रायपुर। विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय के सर्वमंगलमय वर्षावास में जारी पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन धर्म और आत्मचिंतन की साधना का क्रम जारी रहा। धर्मसभा में परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. ने कर्तव्य बोध की चर्चा करते हुए श्रद्धालुओं को वैर का त्याग कर सभी के साथ मित्रवत व्यवहार करने की प्रेरणा दी।
मुनिश्री ने कहा कि वैर को छोड़े बिना पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की आराधना पूर्ण नहीं हो सकती। दोष, दुख और दुश्मन को कभी नहीं पालना चाहिए। सभी के प्रति मित्रता का भाव रखना चाहिए। स्वयं के साथ मित्रता होगी तो व्यक्ति दोषों से बचेगा, दोषों से बचेगा तो दुख से दूर रहेगा और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ सकेगा। वहीं दूसरों से मित्रता का भाव रहेगा तो दुश्मनी के लिए कोई स्थान ही नहीं बचेगा।
*मन-वचन-काया से वैर मुक्त होने का करें प्रयास*
मुनिश्री ने कहा कि पर्वाधिराज पर्युषण वैर से विमुक्त होने का अवसर है। इस दौरान मन, वचन और काया से वैरभाव से मुक्त होने का पुरुषार्थ करना चाहिए। क्षमापना को जीवन में धारण करने का पराक्रम करना होगा और भीतर की सकारात्मक शक्ति को जागृत करना होगा। पर्युषण केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर परिवर्तन लाने का अवसर है।
*साधर्मिक भक्ति से स्वार्थ पर विजय का संदेश*
मुनिश्री ने साधर्मिक भक्ति को स्वार्थ के युग पर विजय प्राप्त करने का महत्वपूर्ण कर्तव्य बताया। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का ध्यान रखना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी कारणवश धर्मकार्य से विमुख न हो। जो भगवान बन चुके हैं, उनकी भक्ति करना आसान है, लेकिन जो भावी भगवान हैं, उनकी भक्ति करना कठिन है। स्वार्थ पर विजय पाने का सबसे सार्थक उपाय साधर्मिक भक्ति है।
मुनिश्री ने कहा कि यदि कोई सक्षम है तो उन्हें मंदिर और उपाश्रय जैसे धार्मिक केंद्रों के निर्माण में सहयोग करना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को देव, गुरु और धर्म से जुड़ने का अवसर मिल सके। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने मुनिश्री के प्रवचन का श्रवण कर वैर का त्याग, क्षमापना,मैत्री और आत्मकल्याण की सीख को आत्मसात किया।
*14 सितंबर तक होगा कल्प सूत्र का वांचन*
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन 10 सितंबर को सुबह धर्मसभा में लाभार्थी परिवार बैंड बाजे के साथ भक्तिमय माहौल में मुनि भगवंत को कल्प सूत्र बोहराएगा। लाभार्थी परिवार द्वारा ग्रंथ को अपने मस्तक पर धारण कर निवास पर ले जाया गया। जहां ज्ञान की पूजा की गई। धर्मसभा में कल्प सूत्र बोहरने के बाद मुनिभगवंत के मुखारविंद से 14 सितंबर तक श्रावक-श्राविकाएं श्रुत का वांचन सुनेंगे। श्री संभवनाथ जिनालय में सजाई गई नयनाभिराम आंगी का दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।