छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता ही नही बल्कि राष्ट्र की आत्मा को समझने दूरदर्शी ब्यक्तित्व थे--रतिराम

पंडरिया। राष्ट्र की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले Syama Prasad Mukherjee की पुण्यतिथि वनांचल ग्राम छिंदीडीह में बलिदान दिवस के रूप में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों, अदम्य साहस और त्यागपूर्ण जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आज भी देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है।
ग्राम पंचायत छिंदीडीह के बूथ क्रमांक 13 में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामवासी शामिल हुए। आयोजन के दौरान डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई तथा उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में रतिराम भट्ट मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को समझने वाले दूरदर्शी व्यक्तित्व थे। उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए जो संघर्ष किया, वह भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी व्यवस्था के विरोध में डॉ. मुखर्जी के ऐतिहासिक संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बलिदान राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना का जीवंत उदाहरण है।
कार्यक्रम में दशरथ कुंभकार (भाजपा महामंत्री), भोलाराम टेकाम (सरपंच), बूथ अध्यक्ष समेलाल, समय सिंह, राजकुमार, गंगाराम, बजरू सिंह, जयलाल, टीकाराम, राजू और पनकु राम सहित अनेक कार्यकर्ता एवं ग्रामवासी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके जीवनकाल में थे।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब राष्ट्रहित, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता जैसे विषय केंद्र में हैं, तब डॉ. मुखर्जी का जीवन युवाओं के लिए एक मजबूत वैचारिक आधार प्रस्तुत करता है। उनका स्पष्ट संदेश था कि राष्ट्र सर्वोपरि है और देश की अखंडता से कोई समझौता नहीं हो सकता।
पूरे कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रभक्ति का माहौल बना रहा। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे डॉ. मुखर्जी के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
बलिदान दिवस का यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रसेवा, समर्पण और वैचारिक दृढ़ता का संदेश देकर समाप्त हुआ। छिंदीडीह में आयोजित यह कार्यक्रम एक बार फिर यह संदेश दे गया कि महान व्यक्तित्व भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनके विचार सदैव समाज और राष्ट्र को दिशा देते रहते हैं।

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