ट्रीय चेतना को बल मिलता रहा है। हर पूर्णकुंभ में समाज की उस समय की परिस्थितियों पर ऋषियों-मुनियों, विद्वत् जनों द्वारा 45 दिनों तक मंथन होता था। इस मंथन में देश को, समाज को नए दिशा-निर्देश मिलते थे। इसके बाद हर 6 वर्ष में अर्धकुंभ में परिस्थितियों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा होती थी। 12 पूर्णकुंभ होते-होते, यानि 144 साल के अंतराल पर जो दिशा-निर्देश, जो परंपराएं पुरानी पड़ चुकी होती थीं, उन्हें त्याग दिया जाता था, आधुनिकता को स्वीकार किया जाता था और युगानुकूल परिवर्तन करके नए सिरे से नई परंपराओं को गढ़ा जाता था। 144 वर्षों के बाद होने वाले महाकुंभ में ऋषियों-मुनियों द्वारा, उस समय-काल और परिस्थितियों को देखते हुए नए संदेश भी दिए जाते थे। अब इस बार 144 वर्षों के बाद पड़े इस तरह के पूर्ण महाकुंभ ने भी हमें भारत की विकासयात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया है। ये संदेश है- विकसित भारत का।
उन्होंने लिखा, 'जिस तरह एकता के महाकुंभ में हर श्रद्धालु, चाहे वो गरीब हों या संपन्न हों, बाल हो या वृद्ध हो, देश से आया हो या विदेश से आया हो, गांव का हो या शहर का हो, पूर्व से हो या पश्चिम से हो, उत्तर से हो दक्षिण से हो, किसी भी जाति का हो, किसी भी विचारधारा का हो, सब एक महायज्ञ के लिए एकता के महाकुंभ में एक हो गए। एक भारत-श्रेष्ठ भारत का ये चिर स्मरणीय दृश्य, करोड़ों देशवासियों में आत्मविश्वास के साक्षात्कार का महापर्व बन गया। अब इसी तरह हमें एक होकर विकसित भारत के महायज्ञ के लिए जुट जाना है।'
पीएम मोदी ने लिखा, 'साथियों, आज मुझे वो प्रसंग भी याद आ रहा है जब बालक रूप में श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को अपने मुख में ब्रह्मांड के दर्शन कराए थे। वैसे ही इस महाकुंभ में भारतवासियों ने और विश्व ने भारत के सामर्थ्य के विराट स्वरूप के दर्शन किए हैं। हमें अब इसी आत्मविश्वास से एक निष्ठ होकर, विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना है। भारत की ये एक ऐसी शक्ति है, जिसके बारे में भक्ति आंदोलन में हमारे संतों ने राष्ट्र के हर कोने में अलख जगाई थी। विवेकानंद हों या श्री ऑरोबिंदो हों, हर किसी ने हमें इसके बारे में जागरूक किया था। इसकी अनुभूति गांधी जी ने भी आजादी के आंदोलन के समय की थी। आजादी के बाद भारत की इस शक्ति के विराट स्वरूप को यदि हमने जाना होता, और इस शक्ति को सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की ओर मोड़ा होता, तो ये गुलामी के प्रभावों से बाहर निकलते भारत की बहुत बड़ी शक्ति बन जाती। लेकिन हम तब ये नहीं कर पाए। अब मुझे संतोष है, खुशी है कि जनता जनार्दन की यही शक्ति, विकसित भारत के लिए एकजुट हो रही है।'
उन्होंने लिखा, 'वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक, भारत की महान परंपराओं ने इस राष्ट्र को गढ़ा है। मेरी कामना है, एक नागरिक के नाते, अनन्य भक्ति भाव से, अपने पूर्वजों का, हमारे ऋषियों-मुनियों का पुण्य स्मरण करते हुए, एकता के महाकुंभ से हम नई प्रेरणा लेते हुए, नए संकल्पों को साथ लेकर चलें। हम एकता के महामंत्र को जीवन मंत्र बनाएं, देश सेवा में ही देव सेवा, जीव सेवा में ही शिव सेवा के भाव से स्वयं को समर्पित करें।'
पीएम मोदी ने लिखा, 'साथियों, जब मैं काशी चुनाव के लिए गया था, तो मेरे अंतरमन के भाव शब्दों में प्रकट हुए थे, और मैंने कहा था- मां गंगा ने मुझे बुलाया है। इसमें एक दायित्व बोध भी था, हमारी मां स्वरूपा नदियों की पवित्रता को लेकर, स्वच्छता को लेकर। प्रयागराज में भी गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर मेरा ये संकल्प और दृढ़ हुआ है। गंगा जी, यमुना जी, हमारी नदियों की स्वच्छता हमारी जीवन यात्रा से जुड़ी है। हमारी जिम्मेदारी बनती है कि नदी चाहे छोटी हो या बड़ी, हर नदी को जीवनदायिनी मां का प्रतिरूप मानते हुए हम अपने यहां सुविधा के अनुसार, नदी उत्सव जरूर मनाएं। ये एकता का महाकुंभ हमें इस बात की प्रेरणा देकर गया है कि हम अपनी नदियों को निरंतर स्वच्छ रखें, इस अभियान को निरंतर मजबूत करते रहें।'
