धान, मक्का, दलहन एवं तिलहन फसलों के कीट-रोग से बचाने कृषि विभाग की सलाह
आगामी पांच दिनों तक बारिश की संभावना, किसान बरतें विशेष सावधानी
सूरजपुर/19 सितम्बर 2026
कृषि विभाग ने जानकारी दी है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमान अनुसार जिले में आगामी 05 दिनों तक आकाश में बादल छाये रहने तथा हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। वर्तमान में खरीफ मौसम में खेतों में पर्याप्त नमी एवं बादल छाये रहने के कारण कीट एवं रोगों के लिए अनुकूल वातावरण बना हुआ है जिसके कारण फसलों में कीट एवं रोग के प्रकोप की संभावना बढ़ी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग जिला सूरजपुर द्वारा जिले के किसानों को सलाह है कि वे अपनी फसल का नियमित निगरानी करें और देखें की कहीं कीट-व्याधि का प्रकोप अधिक तो नहीं हो रहा है।
किसान खेत में कीट, रोग के दिखाई देते ही अंधाधुंध तरीके से रासायनिक दवाइयों का उपयोग शुरु कर देते है जिसका खर्च कीट रोग से होने नुकसान से अधिक होता है इसलिए किसानों से आग्रह है कि वे रासायनिक दवाइयों का छिड़काव कीट-रोग के अर्थिक क्षति स्तर से अधिक होने पर ही करें। आर्थिक क्षति स्तर का निर्धारण एक वर्ग मीटर क्षेत्र/प्रति पौधे में कीटो से पहुंचाई गई नुकसान एवं कीट संख्या के आधार पर किया जाता है।
इस प्रकार समय पर निगरानी एवं समन्वित प्रबंधन उपाय अपनाने से फसल क्षति को कम किया जा सकता है और उत्पादन लागत एवं पर्यावरण प्रदूषण को भी कम किया जा सकता है।
विभिन्न फसलों में कीट-व्याधि प्रबंधन के लिए दिए गए सुझाव
धान में संतुलित मात्रा में उर्वरक का उपयोग करें और आवश्यकतानुसार पोटाश एवं जिंक सल्फेट का छिड़काव करें। गंगई कीट के प्रकोप से धान का कल्ले परिवर्तित होकर प्याज की पत्ती की तरह पोंगा बनता है जिसे सिलवरशूट कहते है इन कल्लों में बालियां नहीं आती है। इसकी निगरानी करें तथा लाईट ट्रेप खेत में लगायें। 1 वर्गमीटर में 5 प्रतिशत सिलवरशूट दिखाई पड़ने पर अनुशंसित दवा का उपयोग करें।
धान की फसल में भूरा माहू, हरा माहू, और सफेद माहू लगता है जिसमें भूरा माहू का ज्यादा प्रकोप होता है। यह कीट पौधे के तने से रसचूश लेती है जिससे पौधा पीला फिर लाल होकर झुलस जाता है। इस कीट का प्रकोप फसल में अधिक मात्रा में नाइट्रोजन का उपयोग करने एवं सघन पौधे में पहले होता है।
इसके नियंत्रण के लिए लाइट ट्रेप का उपयोग करें यदि 10 माहू प्रति पौधे दिखाई पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशक ब्युपरोफेजीन 25 प्रतिशत एस.सीस. 800 मि.ली./हेक्टेयर अथवा ट्राईफ्लूमिथोपाइरम 10 प्रतिशत एस.सी. 235 मि.ली. / हेक्टेयर का छिड़काव करें। रोग में फफूंद जनित एवं जीवाणु जनित झुलसा रोग का प्रकोप अधिक होता है इसमें पत्तियों/तनों में बैंगनी, भूरा तथा मटमैला धब्बा बना जो फैलकर पूरे पौधे को खराब कर देता है। रोग लक्षण की पहचान हेतु कृषि विभाग के स्थानीय अमलों से संपर्क कर सकते हैं। अधिक प्रकोप दिखाई देने पर अनुशंसित दवा का छिड़काव करें। संतुलित उर्वरक का उपयोग करें।
मक्का फसल को फॉल आर्मीवर्म से बचाने नियमित निगरानी करें किसान
खेत में जलभराव बिल्कुल न होने दे नालियां बनाकर पानी निकालें। फालआर्मीवर्म कीट का प्रकोप अधिक होता है इसके लिए पत्तियों की नियमित जांच करें और बड़ी इल्लियों अथवा अण्ड समूहों को नष्ट करें, फिरेमोन ट्रेप, लाइट ट्रेप का उपयोग करें 10 से 20 प्रतिशत क्षति दिखने पर क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एस.सी. 0.4 मि.ली. दवा/लीटर पानी अथवा स्पिनेटोरम 11.7 प्रतिशत एस.सी. 0.5 मि.ली./लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिये। एक ही कीटनाशक का उपयोग बार-बार न करें इससे कीटों में प्रतिरोध क्षमता का विकास होता है। पत्तियों पर धब्बा/झुलसा रोग के लक्षण दिखाई देने पर अनुशंसित फफूंदनाशी का प्रयोग करना चाहिए।
दलहन एवं तिलहनी फसलों को कीट-रोग से बचाने अपनाएं समन्वित प्रबंधन
लगातार बारिश में तना सड़न, पत्तियों में धब्बे रोग की संभावना रहती है इसलिए खेत में पानी जमा न होने दें। पीला मोजेक रोग के लक्षण वाले पौधों को प्रारंभिक अवस्था में उखाड़कर जमीन में गाड़ दे। खेतों में कीट एवं रोग के प्रकोप के लिए सतत् निगरानी करें। कीट प्रकोप एवं रोग लक्षण की पहचान हेतु कृषि विभाग के स्थानीय अमलों से संपर्क करें। कीटों की संख्या अधिक होने की स्थिति में कीट नियंत्रण हेतु प्रकाश ट्रेप, स्टिकी ट्रैप, फेरोमेन ट्रेप एवं अन्य जैविक विधियों को अपनायें। सफेद मक्खी की नियमित निगरानी करें क्योंकि यही पीला मोजेक वाइरस को फैलाती है। अधिक प्रकोप होने पर कीटनाशक 0.5 मि.ली./लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।