छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

कागजों में दुकान, बिलों में भुगतान; बोड़ला जनपद में करोड़ों के फर्जीवाड़े की आहट

कवर्धा 
 ग्राम पंचायत बोदा-03 के हुरेसा नाला पुलिया निर्माण में सामने आई कथित अनियमितताओं ने अब और गंभीर रूप ले लिया है। मामले की पड़ताल में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है—जिन बिलों के आधार पर लाखों रुपए का भुगतान दर्शाया गया, बिल में अंकित पते पर संबंधित दुकान का कोई अस्तित्व ही नहीं मिला। इस खुलासे के बाद मामला केवल एक पुलिया निर्माण तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि बोड़ला जनपद पंचायत अंतर्गत कई पंचायतों में बड़े पैमाने पर फर्जी बिल लगाकर शासकीय राशि आहरण की आशंका गहरा गई है।
दस्तावेजों के अनुसार निर्माण सामग्री की खरीदी चंद्रवंशी बिल्डिंग मटेरियल एवं बोर खनन, वार्ड क्रमांक 10, बोड़ला (बांधा टोला) से दर्शाई गई है। लेकिन स्थानीय स्तर पर जांच-पड़ताल में सामने आया कि बिल में जिस स्थान को दुकान का पता बताया गया है, वहां कोई दुकान संचालित नहीं हो रही। यदि यह तथ्य जांच में सही साबित होता है तो यह केवल बिलों की गड़बड़ी नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से सरकारी राशि के दुरुपयोग का बड़ा मामला साबित हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार उक्त फर्म के नाम से केवल ग्राम पंचायत बोदा-03 ही नहीं, बल्कि जनपद पंचायत बोड़ला की कई अन्य ग्राम पंचायतों में भी निर्माण सामग्री आपूर्ति के नाम पर बिल लगाए गए हैं। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि एक ही संदिग्ध नाम और पते के सहारे कई पंचायतों में भुगतान निकालने का खेल चल रहा था। ऐसे में गड़बड़ी की राशि लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपए तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
मामले को और गंभीर बनाते हैं वे बिल, जिनमें दिनांक तक दर्ज नहीं है और वस्तु एवं सेवा कर पंजीयन क्रमांक भी अनुपस्थित है। इसके बावजूद भुगतान प्रक्रिया पूरी होना कई सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वैध निर्माण सामग्री विक्रेता के लिए व्यापार पंजीयन, कर संबंधी दस्तावेज, स्टॉक रिकॉर्ड और परिवहन अनुमति आवश्यक होती है। इनके बिना लाखों का भुगतान प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत की ओर संकेत करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि दुकान वास्तविक रूप से मौजूद नहीं थी, तो रेत, गिट्टी, सीमेंट और अन्य सामग्री की आपूर्ति आखिर किसने की। निर्माण कार्य में भारी मात्रा में सामग्री उपयोग दर्शाया गया है, लेकिन रॉयल्टी पर्ची, परिवहन अनुमति और वैध खरीद दस्तावेज की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे संदेह और गहरा गया है कि कहीं कागजों में ही सामग्री दिखाकर भुगतान तो नहीं निकाल लिया गया।
इस पूरे मामले को लेकर अब कलेक्टर कबीरधाम को लिखित शिकायत सौंप दी गई है। शिकायत में मांग की गई है कि जनपद पंचायत बोड़ला की सभी पंचायतों में उक्त फर्म के नाम से हुए भुगतानों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित सरपंच, सचिव, तकनीकी अमला, आपूर्तिकर्ता और भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठी है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एक पंचायत की गड़बड़ी नहीं बल्कि पूरे जनपद स्तर पर फैले संभावित फर्जी बिल नेटवर्क का बड़ा खुलासा साबित होगा। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि इस कथित घोटाले पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई होती है।

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