उन्होंने आगे लिखा, 'मैं जानता हूं, इतना विशाल आयोजन आसान नहीं था। मैं प्रार्थना करता हूं मां गंगा से...मां यमुना से...मां सरस्वती से...हे मां हमारी आराधना में कुछ कमी रह गई हो तो क्षमा करिएगा...। जनता जनार्दन, जो मेरे लिए ईश्वर का ही स्वरूप है, श्रद्धालुओं की सेवा में भी अगर हमसे कुछ कमी रह गई हो, तो मैं जनता जनार्दन का भी क्षमाप्रार्थी हूं।'
पीएम मोदी ने लिखा, 'साथियों, श्रद्धा से भरे जो करोड़ों लोग प्रयाग पहुंचकर इस एकता के महाकुंभ का हिस्सा बने, उनकी सेवा का दायित्व भी श्रद्धा के सामर्थ्य से ही पूरा हुआ है। यूपी का सांसद होने के नाते मैं गर्व से कह सकता हूं कि योगी जी के नेतृत्व में शासन, प्रशासन और जनता ने मिलकर, इस एकता के महाकुंभ को सफल बनाया। केंद्र हो या राज्य हो, यहां ना कोई शासक था, ना कोई प्रशासक था, हर कोई श्रद्धा भाव से भरा सेवक था। हमारे सफाईकर्मी, हमारे पुलिसकर्मी, नाविक साथी, वाहन चालक, भोजन बनाने वाले, सभी ने पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से निरंतर काम करके इस महाकुंभ को सफल बनाया। विशेषकर, प्रयागराज के निवासियों ने इन 45 दिनों में तमाम परेशानियों को उठाकर भी जिस तरह श्रद्धालुओं की सेवा की है, वह अतुलनीय है। मैं प्रयागराज के सभी निवासियों का, यूपी की जनता का आभार व्यक्त करता हूं, अभिनंदन करता हूं।'
अंत में पीएम मोदी ने लिखा, 'साथियों, महाकुंभ के दृश्यों को देखकर, बहुत प्रारंभ से ही मेरे मन में जो भाव जगे, जो पिछले 45 दिनों में और अधिक पुष्ट हुए हैं, राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर मेरी आस्था, अनेक गुना मजबूत हुई है। 140 करोड़ देशवासियों ने जिस तरह प्रयागराज में एकता के महाकुंभ को आज के विश्व की एक महान पहचान बना दिया, वो अद्भुत है। देशवासियों के इस परिश्रम से, उनके प्रयास से, उनके संकल्प से अभीभूत मैं जल्द ही द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग, श्री सोमनाथ के दर्शन करने जाऊंगा और श्रद्धा रूपी संकल्प पुष्प को समर्पित करते हुए हर भारतीय के लिए प्रार्थना करूंगा। महाकुंभ का स्थूल स्वरूप महाशिवरात्रि को पूर्णता प्राप्त कर गया है। लेकिन मुझे विश्वास है, मां गंगा की अविरल धारा की तरह, महाकुंभ की आध्यात्मिक चेतना की धारा और एकता की धारा निरंतर बहती रहेगी।'
विस्थापित अफगानों की मदद के लिए जापान और यूएनएचसीआर ने मिलाया हाथ
काबुल। जापान और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) ने जबरन विस्थापित और वापस लौटे अफगानों की मदद के काबुल में एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए। जापान सरकार और यूएनएचसीआर ने सोमवार को एक परियोजना के लिए 6 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत जबरन विस्थापित अफगानों, वापस लौट आए शरणार्थियों के साथ साथ-साथ उनका समर्थन करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण आजीविका के अवसरों उपलब्ध कराया जाएगा।
नई परियोजना की फंडिंग जापान सरकार ने जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के जरिए की है। यूएनएचसीआर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य स्थायी आय के अवसर प्रदान करना, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना, लोगों - विशेषकर महिलाओं को अपने भविष्य के बारे में निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाना है।
अफगानिस्तान में यूएनएचसीआर के प्रतिनिधि अराफात जमाल ने कहा, हम वापस लौटने वाले शरणार्थियों, जबरन विस्थापितों और मददगार लोगों की मदद के लिए इन महत्वपूर्ण प्रयासों पर जेआईसीए के साथ काम करके खुश हैं। अफगानिस्तान में जापान के राजदूत ताकायोशी कुरोमिया ने कहा, जापान सरकार अफगानिस्तान को समर्थन देना जारी रखेगी, विशेष रूप से कृषि और समुदाय आधारित बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के माध्यम से, जो समावेशी और टिकाऊ हैं तथा महिलाओं के लिए अवसर प्रदान करती हैं।
