अल-नीनो की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने दी किसानों को सामयिक सलाह
उत्तर बस्तर कांकेर, 24 जून 2026
अल-नीनो की संभावित प्रभाव के कारण खरीफ सीजन में मानसून के देर से आने, शीघ्र समाप्त होने तथा फसल अवधि के दौरान खण्ड वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए सामयिक सलाह जारी की गई है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वर्षा प्रारंभ होने से पूर्व खेतों एवं मेड़ों की सफाई, जुताई तथा भूमि तैयारी के सभी कार्य समय पर पूर्ण कर लेने चाहिए। अल-नीनो की परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं उन्नत किस्मों का चयन करें, जिससे वर्षा की अनिश्चिता का प्रभाव कम हो। धान की रोपा पद्धति के बजाय धान की सीधी बुवाई को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। धान की सीधी बुवाई से लगभग 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, खेती की लागत में लगभग 5 हजार रुपये प्रति एकड़ तक कमी आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।
किसानों को खेतों में मेड़बंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करने तथा उच्चहन भूमि वाले क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहनी फसलें जैसे अरहर, मूंग, उड़द तथा तिलहनी फसलें मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन की खेती अपनाने की सलाह दी गई है। फसलों की बुवाई कतार पद्धति से करने की सलाह देते हुए बताया गया कि इससे नमी संरक्षण, खरपतवार नियंत्रण तथा पौधों की बेहतर वृद्धि में सहायता मिलती है। कृषि विभाग द्वारा फसलों के बीजों का बुवाई के पूर्व उपचार करने तथा बोवाई के तीन दिन से पांच दिन के भीतर अनुशंसित मात्रा में अंकुरण पूर्व खरपतवारनाशी दवाओं का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द की बुवाई पूर्ण कर लेने तथा अगस्त माह में तिल, सूरजमुखी तथा मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने एवं बुवाई के बाद खरपतवार नियंत्रण, मल्चिंग, वर्षा जल संचयन तथा आवश्यकतानुसार पर्णीय पोषण प्रबंधन अपनाने की भी सलाह दी गई है।
कम वर्षा की स्थिति में नत्रजन उर्वरकों के सीमित उपयोग तथा 2 प्रतिशत यूरिया घोल या नैनो यूरिया के पर्णीय छिड़काव को अधिक लाभकारी बताया गया है। वहीं दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल का छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है।