बालोद। जिले में तेजी से सिमटते जंगल और बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष का खौफनाक चेहरा एक बार फिर सामने आया है। गुरूर विकासखंड के ग्राम भानपुरी में खेत से लौट रहे एक किसान दंपत्ति पर जंगली सुअर ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। यह ताज़ा घटना सिर्फ एक हादसा भर नहीं, बल्कि इस कड़वी हकीकत का प्रमाण है कि अब गांवों में किसान अपनी सुरक्षा के लिए खुद मोर्चा संभालने को मजबूर हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, किसान दंपत्ति रोज़ की तरह खेत से घर लौट रहे थे कि रास्ते में झाड़ियों से निकले जंगली सुअर ने उन पर बेरहमी से हमला बोल दिया। पहले ही वार में दोनों ज़मीन पर गिर पड़े, लेकिन जान बचाने की जद्दोजहद में उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और डंडों व उपलब्ध साधनों के सहारे डटकर मुकाबला किया। लहूलुहान हालत में भी पति–पत्नी ने साहस दिखाते हुए आखिरकार जंगली सुअर को वहीं ढेर कर दिया। यह मंजर देख रहे ग्रामीणों ने भी बाद में मौके पर पहुंचकर घायलों को संभाला।
घटना की सूचना मिलते ही ग्राम भानपुरी के सरपंच डाकेश साहू ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तुरंत अपना निजी वाहन उपलब्ध कराया। ग्रामीणों की मदद से घायल दंपत्ति को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरूर पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने हालत गंभीर होने के चलते उन्हें बेहतर इलाज के लिए धमतरी रेफर कर दिया। वक्त पर हुए इंतज़ाम ने निश्चित रूप से दोनों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन इसी के साथ कई कड़े सवाल भी खड़े हो गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वन विभाग कर क्या रहा है? बालोद जिले में हाथी, बंदर और जंगली सुअर जैसे वन्यजीवों का खेतों और गांवों में घुसकर फसलों को बर्बाद करना और लोगों पर हमला करना अब आम बात होती जा रही है। रोज़–रोज़ ऐसी घटनाएं सामने आने के बावजूद वन विभाग की भूमिका अक्सर “घटना के बाद कागजी खानापूर्ति” तक सीमित रह जाती है। गुरूर वन परिक्षेत्र अधिकारी पर ग्रामीण खास तौर पर नाराज़ हैं, उनका आरोप है कि वे फील्ड में कम और फाइलों में ज़्यादा दिखते हैं। हालात यह हैं कि गांवों में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ने पर भी न तो नियमित गश्त दिखती है, न ही कोई ठोस निवारक पहल।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास लगातार नष्ट हो रहा है, तो इनका गांवों की ओर रुख करना स्वाभाविक है। ऐसे संवेदनशील दौर में वन विभाग से ठोस योजना, समय पर चेतावनी, फेंसिंग, मुआवजा और रेस्क्यू जैसी व्यवस्थाएं उम्मीद की जाती हैं, पर हकीकत में उन्हें सिर्फ आश्वासन और जांच की बात सुनने को मिलती है। स्थानीय लोग तीखे शब्दों में आरोप लगाते हैं कि गुरूर वन परिक्षेत्र अधिकारी और उनका तंत्र या तो कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है, या फिर जंगल की रक्षा से ज़्यादा ध्यान अवैध लकड़ी कारोबारियों से नज़दीकियां निभाने और वसूली पर केंद्रित है।
भानपुरी की यह घटना एक कड़वी चेतावनी है कि यदि समय रहते वन्यजीव प्रबंधन, जंगलों की सुरक्षा और ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा तंत्र मजबूत करने के लिए गंभीर और सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में ऐसे हमले और भी ज्यादा ख़तरनाक रूप ले सकते हैं। अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वन विभाग, खासकर गुरूर वन परिक्षेत्र अधिकारी, वास्तव में जाग कर जमीन पर ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर यह मामला भी कागज़ों की फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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वर्जन -
ग्राम भानपुरी में किसान दंपत्ति पर जंगली सुअर के हमले की घटना सामने आई है। बचाव में उन्होंने जंगली सुअर को मार डाला। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत उन पर अपराध दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है।
चंद्रशेखर भंडारी
वन परिक्षेत्र अधिकारी, गुरूर