अपने देश में युद्ध और संघर्ष से भागकर, अफगानिस्तान के लोग दशकों से मुख्य रूप से पाकिस्तान और ईरान में शरण ले रहे हैं। हाल ही में, अफगान मीडिया रिपोर्टों ने ईरान और पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों की दुर्दशा को उजागर किया, जिसमें दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के कई मामले सामने आए और कई को जबरन निर्वासन का सामना करना पड़ा।
दो मई को खुलेंगे 11वें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ धाम के कपाट
उखीमठ। विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट इस वर्ष ग्रीष्मकालीन दर्शनार्थ आगामी दो मई को प्रात: सात बजे, बैशाख, मास, मिथुन राशि, वृष लग्न में विधि- विधान से खुलेंगे। इससे पूर्व, 27 अप्रैल को भगवान भैरवनाथ जी की पूजा होगी। जबकि बाबा केदार की पंच मुखी डोली 28 अप्रैल को श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ से केदारनाथ धाम प्रस्थान करेगी।
बुधवार को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर, श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में श्री केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग, केदारनाथ, विधायक आशा नौटियाल, दायित्वधारी चंडीप्रसाद भट्ट एवं श्री बदरीनाथ - केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल सहित पंचगाई समिति के पदाधिकारियों, तथा सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धर्माचार्यों, वेदपाठियों द्वारा पंचाग गणना पश्चात विधि- विधान से श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि निश्चित हुई।
इस अवसर पर श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया था। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुजन श्री ओंकारेश्वर मंदिर दर्शन को पहुंचे। भगवान भोलेनाथ के भजन, कीर्तन का आयोजन भी हुआ तथा श्रद्धालुओं ने प्रसाद वितरण किया।
इसके साथ ही, भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली के श्री केदारनाथ धाम प्रस्थान का कार्यक्रम भी घोषित हो गया।
बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया कि कपाट खुलने की तिथि तय होने के साथ ही भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली के श्री केदारनाथ धाम प्रस्थान का कार्यक्रम भी घोषित हो गया। जिसके अनुसार, 27 अप्रैल को भगवान भैरवनाथ जी की पूजा-अर्चना होगी। श्री केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली 28 अप्रैल को श्री ओंकारेश्वर मंदिर से प्रस्थान कर रात्रि प्रवास के लिए प्रथम पड़ाव श्री विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। आगामी 29 अप्रैल को यहां से रात्रि प्रवास को द्वितीय पड़ाव फाटा को प्रस्थान होगी।
30 अप्रैल फाटा से रात्रि प्रवास के लिए तृतीय पड़ाव गौरादेवी मंदिर, गौरीकुंड पहुंचेगी। एक मई शाम को भगवान केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली श्री केदारनाथ धाम पहुंच जायेगी। जबकि दो मई, शुक्रवार को प्रात: सात बजे वृष लग्न में श्री केदारनाथ धाम के कपाट तीर्थयात्रियों के दर्शनार्थ खुलेंगे।
उल्लेखनीय है कि इस यात्रा वर्ष श्री बदरीनाथ धाम के कपाट चार मई को प्रात: छह बजे खुलेंगे तथा परंपरागत रूप से श्री गंगोत्री यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया को खुलते है। इस वर्ष अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को है।
मणिपुर में जनता ने 87 हथियारों को किया सरेंडर
इंफाल। मणिपुर में चुराचांदपुर, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, थौबल, कांगपोकपी, जिरीबाम और इंफाल पश्चिम जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान जनता ने स्वेच्छा से कुल 87 विभिन्न प्रकार के हथियार, गोला-बारूद और अन्य विविध वस्तुएं पुलिस के समक्ष समर्पण किये हैं। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के सामने समर्पण किये गये हथियारों में खाली मैगजीन के साथ छह 7.62 मिमी सेल्फ-लोडिंग राइफलें (एसएलआर), बिना पंजीकरण संख्या के इंसास 5.56 एलएमजी, एम-79 40 मिमी लाठी यूबीजीएल बंदूक (पाकिस्तान में निर्मित) शामिल हैं।
इजरायल ने सीरिया में फिर मचाई तबाही, लड़ाकू विमानों ने राजधानी दमिश्क के पास बरसाए बम
दमिश्क । इजरायल के लड़ाकू विमानों ने मंगलवार 25 फरवरी की देर रात सीरिया की राजधानी के दक्षिण में एक शहर और दक्षिणी प्रांत दारा पर हवाई हमले किए। सुरक्षा सूत्रों और स्थानीय प्रसारक सीरिया टीवी ने बताया कि मंगलवार देर रात सीरिया की राजधानी में कई धमाके सुने गए। इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने एयर स्ट्राइक की पुष्टि की है। काट्ज ने कहा कि हमले इसलिए किए गए ताकि सीरियाई बल या दूसरे आतंकवादी समूह दक्षिण सीरिया में आईडीएफ के बफर जोन का उल्लंघन ना करें।
इजरायली सेना ने क्या कहा
इजरायली सेना ने इन हमलों को लेकर कहा कि पिछले कुछ घंटों में आईडीएफ ने दक्षिणी सीरिया में सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसमें कमांड सेंटर और हथियार रखने वाली कई जगहें शामिल हैं। सीरिया के दक्षिणी हिस्से में सैन्य बलों और संपत्तियों की मौजूदगी इजरायली नागरिकों के लिए खतरा पैदा करती है। इजरायलियों के लिए किसी भी खतरे को दूर करने के लिए आईडीएफ काम करना जारी रखेगा।
मिलिट्री साइट को बनाया गया निशाना
सीरिया टीवी ने कहा कि इजरायली विमानों ने दमिश्क से लगभग 20 किलोमीटर दूर दक्षिण में किस्वाह शहर पर भी हमला किया। इस दौरान एक मिलिट्री साइट को निशाना बनाया गया। सीरिया से आ रही रिपोर्टों से पता चलता है कि हमले में दो लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए हैं। दमिश्क के बाहरी इलाके में सैन्य वाहनों को भी निशाना बनाया गया है।
नेतन्याहू ने क्या कहा था?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में कहा था कि इजरायल दक्षिणी सीरिया में एचटीएस या देश के नए शासकों से संबद्ध किसी भी अन्य ताकत की उपस्थिति को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने इस क्षेत्र को विसैन्यीकृत किए जाने की मांग भी की थी।
ट्रंप ने प्रवासियों को लेकर बनाई नई योजना, अमेरिका 5 मिलियन डॉलर में बेचेगा नागरिकता
अमेरिकी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई 'गोल्ड कार्ड' स्कीम का ऐलान कया है। इस स्कीम के तहत प्रवासी 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (43 करोड़ से ज्यादा भारतीय रुपये) का भुगतान करके इस खास कार्ड को हासिल कर सकते हैं। यह गोल्ड कार्ड ग्रीन कार्ड का प्रीमियम वर्जन है और इससे अमेरिकी नागरिकता हासिल करने में सहूलियतें हासिल होंगी।
ओवल ऑफिस में वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के साथ कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करते हुए, ट्रंप ने कहा,'हम एक गोल्ड कार्ड बेचने जा रहे हैं। आपके पास ग्रीन कार्ड है, यह एक गोल्ड कार्ड है। हम इस कार्ड की कीमत लगभग 5 मिलियन डॉलर रखेंगे और यह आपको ग्रीन कार्ड की सुविधाओं के साथ-साथ कुछ और भी लाभ देगा। उन्होंने आगे बताया कि यह योजना दो हफ्ते में शुरू होगी।
लुटनिक ने कहा है कि नई ‘गोल्ड कार्ड’ पहल मौजूदा EB-5 कार्यक्रम की जगह ले सकती है, जो अप्रवासी निवेशकों को अमेरिकी व्यवसायों में निवेश करके ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की अनुमति देती है। उन्होंने कहा कि ‘गोल्ड कार्ड’ के लिए धन सीधे सरकार को जा सकता है। हम EB-5 कार्यक्रम को समाप्त करने जा रहे हैं। हम इसे गोल्ड कार्ड से बदलने जा रहे हैं।
कार्यक्रम कैसे लागू होगा?
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमीर लोग इस कार्ड को खरीदकर हमारे देश में आएंगे। वो अमीर और सफल होंगे, वो बहुत सारा पैसा खर्च करेंगे और टैक्स का भुगतान करेंगे और बहुत से लोगों को रोजगार देंगे। कार्यक्रम को कैसे लागू किया जाएगा फिलहाल इसे लेकर विवरण अभी पूरी तरह से सामने नहीं आया है।